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बुरे समय के बाद आता है अच्छा समय : निर्भय सागर
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- आचार्यश्री ने कहा- मौन धारण करने पर आत्म शांति की अनुभूति
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बुरे समय के बाद अच्छा समय आता है, जैसे रात के बाद दिन, यह बात धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन संत आचार्य निर्भय सागर ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास करो और निरंतर पुरुषार्थ करो और बाकी सब प्रभु पर छोड़ दो, ऐसा सदा विचार करना यही महानता है। मौन आत्म शांति दिलाता है खुद से परिचय कराता है। आचार्य श्री ने कहा मौन मुनि का शस्त्र है और दोष ढांकने का वस्त्र है इसलिए मौन रहना चाहिए, जैसे कड़वी दवाई की गोलियां चवाई नहीं जाती वैसे ही कड़वी बातें उगली नहीं जाती बल्कि पच जाती हैं।
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में आचार्यश्री ने कहा सदा कोशिशें करने वाले को मिलती है जीत, जो निकल गया समय यह हो गया अतीत। अरे दूसरों से नहीं सही समय पर खुद से कर लें सच्ची प्रीत। दूसरों को उंगली उठाने वाला दुर्जन है लेकिन दूसरों को उठाने के लिए उंगली पकड़ने वाला सज्जन। उन्होंने कहा बुरे आदमी द्वारा बुरा किया जाना उसका कर्म है, लेकिन उसके साथ अच्छा करना अच्छे आदमी का धर्म है। मूर्ख वे हैं जो बुरे समय में परमात्मा के गीत गाते हैं और अच्छे समय में विषय भोगों में लीन हो जाते हैं। दुख-दर्द आपत्ति-विपत्ति में मुस्कुराहट के साथ काम करने वाला व्यक्ति दीन दुखियों का मसीहा बनता है। इस अवसर पर वीर सेवा संघ के कैप्टन अनंत सराफ, अशोक सिघई, प्रदीप चिगलौआ, संतोष जैन बामौर, मनोज जैन कामरेड, मोहित जैन, सुनील कैलवारा, डाॅ. अक्षय टटैया, आकाश जैन, अक्षय अलया मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बुरे समय के बाद अच्छा समय आता है, जैसे रात के बाद दिन, यह बात धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैन संत आचार्य निर्भय सागर ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान पर विश्वास करो और निरंतर पुरुषार्थ करो और बाकी सब प्रभु पर छोड़ दो, ऐसा सदा विचार करना यही महानता है। मौन आत्म शांति दिलाता है खुद से परिचय कराता है। आचार्य श्री ने कहा मौन मुनि का शस्त्र है और दोष ढांकने का वस्त्र है इसलिए मौन रहना चाहिए, जैसे कड़वी दवाई की गोलियां चवाई नहीं जाती वैसे ही कड़वी बातें उगली नहीं जाती बल्कि पच जाती हैं।
पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटामंदिर में आचार्यश्री ने कहा सदा कोशिशें करने वाले को मिलती है जीत, जो निकल गया समय यह हो गया अतीत। अरे दूसरों से नहीं सही समय पर खुद से कर लें सच्ची प्रीत। दूसरों को उंगली उठाने वाला दुर्जन है लेकिन दूसरों को उठाने के लिए उंगली पकड़ने वाला सज्जन। उन्होंने कहा बुरे आदमी द्वारा बुरा किया जाना उसका कर्म है, लेकिन उसके साथ अच्छा करना अच्छे आदमी का धर्म है। मूर्ख वे हैं जो बुरे समय में परमात्मा के गीत गाते हैं और अच्छे समय में विषय भोगों में लीन हो जाते हैं। दुख-दर्द आपत्ति-विपत्ति में मुस्कुराहट के साथ काम करने वाला व्यक्ति दीन दुखियों का मसीहा बनता है। इस अवसर पर वीर सेवा संघ के कैप्टन अनंत सराफ, अशोक सिघई, प्रदीप चिगलौआ, संतोष जैन बामौर, मनोज जैन कामरेड, मोहित जैन, सुनील कैलवारा, डाॅ. अक्षय टटैया, आकाश जैन, अक्षय अलया मौजूद रहे।
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