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गोविंद सागर बांध: रोज घट रहा 2.5 करोड़ लीटर पानी
अमर उजाला ब्यूूराो ललितपुर
Updated Sun, 20 Mar 2016 01:10 AM IST
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गाोविंद सागर बांध्ा
- फोटो : amar ujala
ललितपुर। सूखा शहर की पेयजल व्यवस्था पर असर दिखाने लगा है। गोविंद सागर बांध से प्रतिदिन दो से ढाई करोड़ लीटर ( एमसीएफटी) पानी कम हो रहा है। अगर यही स्थिति रही तो शहर में पेयजल की समस्या आगामी दिनों में विकराल रूप ले सकती है। विभागों की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जून माह के अंत तक शहर के नलों में पानी आना बंद हो जाएगा। ऐसे में शहर वासियों को पानी की कमी से बचाव के लिए कदम उठाने होंगे। हालांकि, बांध भरने के लिए जाखलौन पंप केनाल से बेतवा नदी का पानी बांध में डाला जा रहा था।
शहर में रहने वाले करीब दो लाख लोगों के पेयजल के लिए गोविंद सागर बांध एकमात्र साधन है। बांध से शहर के अलावा सीमावर्ती दर्जन भर से अधिक गांवों में भी पेयजल की सप्लाई की जाती है। इस वर्ष बरसात नहीं होने के कारण बांध का जलस्तर काफी गिर गया है। स्थिति यह है कि बांध से दो से ढाई करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन कम होता जा रहा है।
पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने जाखलौन पंप केनाल से बेतवा नदी का पानी गोविंद सागर बांध में डालने का विकल्प तलाशा था। लेकिन, यह विकल्प भी पूरे एक सप्ताह तक साथ नहीं दे सका। बेतवा नदी का जलस्तर नीचा हो जाने के कारण जाखलौन पंप केनाल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, इस कारण विगत 10 मार्च को केनाल से बांध में पानी की सप्लाई बंद हो गई है।
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बार तालाब में भेजना है 20 एमसीएफटी पानी
कस्बा बार का तालाब लगभग सूखने की कगार पर है। बार तालाब में पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने राजघाट निर्माण खंड को दी है। तालाब में पानी की सप्लाई गोविंद सागर बांध से की जाएगी और तालाब में करीब 20 एमसीएफटी पानी पहुंचाना है। पानी की सप्लाई गोविंद सागर बांध की बड़ी नहर से की जानी है। 20 एमसीएफटी (एक एमसीएफटी मतलब एक करोड़ लीटर पानी) पानी पहुंचाने के लिए 25 एमसीएफटी से भी अधिक पानी नहर में छोड़ना पड़ेगा, क्योंकि तालाब की बांध से दूूरी 34 किमी है। नहर में लीकेज होने के कारण पानी बर्बाद होगा।
केवल जल संस्थान ही उपाय
पेयजल संकट से शहरवासियों को बचाने के लिए केवल जल संस्थान ही एक उपाय है। राजघाट निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया तालाब में पानी छोड़ने के बाद भी जून माह के अंत तक गोविंद सागर बांध का जलस्तर इतना नीचे गिर जाएगा कि बांध से पानी लेने वाले जल संस्थान के पंप की लाइन पानी नहीं पकड़ पाएगी और शहर के नलों में पानी नहीं पहुंच पाएगा। शहरवासियों को पेयजल के संकट से बचाने के लिए जल संस्थान को अपने पंप की पाइप लाइन बांध की गहराई तक बढ़ानी पड़ेगी, जिससे पंप पानी को खींच सके। इसके अलावा पेयजल के संकट से बचने का कोई और उपाय नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि जाखलौन पंप केनाल ने तो अभी से ही साथ छोड़ दिया है।
गोविंद सागर बांध से प्रतिदिन दो से ढाई एमसीएफटी पानी कम हो रहा है। बार तालाब में पानी छोड़ने के बाद जून माह के अंत तक शहर में पेयजल की समस्या बढ़ जाएगी। जल संस्थान को अपनी पंप लाइन को गहराई में उतारना होगा।
- एके सिंह
अधिशासी अधिकारी
राजघाट सिंचाई निर्माण खंड
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शहर में रहने वाले करीब दो लाख लोगों के पेयजल के लिए गोविंद सागर बांध एकमात्र साधन है। बांध से शहर के अलावा सीमावर्ती दर्जन भर से अधिक गांवों में भी पेयजल की सप्लाई की जाती है। इस वर्ष बरसात नहीं होने के कारण बांध का जलस्तर काफी गिर गया है। स्थिति यह है कि बांध से दो से ढाई करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन कम होता जा रहा है।
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पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने जाखलौन पंप केनाल से बेतवा नदी का पानी गोविंद सागर बांध में डालने का विकल्प तलाशा था। लेकिन, यह विकल्प भी पूरे एक सप्ताह तक साथ नहीं दे सका। बेतवा नदी का जलस्तर नीचा हो जाने के कारण जाखलौन पंप केनाल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, इस कारण विगत 10 मार्च को केनाल से बांध में पानी की सप्लाई बंद हो गई है।
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बार तालाब में भेजना है 20 एमसीएफटी पानी
कस्बा बार का तालाब लगभग सूखने की कगार पर है। बार तालाब में पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने राजघाट निर्माण खंड को दी है। तालाब में पानी की सप्लाई गोविंद सागर बांध से की जाएगी और तालाब में करीब 20 एमसीएफटी पानी पहुंचाना है। पानी की सप्लाई गोविंद सागर बांध की बड़ी नहर से की जानी है। 20 एमसीएफटी (एक एमसीएफटी मतलब एक करोड़ लीटर पानी) पानी पहुंचाने के लिए 25 एमसीएफटी से भी अधिक पानी नहर में छोड़ना पड़ेगा, क्योंकि तालाब की बांध से दूूरी 34 किमी है। नहर में लीकेज होने के कारण पानी बर्बाद होगा।
केवल जल संस्थान ही उपाय
पेयजल संकट से शहरवासियों को बचाने के लिए केवल जल संस्थान ही एक उपाय है। राजघाट निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया तालाब में पानी छोड़ने के बाद भी जून माह के अंत तक गोविंद सागर बांध का जलस्तर इतना नीचे गिर जाएगा कि बांध से पानी लेने वाले जल संस्थान के पंप की लाइन पानी नहीं पकड़ पाएगी और शहर के नलों में पानी नहीं पहुंच पाएगा। शहरवासियों को पेयजल के संकट से बचाने के लिए जल संस्थान को अपने पंप की पाइप लाइन बांध की गहराई तक बढ़ानी पड़ेगी, जिससे पंप पानी को खींच सके। इसके अलावा पेयजल के संकट से बचने का कोई और उपाय नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि जाखलौन पंप केनाल ने तो अभी से ही साथ छोड़ दिया है।
गोविंद सागर बांध से प्रतिदिन दो से ढाई एमसीएफटी पानी कम हो रहा है। बार तालाब में पानी छोड़ने के बाद जून माह के अंत तक शहर में पेयजल की समस्या बढ़ जाएगी। जल संस्थान को अपनी पंप लाइन को गहराई में उतारना होगा।
- एके सिंह
अधिशासी अधिकारी
राजघाट सिंचाई निर्माण खंड