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दशहरे पर हुआ दशानन का दहन
lalitpur
Updated Sun, 01 Oct 2017 01:15 AM IST
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कारयक्रम
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। हर वर्ष की तरह एक वर्ष भी परंपरानुसार भगवान श्रीराम ने आततायी और अहंकारी रावण के अंत का मंचन दशहरा के दिन किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में रावण का कद 51 फुट से घटकर 35 फुट भले ही रहा हो, लेकिन इस बार रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी समिति द्वारा जलाए गए। पहली बार यहां एक साथ तीनों पुतलों का दहन किया गया। राक्षसी सेना के अंत करने के लिए श्री रघुनाथजी बड़ा मंदिर से परंपरागत भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरुपों की शोभायात्रा निकाली गई। जबकि, अहंकारी रावण, मेघनाद और कुंभकरण के स्वरुप लोगों में भय दिखाते और ठहाका लगाते राम से युद्घ के लिए रामलीला मैदान पहुंचे, जहां रामदल और रावणदल में भीषण युद्घ की लीला का मंचन किया गया।
दशहरा के दिन शनिवार के दिन शाम करीब साढ़े पांच बजे श्रीरघुनाथजी बड़ा मंदिर में शोभायात्रा निकलने से पूर्व भव्य आरती का आयोजन किया। इसके बाद युद्घ पर निकलने के पहले रामदल द्वारा यहां काली बऊआ मंदिर में देेवी मां स्वरुपा का शक्ति पूजन किया गया। इसके बाद रामदल और रावण दल की सेना के स्वरुपों की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे सीता के स्वरुप, इसके पीछे रथ में विराजमान अहंकारी रावण ठहाका लगाते हुए चल रहा था। फिर कुंभकरण और मेघनाद और इनके पीछे भगवान रघुनाथजी के विमान और सबसे पीछे भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरुप चल रहे थे। शोभायात्रा मुहल्ला चौबयाना से शुरु होकर रावरपुरा, महावीरपुरा,घंटाघर, जगदीश मंदिर, सावरकर चौक, आजादचौक व नदीपुरा होते हुए गोविंदनगर स्थित रामलीला मैदान पहुंची। यहां सबसे पहले भूमि पूजन के साथ समी वृक्ष के पूजन की रस्म अदा की गई। इसके बाद भगवान श्रीरघुनाथजी के विमानों और इसके बाद श्रीराम और रावणदल की सेना के बीच मैदान में भीषण युद्घ का मंचन किया गया। इसमें सबसे पहले कुंभकरण, फिर मेघनाद मारे जाते हैं। इसके बाद अंत में यहां राम और रावण के युद्घ की लीला होती है, जहां भगवान श्रीराम लंकाधिपति रावण का अंत कर देते हैं। इसके बाद श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा तैयार कराया गया 35 फुट के रावण के साथ ही कुंभकरण और मेघनाद के पुतले का जलाया गया। पुतला जलते ही उसमें लगाए गए पटाखों की आवाज से पूरा मैदान गूंज उठता है और मैदान में उपस्थित लोग रावण के अंत होने पर खुशियां मनाते हुए एक दूसरे को बधाइयां देते हैं। रावण दहन के पूर्व मैदान में बुंदेलखंड की शानदार आतिशबाजी की गई। रावण दहन देखने के लिए रामलीला मैदान में हजारों लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। रावण दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को पान खिलाकर बधाइयां दीं। इस मौके पर सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, प्रदीप चौबे, दीपक चौबे, श्यामाकांत चौबे, बब्बू राजा बुंदेला, संजय चौबे, मनीष चौबे, धर्मेंद्र चौबे, रमेश रावत, अमित तिवारी, राजीव हुंडैत, ललित कौशिक, रविंद्र पाठक,भरत रिछारिया, विनोद मिश्रा, शिवकुमार शर्मा, हरिमोहन चौरसिया, जगदीश पाठक, रत्नेश तिवारी, अमरनाथ कटारे, गोविंद व्यास, रत्नेश तिवारी, राजेश दुबे आदि उपस्थित रहे।
भगवान राम द्वारा रावण का अंत करने के बाद आज भी यहां रामलीला मैदान में सीता के स्वरुप की अग्नि परीक्षा का मंचन किया जाता है। इसके बाद श्रीराम सीता को अपने रथ में विराजमान कर अयोध्या को जाते हैं।
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धनुषबाग में हुआ रामदल का भोज
रावण का अंत करने के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी के स्वरुपों को रामलीला मैदान स्थित धनुष बाग ले जाया गया, जहां रामदल की आरती उतारकर स्वागत करने के बाद उनके स्वरुपों के लिए भोज का आयोजन किया गया।
चंडी मंदिर पर हुआ रावण का पुतला दहन
