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जिले में पहले भी मिल चुकी जिलेटिन की छड़ें
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ललितपुर। जखौरा थाना क्षेत्र के ग्राम खसुआ में रविवार को विस्फोटक सामग्री मिली है। जिले में यह पहला मामला नहीं है। बल्कि खदानों में पत्थर तोड़ने में प्रयुक्त की जाने वाली जिलेटिन की छड़ें, अलग-अलग क्षेत्रों में कई बार मिल चुकी हैं।
जनपद में ग्राम मड़वारी, कालापहाड़ व राजघाट क्षेत्र में सैंड स्टोन, ग्रेनाइट की खदानों के साथ ही पूरे जिले में करीब एक दर्जन से अधिक क्रशर संचालित हो रहे हैं। बालू, मौरंग को छोड़कर अन्य किसी खनिज का खनन बिना ब्लास्टिंग के संभव नहीं है। खदानों में विस्फोट करने के लिए जिलेटिन, डायनामाइट, सैल व बैटरी आदि का उपयोग किया जाता है। जिला में एक भी लाइसेंसधारी नहीं है, फिर भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल हो रहा है।
जानकारों के अनुसार मध्य प्रदेश में जिलेटिन लाइसेंसधारी हैं। वहां से अवैध विस्फोटक लाकर खदान मालिकों को आसानी से उपलब्ध करा दिया जाता है। पुलिस प्रशासन से छिपाकर घनी बस्तियों में इसका अवैध रुप से भंडारण कर लिया जाता है। यहां खदानों में खनन में इस्तेमाल करने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कई बार छिपाकर रखा गया विस्फोटक पकड़ा भी गया है। मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश में प्रवेश के दौरान में कई बार विस्फोटक जिला की सीमा क्षेत्रों में पकड़ा जा चुका है।
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तीन वर्ष पूर्व फरवरी 2017 में पूराकलां क्षेत्र में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला के थाना पलेरा निवासी एक युवक के कब्जे से 382 जिलेटिन की छड़ें पकड़ी गई थीं, जिन्हें दैलवारा की एक खदान पर ले जाया जा रहा था। इसी प्रकार कई वर्ष पहले धौर्रा क्षैत्र में एक व्यक्ति के घर में जबरदस्त विस्फोट हो गया था, जिसमें पूरा घर धराशायी हो गया था और उस विस्फोट में एक महिला की मौत भी हो गई थी। जबकि पांच वर्ष पहले जखौरा के राजघाट गांव में एक संदिग्ध छड़ से खेलने के दौरान विस्फोट होने से बच्ची घायल हो गई थी। पाली व धौरा क्षेत्र में भी विस्फोटक जिलेटिन की छड़ें पूर्व में मिल चुकीं है। विस्फोटक जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर रखने के मामले पाली क्षेत्र के एक कबूतरा जाति के युवक पर कार्रवाई की गई थी।
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जनपद में ग्राम मड़वारी, कालापहाड़ व राजघाट क्षेत्र में सैंड स्टोन, ग्रेनाइट की खदानों के साथ ही पूरे जिले में करीब एक दर्जन से अधिक क्रशर संचालित हो रहे हैं। बालू, मौरंग को छोड़कर अन्य किसी खनिज का खनन बिना ब्लास्टिंग के संभव नहीं है। खदानों में विस्फोट करने के लिए जिलेटिन, डायनामाइट, सैल व बैटरी आदि का उपयोग किया जाता है। जिला में एक भी लाइसेंसधारी नहीं है, फिर भी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल हो रहा है।
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जानकारों के अनुसार मध्य प्रदेश में जिलेटिन लाइसेंसधारी हैं। वहां से अवैध विस्फोटक लाकर खदान मालिकों को आसानी से उपलब्ध करा दिया जाता है। पुलिस प्रशासन से छिपाकर घनी बस्तियों में इसका अवैध रुप से भंडारण कर लिया जाता है। यहां खदानों में खनन में इस्तेमाल करने के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कई बार छिपाकर रखा गया विस्फोटक पकड़ा भी गया है। मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश में प्रवेश के दौरान में कई बार विस्फोटक जिला की सीमा क्षेत्रों में पकड़ा जा चुका है।
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तीन वर्ष पूर्व फरवरी 2017 में पूराकलां क्षेत्र में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला के थाना पलेरा निवासी एक युवक के कब्जे से 382 जिलेटिन की छड़ें पकड़ी गई थीं, जिन्हें दैलवारा की एक खदान पर ले जाया जा रहा था। इसी प्रकार कई वर्ष पहले धौर्रा क्षैत्र में एक व्यक्ति के घर में जबरदस्त विस्फोट हो गया था, जिसमें पूरा घर धराशायी हो गया था और उस विस्फोट में एक महिला की मौत भी हो गई थी। जबकि पांच वर्ष पहले जखौरा के राजघाट गांव में एक संदिग्ध छड़ से खेलने के दौरान विस्फोट होने से बच्ची घायल हो गई थी। पाली व धौरा क्षेत्र में भी विस्फोटक जिलेटिन की छड़ें पूर्व में मिल चुकीं है। विस्फोटक जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर रखने के मामले पाली क्षेत्र के एक कबूतरा जाति के युवक पर कार्रवाई की गई थी।