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एक लाख किसानों की झोली खाली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:18 AM IST
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farmers, lalitpur news
- फोटो : demopic
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ललितपुर। ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से तबाह फसलों के मुआवजा की आस के लिए किसान एक साल बाद भी प्रशासन की चौखट के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 355 करोड़ रुपये के नुकसान के सापेक्ष अब तक किसानों को 180.48 करोड़ रुपये की धनराशि ही आवंटित की गई है। वह भी लघु एवं सीमांत किसानों को, ऐसे में बड़े किसान की उम्मीद की आस ही टूट गई ओलावृष्टि को हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी भी एक लाख से अधिक किसान मुआवजा की आस लगाए बैठे हैं।
रबी फसल सीजन के वर्ष 2015 में फरवरी/ मार्च माह में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से जिले में भारी तबाही हुई थी। जिले के 735 गांवों के 2,89,593 किसानों की फसल बरबाद हो गई थी। जिला प्रशासन ने आनन- फानन में फसल क्षति का सर्वे कराया और शासन को रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट के अनुसार 355 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि शासन से पैसा आएगा और उनकी फसल क्षति की भरपाई हो जाएगी।
लेकिन, पैसा किस्तों में जारी किया गया और कैटेगिरी के हिसाब से पहले लघु और सीमांत किसानों को फसल क्षति का मुआवजा वितरित किया गया। स्थिति यह है कि अब तक 180.48 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। यह पैसा भी लघु और सीमांत किसानों को बांटा गया, लेकिन अभी तक किसानों की भरपाई नहीं हुई है। बड़े किसान अभी भी मुआवजा का इंतजार कर रहे हैं।
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जिले में फसल क्षति का आकलन किया गया था कि 2,89,593 किसानों को नुकसान हुआ है, इसमें से लघु और सीमांत किसान 2,47,303 थे, इनका फसल क्षेत्रफल 178464.160 हेक्टेयर है। इसके अलावा 42,290 वृहद किसानों को 27,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल का नुकसान हुआ था। इस हिसाब से लघु और सीमांत किसानों को 240,92,66,241 रुपये और वृहद किसानों को 114,11,30,111 रुपये का नुकसान हुआ था। जो धनराशि आवंटित की गई है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी भी जिले के कम से कम आधे किसानों को फसल क्षति का मुआवजा नहीं मिला है।
सूखा ने तोड़ी कमर
ललितपुर। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से हुए फसल के नुकसान के बाद किसानों को उम्मीद थी कि उनके नुकसान की भरपाई खरीफ फसल के दौरान हो जाएगी, लेकिन सूखा पड़ गया और उर्द में पीला मोजेक रोग लग जाने से फसल खराब हो गई। ऐसे में किसानों की रही- सही उम्मीद भी खत्म हो गई। सूखा के दौरान जिले में कराए गए सर्वे के अनुसार 180 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान का आकलन किया गया था। इस तरह रबी में 355 करोड़ और खरीफ में 180 करोड़ कुल मिलाकर 535 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था और अब तक सिर्फ 180.48 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा सका है।
फिर हुई ओलावृष्टि
ललितपुर। वर्तमान रबी सीजन में जैसे- तैसे किसानों के फसल बोई थी। पानी का इंतजाम कर सिंचाई भी कर दी। किसानों को उम्मीद थी कि कुछ फसल पैदा हो जाएगी और पुराने नुकसान की भरपाई हो जाएगी। इसको लेकर जिला प्रशासन ने सर्वे कराया, लेकिन फसल क्षति 05 से 25 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। ऐसे में इस नुकसान का मुआवजा किसान को मिलना नहीं है, क्योंकि मानके के अनुसार 33 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, इस रिपोर्ट से किसान इत्तेफाक नहीं रखते हैं।
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रबी फसल सीजन के वर्ष 2015 में फरवरी/ मार्च माह में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से जिले में भारी तबाही हुई थी। जिले के 735 गांवों के 2,89,593 किसानों की फसल बरबाद हो गई थी। जिला प्रशासन ने आनन- फानन में फसल क्षति का सर्वे कराया और शासन को रिपोर्ट भेज दी। रिपोर्ट के अनुसार 355 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था। किसानों को उम्मीद थी कि शासन से पैसा आएगा और उनकी फसल क्षति की भरपाई हो जाएगी।
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लेकिन, पैसा किस्तों में जारी किया गया और कैटेगिरी के हिसाब से पहले लघु और सीमांत किसानों को फसल क्षति का मुआवजा वितरित किया गया। स्थिति यह है कि अब तक 180.48 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं। यह पैसा भी लघु और सीमांत किसानों को बांटा गया, लेकिन अभी तक किसानों की भरपाई नहीं हुई है। बड़े किसान अभी भी मुआवजा का इंतजार कर रहे हैं।
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जिले में फसल क्षति का आकलन किया गया था कि 2,89,593 किसानों को नुकसान हुआ है, इसमें से लघु और सीमांत किसान 2,47,303 थे, इनका फसल क्षेत्रफल 178464.160 हेक्टेयर है। इसके अलावा 42,290 वृहद किसानों को 27,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल का नुकसान हुआ था। इस हिसाब से लघु और सीमांत किसानों को 240,92,66,241 रुपये और वृहद किसानों को 114,11,30,111 रुपये का नुकसान हुआ था। जो धनराशि आवंटित की गई है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी भी जिले के कम से कम आधे किसानों को फसल क्षति का मुआवजा नहीं मिला है।
सूखा ने तोड़ी कमर
ललितपुर। अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से हुए फसल के नुकसान के बाद किसानों को उम्मीद थी कि उनके नुकसान की भरपाई खरीफ फसल के दौरान हो जाएगी, लेकिन सूखा पड़ गया और उर्द में पीला मोजेक रोग लग जाने से फसल खराब हो गई। ऐसे में किसानों की रही- सही उम्मीद भी खत्म हो गई। सूखा के दौरान जिले में कराए गए सर्वे के अनुसार 180 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान का आकलन किया गया था। इस तरह रबी में 355 करोड़ और खरीफ में 180 करोड़ कुल मिलाकर 535 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था और अब तक सिर्फ 180.48 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा सका है।
फिर हुई ओलावृष्टि
ललितपुर। वर्तमान रबी सीजन में जैसे- तैसे किसानों के फसल बोई थी। पानी का इंतजाम कर सिंचाई भी कर दी। किसानों को उम्मीद थी कि कुछ फसल पैदा हो जाएगी और पुराने नुकसान की भरपाई हो जाएगी। इसको लेकर जिला प्रशासन ने सर्वे कराया, लेकिन फसल क्षति 05 से 25 प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। ऐसे में इस नुकसान का मुआवजा किसान को मिलना नहीं है, क्योंकि मानके के अनुसार 33 प्रतिशत नुकसान होने पर ही मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। वहीं, इस रिपोर्ट से किसान इत्तेफाक नहीं रखते हैं।