श्रीसिद्धपीठ चंडी मंदिर पर विजयादशमी दशहरा का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक रावण के विशालकाय पुतले का दहन किया गया। दशहरा मिलन पर्व चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज के सानिध्य में किया गया। उन्होंने कहा कि दशहरा एक ऐसा महापर्व है जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। दशहरा प्रतीक है बुराई पर अच्छाई की विजय का। दशहरा सुनाता है कहानी एक राक्षस के अहंकार की उसके अंत की हैं। रावण दहन के दौरान जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह व पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल मुख्य अतिथि एवं अवध विहारी उपाध्याय, सरदार बीके सिंह, राजीव बबेले, दीपक सोनी, संदीप तिवारी, अनूप मोदी, राहुल शुक्ला, अश्विनी पुरोहित, राजू यादव, शत्रुघन यादव, दिनेश पाठक आदि उपस्थित रहे।
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दशहरा के दिन शनिवार के दिन शाम करीब साढ़े पांच बजे श्रीरघुनाथजी बड़ा मंदिर में शोभायात्रा निकलने से पूर्व भव्य आरती का आयोजन किया। इसके बाद युद्घ पर निकलने के पहले रामदल द्वारा यहां काली बऊआ मंदिर में देेवी मां स्वरुपा का शक्ति पूजन किया गया। इसके बाद रामदल और रावण दल की सेना के स्वरुपों की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे सीता के स्वरुप, इसके पीछे रथ में विराजमान अहंकारी रावण ठहाका लगाते हुए चल रहा था। फिर कुंभकरण और मेघनाद और इनके पीछे भगवान रघुनाथजी के विमान और सबसे पीछे भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरुप चल रहे थे। शोभायात्रा मुहल्ला चौबयाना से शुरु होकर रावरपुरा, महावीरपुरा,घंटाघर, जगदीश मंदिर, सावरकर चौक, आजादचौक व नदीपुरा होते हुए गोविंदनगर स्थित रामलीला मैदान पहुंची। यहां सबसे पहले भूमि पूजन के साथ समी वृक्ष के पूजन की रस्म अदा की गई। इसके बाद भगवान श्रीरघुनाथजी के विमानों और इसके बाद श्रीराम और रावणदल की सेना के बीच मैदान में भीषण युद्घ का मंचन किया गया। इसमें सबसे पहले कुंभकरण, फिर मेघनाद मारे जाते हैं। इसके बाद अंत में यहां राम और रावण के युद्घ की लीला होती है, जहां भगवान श्रीराम लंकाधिपति रावण का अंत कर देते हैं। इसके बाद श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा तैयार कराया गया 35 फुट के रावण के साथ ही कुंभकरण और मेघनाद के पुतले का जलाया गया। पुतला जलते ही उसमें लगाए गए पटाखों की आवाज से पूरा मैदान गूंज उठता है और मैदान में उपस्थित लोग रावण के अंत होने पर खुशियां मनाते हुए एक दूसरे को बधाइयां देते हैं। रावण दहन के पूर्व मैदान में बुंदेलखंड की शानदार आतिशबाजी की गई। रावण दहन देखने के लिए रामलीला मैदान में हजारों लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। रावण दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को पान खिलाकर बधाइयां दीं। इस मौके पर सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, प्रदीप चौबे, दीपक चौबे, श्यामाकांत चौबे, बब्बू राजा बुंदेला, संजय चौबे, मनीष चौबे, धर्मेंद्र चौबे, रमेश रावत, अमित तिवारी, राजीव हुंडैत, ललित कौशिक, रविंद्र पाठक,भरत रिछारिया, विनोद मिश्रा, शिवकुमार शर्मा, हरिमोहन चौरसिया, जगदीश पाठक, रत्नेश तिवारी, अमरनाथ कटारे, गोविंद व्यास, रत्नेश तिवारी, राजेश दुबे आदि उपस्थित रहे।
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भगवान राम द्वारा रावण का अंत करने के बाद आज भी यहां रामलीला मैदान में सीता के स्वरुप की अग्नि परीक्षा का मंचन किया जाता है। इसके बाद श्रीराम सीता को अपने रथ में विराजमान कर अयोध्या को जाते हैं।
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धनुषबाग में हुआ रामदल का भोज
रावण का अंत करने के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी के स्वरुपों को रामलीला मैदान स्थित धनुष बाग ले जाया गया, जहां रामदल की आरती उतारकर स्वागत करने के बाद उनके स्वरुपों के लिए भोज का आयोजन किया गया।
चंडी मंदिर पर हुआ रावण का पुतला दहन
श्रीसिद्धपीठ चंडी मंदिर पर विजयादशमी दशहरा का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक रावण के विशालकाय पुतले का दहन किया गया। दशहरा मिलन पर्व चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज के सानिध्य में किया गया। उन्होंने कहा कि दशहरा एक ऐसा महापर्व है जो असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। दशहरा प्रतीक है बुराई पर अच्छाई की विजय का। दशहरा सुनाता है कहानी एक राक्षस के अहंकार की उसके अंत की हैं। रावण दहन के दौरान जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह व पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल मुख्य अतिथि एवं अवध विहारी उपाध्याय, सरदार बीके सिंह, राजीव बबेले, दीपक सोनी, संदीप तिवारी, अनूप मोदी, राहुल शुक्ला, अश्विनी पुरोहित, राजू यादव, शत्रुघन यादव, दिनेश पाठक आदि उपस्थित रहे।