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बगल में पानी, फिर भी आफत बनी किसानी
lalitpur
Updated Mon, 05 Dec 2016 01:23 AM IST
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किसान
- फोटो : demo pic
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पिछले तीन साल से परेशानी झेल रहे किसानों ने इस बार काफी आशा के साथ बुवाई की, लेकिन पानी ने उनकी आशाओं पर तुषारापात कर दिया है। सबसे ज्यादा परेशानी जामनी बांध के बगल में स्थित आधा दर्जन से अधिक गांव के लोगों को है। इनके बगल में पानी का भंडार है, लेकिन खेत सूखे हैं।
ग्राम पारौल, पटना, ड़ोंगरा, दिगवार, तरावली, बरेजा, मकरीपुर, बछरई, महराजपुरा, ललितापुर, झरावटा, सरखडी, नयागांव, जमौरा व उमरिया आदि गांवों के किसानों लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जामनीबांध के भराव क्षेत्र से बरखेरा लिफ्ट कैनाल बनाई जाए जिसके जरिए हजारों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सके। किसानों की मांग पर लिफ्ट कैनाल को सिंचाई विभाग ने सर्वे भी किया है, लेकिन धरातल में कोई काम नहीं हुआ है। किसानों का कहना है, कि बांध के पास होने के बावजूद इन गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है।
क्षेत्र के कुछ किसानों ने ट्यूबवेल, कुआं आदि बनवाकर सिंचाई के संसाधन बनाए हैं। जितना डीजल डालते उतना ही पानी निकालते हैं, इसलिए किसानों का कर्ज दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कई किसान तो घर परिवार लेकर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। कुछ किसानों ने अपनी जमीन गिरवी रख कर ट्यूबवेल लगवाए लेकिन सफलता नहीं मिलने पर वह कर्ज के दलदल में फंस गए। कई किसानों मजबूर होकर बड़ी मेहनत करके पांच हजार फीट पाइप बिछा कर अपने- अपने खेतों तक पानी ले जाकर सिंचाई करते हैं। ऐसा करने में उक्त किसानों का लाखों रुपए खर्च हो जाता है।
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बुवाई के लिए पैसा नहीं है
ग्राम ड़ोगरा खुर्द निवासी सियाराम तिवारी ने बताया कि कर्ज लेकर खेत में खरीफ की फसल की बुवाई करवाई थी लेकिन फसल नहीं उगी थी। किसान कार्ड पहले से ही खाली था। नोटबंदी ने और भी हालात बिगाड़ दिए हैं। भूप्रताप सिंह ने बताया कि सूखा राहत के पैसे अगर किसानों को वितरित कर दिये होते तो मुसीबत खड़ी न होती।
वर्ल्ड बैंक से हो रहा बांध का जीर्णोद्धार
वर्ल्ड बैंक की तरफ से जनपद के सजनाम, जामनी व रोहिणी बांध का जीर्णोद्धार कराने के लिए करोड़ों रुपयों का बजट उपलब्ध कराया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत तीनों बांधों के साथ ही इनकी नहरों का जीर्णोद्धार किया जाना है। प्रोजेक्ट की शुरुआत में आंध्र प्रदेश की एक कंपनी को ठेका दिया गया। यह कंपनी काम को अधूरा छोड़कर भाग गई। इस कारण से यह काम तय सीमा में पूरा नहीं हो पाया और अधूरी नहरों के कारण टेल तक पानी न पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों की मांग है, कि वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट में ही लिफ्ट कैनाल को शामिल कर लिया जाए, जिससे दर्जनों गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।
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ग्राम पारौल, पटना, ड़ोंगरा, दिगवार, तरावली, बरेजा, मकरीपुर, बछरई, महराजपुरा, ललितापुर, झरावटा, सरखडी, नयागांव, जमौरा व उमरिया आदि गांवों के किसानों लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जामनीबांध के भराव क्षेत्र से बरखेरा लिफ्ट कैनाल बनाई जाए जिसके जरिए हजारों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सके। किसानों की मांग पर लिफ्ट कैनाल को सिंचाई विभाग ने सर्वे भी किया है, लेकिन धरातल में कोई काम नहीं हुआ है। किसानों का कहना है, कि बांध के पास होने के बावजूद इन गांवों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है।
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क्षेत्र के कुछ किसानों ने ट्यूबवेल, कुआं आदि बनवाकर सिंचाई के संसाधन बनाए हैं। जितना डीजल डालते उतना ही पानी निकालते हैं, इसलिए किसानों का कर्ज दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कई किसान तो घर परिवार लेकर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। कुछ किसानों ने अपनी जमीन गिरवी रख कर ट्यूबवेल लगवाए लेकिन सफलता नहीं मिलने पर वह कर्ज के दलदल में फंस गए। कई किसानों मजबूर होकर बड़ी मेहनत करके पांच हजार फीट पाइप बिछा कर अपने- अपने खेतों तक पानी ले जाकर सिंचाई करते हैं। ऐसा करने में उक्त किसानों का लाखों रुपए खर्च हो जाता है।
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बुवाई के लिए पैसा नहीं है
ग्राम ड़ोगरा खुर्द निवासी सियाराम तिवारी ने बताया कि कर्ज लेकर खेत में खरीफ की फसल की बुवाई करवाई थी लेकिन फसल नहीं उगी थी। किसान कार्ड पहले से ही खाली था। नोटबंदी ने और भी हालात बिगाड़ दिए हैं। भूप्रताप सिंह ने बताया कि सूखा राहत के पैसे अगर किसानों को वितरित कर दिये होते तो मुसीबत खड़ी न होती।
वर्ल्ड बैंक से हो रहा बांध का जीर्णोद्धार
वर्ल्ड बैंक की तरफ से जनपद के सजनाम, जामनी व रोहिणी बांध का जीर्णोद्धार कराने के लिए करोड़ों रुपयों का बजट उपलब्ध कराया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत तीनों बांधों के साथ ही इनकी नहरों का जीर्णोद्धार किया जाना है। प्रोजेक्ट की शुरुआत में आंध्र प्रदेश की एक कंपनी को ठेका दिया गया। यह कंपनी काम को अधूरा छोड़कर भाग गई। इस कारण से यह काम तय सीमा में पूरा नहीं हो पाया और अधूरी नहरों के कारण टेल तक पानी न पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों की मांग है, कि वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट में ही लिफ्ट कैनाल को शामिल कर लिया जाए, जिससे दर्जनों गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।