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विलुप्त होती जा रही दशहरा में पान खिलाने की परंपरा
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ravan
- फोटो : ravan
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पुलवारा (ललितपुर)। सनातन धर्म में दशहरा के पर्व का विशेष महत्व है। इस पर्व पर लोग आपसी मतभेद भुलाकर भाईचारे की मिसाल पेश करते थे। लेकिन वर्तमान समय में यह परंपरा अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। अब न लोगों के लबों पर पान की लाली होती है और न ही लोग बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते नजर आते है। अब लोग दशहरे का महत्व बस इतना ही समझते है कि इस दिन झांकियां निकलेगी और रावण के पुतले का दहन होगा।
दशहरा में एक दूसरे को पान न खिलाया जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है। खासतौर से बुंदेलखंड में यह परंपरा प्राचीन समय से है, लेकिन आधुनिक परिवेश में व्यस्तता और गुटखा-सिगरेट के बढ़ते चलन के कारण यह प्राचीन परंपरा घरों से ही गुम हो गई है। स्मार्ट फोन के जमाने ने युवाओं को अपनी आगोश में ले लिया है और एक दूसरे के घर जाकर आशीर्वाद लेने की परंपराएं भी कम हो गई हैं।
इंटरनेट व एसएमएस तक सिमट गईं शुभकामनाऐं
प्राचीन परंपराओं को निभाने में युवा पीढ़ी की रुचि कम ही दिखती है। हाईटेक युग में अब युवा एक दूसरे के घर जाने की जगह मोबाइल से एसएमएस व इंटरनेट से दशहरा का ई-कार्ड भेजना ही ज्यादा मुनासिब मानते है। वह एक दूसरे को एसएमएस से ही दशहरा की शुभकामनाएं दे देते है। लोग बताते हैं कि काम की व्यस्तता के चलते अब हर किसी के घर जाने का समय नहीं मिल पाता। इसलिए वह इंटरनेट व एसएमएस का माध्यम ज्यादा सही मानते है।
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दशहरा में एक दूसरे को पान न खिलाया जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है। ग्रामीण अंचलों में परंपराओं को जीवंत रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अब यह परंपरा कम हो गई है।
- विवेक दुबे
आधुनिक युग में काम की व्यस्तता के चलते अब हर किसी के घर जाने का समय नहीं मिल पाता, इसलिए दशहरा की शुभकामनाओं के लिए अब इंटरनेट व एसएमएस का माध्यम ज्यादा सही लगता है।
- भरत सिंह चौहान
बुंदेलखंड में दशहरा पर्व पर पान खिलाने की परम्परा प्रचलित है। लोग एक दूसरे के घर जाकर पान खिलाते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन वर्तमान में यह परंपरा खत्म सी हो गई है।
- प्रदीप दुबे
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दशहरा में एक दूसरे को पान न खिलाया जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है। खासतौर से बुंदेलखंड में यह परंपरा प्राचीन समय से है, लेकिन आधुनिक परिवेश में व्यस्तता और गुटखा-सिगरेट के बढ़ते चलन के कारण यह प्राचीन परंपरा घरों से ही गुम हो गई है। स्मार्ट फोन के जमाने ने युवाओं को अपनी आगोश में ले लिया है और एक दूसरे के घर जाकर आशीर्वाद लेने की परंपराएं भी कम हो गई हैं।
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इंटरनेट व एसएमएस तक सिमट गईं शुभकामनाऐं
प्राचीन परंपराओं को निभाने में युवा पीढ़ी की रुचि कम ही दिखती है। हाईटेक युग में अब युवा एक दूसरे के घर जाने की जगह मोबाइल से एसएमएस व इंटरनेट से दशहरा का ई-कार्ड भेजना ही ज्यादा मुनासिब मानते है। वह एक दूसरे को एसएमएस से ही दशहरा की शुभकामनाएं दे देते है। लोग बताते हैं कि काम की व्यस्तता के चलते अब हर किसी के घर जाने का समय नहीं मिल पाता। इसलिए वह इंटरनेट व एसएमएस का माध्यम ज्यादा सही मानते है।
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दशहरा में एक दूसरे को पान न खिलाया जाए तो कुछ अधूरा सा लगता है। ग्रामीण अंचलों में परंपराओं को जीवंत रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि अब यह परंपरा कम हो गई है।
- विवेक दुबे
आधुनिक युग में काम की व्यस्तता के चलते अब हर किसी के घर जाने का समय नहीं मिल पाता, इसलिए दशहरा की शुभकामनाओं के लिए अब इंटरनेट व एसएमएस का माध्यम ज्यादा सही लगता है।
- भरत सिंह चौहान
बुंदेलखंड में दशहरा पर्व पर पान खिलाने की परम्परा प्रचलित है। लोग एक दूसरे के घर जाकर पान खिलाते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन वर्तमान में यह परंपरा खत्म सी हो गई है।
- प्रदीप दुबे