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रणछोड धाम से रहा है भगवान श्रीकृष्ण का गहरा नाता
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रणछोड़ धाम से रहा है भगवान श्रीकृष्ण का गहरा नाता
डोंगरा खुर्द( ललितपुर)। जनपद में यूपी-एमपी की सीमा को विभाजित करती बेतवा नदी के तट पर यूपी की सीमा में धौर्रा के पास प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल रणछोड़ धाम स्थित है। मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस कालयवन के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को रणछोड़ कर जाना पड़ा था, तभी से इस स्थान का नाम रणछोड़ धाम पड़ गया जो आज धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है।
रणछोड़ धाम को ललितपुर जनपद के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में माना जाता है। बेतवा नदी की निर्मल जलधारा एवं हरे भरे जंगल इस स्थान की खूबसूरती को और भी अधिक बढ़ा देते हैं। रणछोर धाम मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। धौर्रा रेलवे स्टेशन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से होते हुए घने जंगल के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। बताया जाता है की यहां भगवान रणछोर धाम के मंदिर का निर्माण राजा मुचकुंद ने लगभग पांच हजार वर्ष पहले करवाया था जो आज पुरातत्व विभाग के आधीन और संरक्षित हैं।
मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण गरुड़ पर विराजमान हैं। मूर्ति में चौदह भुजाएं हैं, गर्भगृह में नर-नारी रूप में शिव-पार्वती हैं। भगवान नारायण की चतुर्भुजी तीन मूर्तियां हैं। मुख्य मंदिर के बगल में छोटा मंदिर है जिसमें नारायण विष्णु विराजमान हैं। कालयवन (कालनेमि) की मूर्ति तुलसी गृह में स्थित है। भगवान श्रीकृष्ण ने कालयवन को मारने के लिए अपनी बुआ के लड़के और चंदेरी के राजा शिशुपाल से मिलकर योजना बनाई थी और वह ललितपुर में दूधई के राजा कश्यप की पत्नी अदिति से मदद लेने आए थे। बताते हैं कि महाभारत काल में जरासंध कालयवन का मित्र था और जरासंध के मरने का बदला लेने के लिए कालयवन ने द्वारिकापुरी पर आक्रमण कर दिया था। कालयवन श्रीकृष्ण का पीछा करते हुए मुचकुंद गुफा तक पहुंच गया, जहां उन्होंने अपना पीतांबर पहले से बनाई योजना के तहत मुचकुंद ऋषि पर डाल दिया और स्वयं छिप गुफा में ही कहीं छिप गए। कालयवन पीछा करते हुए गुफा तक पहुंच गया, जहां अपने मद में वरदान भूल गया और उसने मुचकुंद ऋषि की तपस्या भंग कर दी। तपस्या भंग करते ही ऋषि की आंखों से निकली दिव्य ज्वाला ने कालयवन को भस्म कर दिया। यहीं पर भगवान रणछोड़ का प्राचीन मंदिर भी स्थित हैं। हर वर्ष जन्माष्टमी पर श्रीरणछोड़जी मंदिर में भव्य आयोजन होते हैं।
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श्रीकृष्ण की पूजा के दौरान होती है श्रीराम की स्तुति
इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता है की यहां मंदिर भगवान श्रीकृष्ण का है पूजा अर्चना के समय स्तुति श्री राम की जाती है
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डोंगरा खुर्द( ललितपुर)। जनपद में यूपी-एमपी की सीमा को विभाजित करती बेतवा नदी के तट पर यूपी की सीमा में धौर्रा के पास प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल रणछोड़ धाम स्थित है। मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और राक्षस कालयवन के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को रणछोड़ कर जाना पड़ा था, तभी से इस स्थान का नाम रणछोड़ धाम पड़ गया जो आज धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात है।
रणछोड़ धाम को ललितपुर जनपद के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में माना जाता है। बेतवा नदी की निर्मल जलधारा एवं हरे भरे जंगल इस स्थान की खूबसूरती को और भी अधिक बढ़ा देते हैं। रणछोर धाम मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। धौर्रा रेलवे स्टेशन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से होते हुए घने जंगल के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। बताया जाता है की यहां भगवान रणछोर धाम के मंदिर का निर्माण राजा मुचकुंद ने लगभग पांच हजार वर्ष पहले करवाया था जो आज पुरातत्व विभाग के आधीन और संरक्षित हैं।
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मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण गरुड़ पर विराजमान हैं। मूर्ति में चौदह भुजाएं हैं, गर्भगृह में नर-नारी रूप में शिव-पार्वती हैं। भगवान नारायण की चतुर्भुजी तीन मूर्तियां हैं। मुख्य मंदिर के बगल में छोटा मंदिर है जिसमें नारायण विष्णु विराजमान हैं। कालयवन (कालनेमि) की मूर्ति तुलसी गृह में स्थित है। भगवान श्रीकृष्ण ने कालयवन को मारने के लिए अपनी बुआ के लड़के और चंदेरी के राजा शिशुपाल से मिलकर योजना बनाई थी और वह ललितपुर में दूधई के राजा कश्यप की पत्नी अदिति से मदद लेने आए थे। बताते हैं कि महाभारत काल में जरासंध कालयवन का मित्र था और जरासंध के मरने का बदला लेने के लिए कालयवन ने द्वारिकापुरी पर आक्रमण कर दिया था। कालयवन श्रीकृष्ण का पीछा करते हुए मुचकुंद गुफा तक पहुंच गया, जहां उन्होंने अपना पीतांबर पहले से बनाई योजना के तहत मुचकुंद ऋषि पर डाल दिया और स्वयं छिप गुफा में ही कहीं छिप गए। कालयवन पीछा करते हुए गुफा तक पहुंच गया, जहां अपने मद में वरदान भूल गया और उसने मुचकुंद ऋषि की तपस्या भंग कर दी। तपस्या भंग करते ही ऋषि की आंखों से निकली दिव्य ज्वाला ने कालयवन को भस्म कर दिया। यहीं पर भगवान रणछोड़ का प्राचीन मंदिर भी स्थित हैं। हर वर्ष जन्माष्टमी पर श्रीरणछोड़जी मंदिर में भव्य आयोजन होते हैं।
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श्रीकृष्ण की पूजा के दौरान होती है श्रीराम की स्तुति
इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता है की यहां मंदिर भगवान श्रीकृष्ण का है पूजा अर्चना के समय स्तुति श्री राम की जाती है