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आउटसोर्सिंग कंपनी का अनुबंध निरस्त, रिकवरी होगी
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आउटसोर्सिंग कंपनी का अनुबंध निरस्त, रिकवरी होगी
ललितपुर। नगर पालिका परिषद में सेवा प्रदाता (आऊटसोर्सिंग) कंपनी को कुचक्रपूर्ण ढंग से टेंडर हासिल करना महंगा पड़ गया है। एसडीएम सदर की जांच में गबन का दोषी पाए जाने पर डीएम ने सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध निरस्त करते हुए एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका परिषद के पांच असंतुष्ट सभासदों ने विभाग में बरती जा रही अनियमितताओं के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। डीएम मानवेंद्र सिंह ने सभासदों के शिकायती पत्र पर जांच एसडीएम सदर गजल भारद्वाज को सौंप दी थी। एसडीएम ने सभासदों द्वारा लगाए आरोपों की बिंदुवार जांच की। यही नहीं, उन्होंने नगर पालिका परिषद कार्यालय में पहुंचकर आउटसोर्सिग से संबंधित कई फाइलें अपने कब्जे में लेते हुए गहन छानबीन की थी।
एसडीएम ने जांच आख्या डीएम को सौंप दी थी। जांच अधिकारी ने पाया कि जो कार्य कराए जाने थे, उनकी निविदायें एवं कार्यालय आदेश तत्काल जारी कर दिए गए, लेकिन ठेकेदारों ने काम शुरू नहीं किया। इसी तरह शिवम् साहू की फर्म मेसर्स- मां कन्सट्रक्शन कंपनी ने अवैधानिक तरीके से सेवा प्रदाता का कार्य प्राप्त किया, जबकि कंपनी के पास किसी भी सरकारी विभाग में ‘ए’ श्रेणी ठेकेदारी का पंजीकरण नहीं है। टेंडर की शर्तानुसार पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए था, जबकि शिवम् साहू द्वारा दो वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र दाखिल किया गया। इससे स्पष्ट है कि कंपनी को नियम विरुद्ध कांट्रेक्ट दिया गया। यही नहीं, शिवम् साहू ने स्वयं के हैसियत प्रमाण पत्र की जगह अपने पिता रामकृष्ण साहू के नाम से हैसियत प्रमाण पत्र लगाया। कंपनी द्वारा कर्मचारियों को अनुबंध के अनुसार वेतन के भुगतान की जगह प्रतिमाह कम वेतन दिया गया। इसमें सौ कर्मचारियों के खाते भी नहीं खुलवाए गए, जिस कारण उन्हें अकाउंट के माध्यम से भुगतान नहीं किया गया।
शासनादेश अनुसार खाते खुलवाकर ही भुगतान किया जाना चाहिए था। सेवा प्रदाता शिवम साहू (मेसर्स- मां कंसट्रक्शन कंपनी) द्वारा कर्मचारियों को अनियमित/कम भुगतान कर पालिका/शासन के पैसे का गबन किया गया। जो भुगतान कंपनी द्वारा बगैर खाता खोले किया गया, उसका कोई रिकार्ड नहीं दिखाया गया। जबकि, भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट है कि वह धनराशि सेवा प्रदाता द्वारा स्वयं ही उपभोग कर ली गई है। किसी कर्मचारी को भुगतान नहीं किया गया है।
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जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि जिन कर्मचारियों को कम पैसे का भुगतान किया गया है, उन्हें अनुबंध की शर्तों के अनुसार पूरी धनराशि का भुगतान कराया जाए। जो भुगतान किया गया था और जो भुगतान किया जाना था, उसके अंतर का भुगतान कर्मचारियों को तत्काल सेवा प्रदाता से कराया जाए। जो धनराशि हड़प कर ली गई है, उसे सेवा प्रदाता से रिकवर किया जाए। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा टेंडर की शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया। उसने नगर पालिका के कर्मचारियों से दुरभि संधि कर अनियमित तरीके से टेंडर प्राप्त किया है। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा नगर पालिका के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पालिका को भारी वित्तीय हानि पहुंचाई गई है। सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध तत्काल समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
डिप्टी कलेक्टर से स्पष्टीकरण तलब
उक्त प्रकरण में अपर उप जिलाधिकारी रमेश चंद्र ने अपनी जांच में नगर पालिका परिषद को क्लीनचिट दे दी थी, जबकि वहां भारी अनियमितताएं पायी गईं हैं। इस पर जिलाधिकारी ने अपर उप जिलाधिकारी से गलत आख्या पर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है।
कार्रवाई से बचे नगरपालिका कर्मी
आऊट सोर्सिग के ठेका में जिन नगर पालिका कर्मचारियों ने ठेकेदार के साथ दुरभि संधि की है, उन पर अब तक कोई कार्रवाई के आदेश नहीं हुए हैं। यदि दुरभि संधि करने वाले अधिकारी व कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए तो कइयों का नपना तय है। उप जिलाधिकारी की जांच अभी अन्य बिंदुओं पर आनी बाकी है। बता दें कि असंतुष्ट पांच सभासद भारत भूषण चौरसिया, रामबाबू यादव, केके पंथी, शिवानी पाठक व मंजू लवली शर्मा ने सुम्मेरा तालाब की खयुदाई, घाट निर्माण सहित कई निर्माण कार्यो की शिकायत की थी।
