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सरकारी विभागों पर 9.57 करोड़ का बिजली बिल बकाया
lalitpur
Updated Tue, 05 Jul 2016 01:18 AM IST
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ललितपुर। विद्युत विभाग द्वारा आम उपभोक्ताओं से हर माह विद्युत वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है, विद्युत वसूली के दौरान मात्र पांच हजार रुपये तक के बकाए पर ही कनेक्शन काट दिया जाता है, जबकि सरकारी विभागों पर लाखों रुपये बकाया होने के बाद भी उन पर विभाग की मेहरबानी बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जनपद में सभी प्राइमरी स्कूलों समेत सभी सरकारी विभागों पर 9.57 करोड़ रुपये विद्युुत बकाएदारी चल रही है। यदि विभाग यही बकाया वसूल ले तो कम से कम एक माह का लक्ष्य आसानी से प्राप्त हो जाएगा।
जनपद में प्राइमरी स्कूल समेत कुल 991 सरकारी कार्यालयों व आवासों द्वारा बिजली का उपभोग किया जा रहा है। अधिकांश सरकारी विभाग ऐसे हैं, जहां खपत अधिक होने के बाद भी मात्र एक से दो किलोवाट लोड पर कनेक्शन जारी किए गए हैं। जबकि बहुत से विभाग तो ऐसे हैं, जिनमें एसी, कूलर जैसे अधिक लोड वाले विद्युत उपकरण चल रहे हैं, लेकिन बिजली विभाग द्वारा इन सरकारी विभागों में जाकर खपत के सापेक्ष आंकलन कर लोड नहीं बढ़ाए गए हैं। यहां तक तो ठीक है कई सरकारी विभागों में तो आज भी पुरानी प्रणाली के काले विद्युत मीटरों से ही रीडिंग लेकर बिल बनाए जाते हैं। ऐसे अधिकांश सरकारी विभागों द्वारा लाखों रुपये की बकाएदारी होने के बाद भी बिलों का भुुगतान करने में विलंब किया जाता है, लेकिन सरकारी विभाग होने के नाते इनके विद्युत कनेक्शन नहीं काटे जाते हैं और न ही इन कनेक्शनधारी विभागों पर कोई विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। बिजली विभाग द्वारा इन सरकारी विभागों पर कार्रवाई करना तो दूर लाखों रुपये विद्युत बकाया भी कई सालों तक अटका रहता है। यदि बिजली विभाग के आंकड़ों का आंकलन किया जाए तो जनपद में 245 सरकारी विभागों पर 4 करोड़, 7 लाख,13 हजार 541 रुपए, 746 प्राइमरी स्कूलों पर 4 करोड़, 80 लाख 74 हजार 171 रुपए बकाया बताया गया है। प्राइमरी स्कूलों को मिलाकर सभी 991 सरकारी कार्यालय व आवास पर कुल 9.57 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
सरकारी विभागों से बकाया वसूलने के लिए समय समय पर पत्राचार किया जाता रहा है। कम लोड वाले कनेक्शनों की जांच कर खपत के अनुसार लोड़ बढ़ाया जाएगा।
अखिलेश कुमार वर्मा उपखंड अधिकारी प्रथम
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जनपद में प्राइमरी स्कूल समेत कुल 991 सरकारी कार्यालयों व आवासों द्वारा बिजली का उपभोग किया जा रहा है। अधिकांश सरकारी विभाग ऐसे हैं, जहां खपत अधिक होने के बाद भी मात्र एक से दो किलोवाट लोड पर कनेक्शन जारी किए गए हैं। जबकि बहुत से विभाग तो ऐसे हैं, जिनमें एसी, कूलर जैसे अधिक लोड वाले विद्युत उपकरण चल रहे हैं, लेकिन बिजली विभाग द्वारा इन सरकारी विभागों में जाकर खपत के सापेक्ष आंकलन कर लोड नहीं बढ़ाए गए हैं। यहां तक तो ठीक है कई सरकारी विभागों में तो आज भी पुरानी प्रणाली के काले विद्युत मीटरों से ही रीडिंग लेकर बिल बनाए जाते हैं। ऐसे अधिकांश सरकारी विभागों द्वारा लाखों रुपये की बकाएदारी होने के बाद भी बिलों का भुुगतान करने में विलंब किया जाता है, लेकिन सरकारी विभाग होने के नाते इनके विद्युत कनेक्शन नहीं काटे जाते हैं और न ही इन कनेक्शनधारी विभागों पर कोई विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। बिजली विभाग द्वारा इन सरकारी विभागों पर कार्रवाई करना तो दूर लाखों रुपये विद्युत बकाया भी कई सालों तक अटका रहता है। यदि बिजली विभाग के आंकड़ों का आंकलन किया जाए तो जनपद में 245 सरकारी विभागों पर 4 करोड़, 7 लाख,13 हजार 541 रुपए, 746 प्राइमरी स्कूलों पर 4 करोड़, 80 लाख 74 हजार 171 रुपए बकाया बताया गया है। प्राइमरी स्कूलों को मिलाकर सभी 991 सरकारी कार्यालय व आवास पर कुल 9.57 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
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सरकारी विभागों से बकाया वसूलने के लिए समय समय पर पत्राचार किया जाता रहा है। कम लोड वाले कनेक्शनों की जांच कर खपत के अनुसार लोड़ बढ़ाया जाएगा।
अखिलेश कुमार वर्मा उपखंड अधिकारी प्रथम