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करोना में अपनों को खोया कैसे मनाएं दिवाली
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मड़ावरा: सड़क पर जाम लगाकर प्रदर्शन करते किसान किसानों को समझाते एसडीएम
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। कोरोना संक्रमण में जनपद के कई परिवार उजड़ गए थे किसी घर में पत्नी का सुहाग उजड़ा तो कहीं बच्चे के सिर से माता-पिता का साया छिन गया। इन्हीं में एक परिवार शहर के मोहल्ला नई बस्ती मोहल्ला में रहता है। परिवार के मुखिया कैलाश जैन की कोरोना संक्रमित होने पर इसी साल 16 अप्रैल को मौत हो गई थी। एक साल पहले करवा चौथ व दिवाली पर परिवार में खुशियां थी वहीं इस साल बच्चे और पत्नी गमगीन हैं। त्योहार पर घर का आंगन सूना रहेगा।
मंगलवार को जब इस परिवार से मुलाकात की तो नम आंखों से पत्नी अंजू ने कहा कि पति को खोने के बाद त्योहार फीका हो गया है। बेटी और दिव्यांग बेटा रितिक भी पिता के न रहने पर उदास बैठा था। अंजू ने बताया कि पति कैलाश की मौत होते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
अंजू ने कहा कि पिछली दिवाली पर पति परिवार के साथ थे। दिवाली पर बाजार से पटखे और मिठाइयां लाए थे लेकिन इस बार सब सूना है। उन्होंने कहा कि पति की मौत से घर की खुशियां छिन गई। परिवार का भरण पोषण करने वाले कैलाश की मौत के बाद अपनों ने भी किनारा कर लिया। दुकान में सामान के लिए बैंक से लोन लिया था जमा न कर पाने पर अब बैंक ने भी नोटिस जारी कर दिया।
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सरकारी योजनाओं से भी कोई मदद नहीं मिली
करोना से मृत्यु के बाद सरकार की योजना से भी कोई मदद नहीं मिली। दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए भी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को पापा की याद आती है। परिवार बहुत तकलीफों के साथ जीवन गुजार रहा है। अंजू ने बताया कि पति की मौत के बाद उसने विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक वह भी शुरू नहीं हुई। यदि पेंशन शुरू हो जाती तो कुछ मदद मिल सकती थी।
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बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर बेटी चला रही परिवार
कैलाश की 18 वर्षीय बेटी ने 12वीं कक्षा पास कर चुकी है। पिता की मौत के बाद आर्थिक संकट के चलते उसने छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चों से मिली फीस से वह परिवार का खर्च चला रही है।
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मंगलवार को जब इस परिवार से मुलाकात की तो नम आंखों से पत्नी अंजू ने कहा कि पति को खोने के बाद त्योहार फीका हो गया है। बेटी और दिव्यांग बेटा रितिक भी पिता के न रहने पर उदास बैठा था। अंजू ने बताया कि पति कैलाश की मौत होते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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अंजू ने कहा कि पिछली दिवाली पर पति परिवार के साथ थे। दिवाली पर बाजार से पटखे और मिठाइयां लाए थे लेकिन इस बार सब सूना है। उन्होंने कहा कि पति की मौत से घर की खुशियां छिन गई। परिवार का भरण पोषण करने वाले कैलाश की मौत के बाद अपनों ने भी किनारा कर लिया। दुकान में सामान के लिए बैंक से लोन लिया था जमा न कर पाने पर अब बैंक ने भी नोटिस जारी कर दिया।
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सरकारी योजनाओं से भी कोई मदद नहीं मिली
करोना से मृत्यु के बाद सरकार की योजना से भी कोई मदद नहीं मिली। दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए भी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को पापा की याद आती है। परिवार बहुत तकलीफों के साथ जीवन गुजार रहा है। अंजू ने बताया कि पति की मौत के बाद उसने विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक वह भी शुरू नहीं हुई। यदि पेंशन शुरू हो जाती तो कुछ मदद मिल सकती थी।
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बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर बेटी चला रही परिवार
कैलाश की 18 वर्षीय बेटी ने 12वीं कक्षा पास कर चुकी है। पिता की मौत के बाद आर्थिक संकट के चलते उसने छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चों से मिली फीस से वह परिवार का खर्च चला रही है।

मडावरा में सड़क पर जाम लगाए किसान- फोटो : LALITPUR

सैदपुर समिति पर खाद के लिए प्रतीक्षा करते किसान- फोटो : LALITPUR