आऊट सोर्सिग का ठेका निरस्त कर दोबारा निविदा आमंत्रित की जाएगी। जो भी गलत पाया गया है, उस पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- रजनी साहू, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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ललितपुर। नगर पालिका परिषद में सेवा प्रदाता (आऊटसोर्सिंग) कंपनी को कुचक्रपूर्ण ढंग से टेंडर हासिल करना महंगा पड़ गया है। एसडीएम सदर की जांच में गबन का दोषी पाए जाने पर डीएम ने सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध निरस्त करते हुए एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका परिषद के पांच असंतुष्ट सभासदों ने विभाग में बरती जा रही अनियमितताओं के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। डीएम मानवेंद्र सिंह ने सभासदों के शिकायती पत्र पर जांच एसडीएम सदर गजल भारद्वाज को सौंप दी थी। एसडीएम ने सभासदों द्वारा लगाए आरोपों की बिंदुवार जांच की। यही नहीं, उन्होंने नगर पालिका परिषद कार्यालय में पहुंचकर आउटसोर्सिग से संबंधित कई फाइलें अपने कब्जे में लेते हुए गहन छानबीन की थी।
एसडीएम ने जांच आख्या डीएम को सौंप दी थी। जांच अधिकारी ने पाया कि जो कार्य कराए जाने थे, उनकी निविदायें एवं कार्यालय आदेश तत्काल जारी कर दिए गए, लेकिन ठेकेदारों ने काम शुरू नहीं किया। इसी तरह शिवम् साहू की फर्म मेसर्स- मां कन्सट्रक्शन कंपनी ने अवैधानिक तरीके से सेवा प्रदाता का कार्य प्राप्त किया, जबकि कंपनी के पास किसी भी सरकारी विभाग में ‘ए’ श्रेणी ठेकेदारी का पंजीकरण नहीं है। टेंडर की शर्तानुसार पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए था, जबकि शिवम् साहू द्वारा दो वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र दाखिल किया गया। इससे स्पष्ट है कि कंपनी को नियम विरुद्ध कांट्रेक्ट दिया गया। यही नहीं, शिवम् साहू ने स्वयं के हैसियत प्रमाण पत्र की जगह अपने पिता रामकृष्ण साहू के नाम से हैसियत प्रमाण पत्र लगाया। कंपनी द्वारा कर्मचारियों को अनुबंध के अनुसार वेतन के भुगतान की जगह प्रतिमाह कम वेतन दिया गया। इसमें सौ कर्मचारियों के खाते भी नहीं खुलवाए गए, जिस कारण उन्हें अकाउंट के माध्यम से भुगतान नहीं किया गया।
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शासनादेश अनुसार खाते खुलवाकर ही भुगतान किया जाना चाहिए था। सेवा प्रदाता शिवम साहू (मेसर्स- मां कंसट्रक्शन कंपनी) द्वारा कर्मचारियों को अनियमित/कम भुगतान कर पालिका/शासन के पैसे का गबन किया गया। जो भुगतान कंपनी द्वारा बगैर खाता खोले किया गया, उसका कोई रिकार्ड नहीं दिखाया गया। जबकि, भुगतान बैंक खाते के माध्यम से किया जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट है कि वह धनराशि सेवा प्रदाता द्वारा स्वयं ही उपभोग कर ली गई है। किसी कर्मचारी को भुगतान नहीं किया गया है।
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जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि जिन कर्मचारियों को कम पैसे का भुगतान किया गया है, उन्हें अनुबंध की शर्तों के अनुसार पूरी धनराशि का भुगतान कराया जाए। जो भुगतान किया गया था और जो भुगतान किया जाना था, उसके अंतर का भुगतान कर्मचारियों को तत्काल सेवा प्रदाता से कराया जाए। जो धनराशि हड़प कर ली गई है, उसे सेवा प्रदाता से रिकवर किया जाए। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा टेंडर की शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया। उसने नगर पालिका के कर्मचारियों से दुरभि संधि कर अनियमित तरीके से टेंडर प्राप्त किया है। सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा नगर पालिका के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पालिका को भारी वित्तीय हानि पहुंचाई गई है। सेवा प्रदाता कंपनी का अनुबंध तत्काल समाप्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
डिप्टी कलेक्टर से स्पष्टीकरण तलब
उक्त प्रकरण में अपर उप जिलाधिकारी रमेश चंद्र ने अपनी जांच में नगर पालिका परिषद को क्लीनचिट दे दी थी, जबकि वहां भारी अनियमितताएं पायी गईं हैं। इस पर जिलाधिकारी ने अपर उप जिलाधिकारी से गलत आख्या पर सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है।
कार्रवाई से बचे नगरपालिका कर्मी
आऊट सोर्सिग के ठेका में जिन नगर पालिका कर्मचारियों ने ठेकेदार के साथ दुरभि संधि की है, उन पर अब तक कोई कार्रवाई के आदेश नहीं हुए हैं। यदि दुरभि संधि करने वाले अधिकारी व कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए तो कइयों का नपना तय है। उप जिलाधिकारी की जांच अभी अन्य बिंदुओं पर आनी बाकी है। बता दें कि असंतुष्ट पांच सभासद भारत भूषण चौरसिया, रामबाबू यादव, केके पंथी, शिवानी पाठक व मंजू लवली शर्मा ने सुम्मेरा तालाब की खयुदाई, घाट निर्माण सहित कई निर्माण कार्यो की शिकायत की थी।
आऊट सोर्सिग का ठेका निरस्त कर दोबारा निविदा आमंत्रित की जाएगी। जो भी गलत पाया गया है, उस पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- रजनी साहू, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद