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Lalitpur News: उड़द व सोयाबीन की फसल नुकसान मामले में उपभोक्ता फोरम ने दिए 1.53 लाख रुपये देने के आदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत ने एक किसान को उड़द की फसल के नुकसान होने पर 1.22 लाख रुपये और सोयाबीन की फसल नुकसान होने पर बीमा कंपनी को 31,226 रुपये सात फीसदी ब्याज के साथ किसान को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
तहसील पाली के ग्राम नीमखेरा निवासी भगवत सिंह ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग की अदालत में तीन वर्ष पूर्व एक प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसने अपनी आराजी का केसीसी बनवाया था। वर्ष 2022 में खरीफ के मौसम में उड़द और सोयाबीन की फसल बोई थी। फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित थी। जिसका बीमा प्रीमियम का 4,888.5 रुपया पंजाब नेशनल बैंक शाखा बिरधा में बीमा कंपनी को भेजा गया था, जिसे उसके खाते से डेबिट किया गया था। उसकी उड़द की फसल की बीमित राशि 1,85,4442.8 रुपये थी। इसी प्रकार सोयाबीन की फसल का बीमा 49010.20 रुपये का था। वर्ष 2022 में अतिवृष्टि होने के कारण उड़द व सोयाबीन की फसल पूर्ण रूप से नष्ट हो गई थी। जिसके बाद उसकी फसल क्षति का आंकलन किया गया। फसल क्षति की रिपोर्ट के अनुसार उसकी फसल क्षति का भुगतान किया जाना था, लेकिन नहीं किया गया तो उसने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को 11 अप्रैल 2022 को नोटिस दिया। जिस पर बीस जून 2023 को उड़द की क्षति के लिए 14,368.73 रुपये व सोयाबीन की फसल क्षति के बाबत 3080.66 रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार बीमा कंपनी द्वारा उसकी फसल क्षति के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। जिस पर उसने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत में वाद दायर किया। इस पर अब न्यायालय ने उसका वाद स्वीकार किया और अध्यक्ष सीताराम, सदस्य ओमप्रकाश विश्वकर्मा और रफिया खातून की अदालत ने तथ्यों के आधार पर किसान की उड़द की फसल की क्षति होने के ऐवज में बीमा कंपनी को 1,22,441 रुपये और सोयाबीन की फसल क्षति की बाबत 31,226 रुपये अदा करने के आदेश दिए। साथ ही फसल क्षति उड़द व सोयाबीन की शेष राशि पर 29 जून 2023 से सात फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज भी अदा करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने बीमा कंपनी को किसान के लिए कष्ट पीड़ा के लिए दस हजार रुपये देने के आदेश दिए।
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ललितपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत ने एक किसान को उड़द की फसल के नुकसान होने पर 1.22 लाख रुपये और सोयाबीन की फसल नुकसान होने पर बीमा कंपनी को 31,226 रुपये सात फीसदी ब्याज के साथ किसान को देने के आदेश दिए हैं। साथ ही दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
तहसील पाली के ग्राम नीमखेरा निवासी भगवत सिंह ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग की अदालत में तीन वर्ष पूर्व एक प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसने अपनी आराजी का केसीसी बनवाया था। वर्ष 2022 में खरीफ के मौसम में उड़द और सोयाबीन की फसल बोई थी। फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित थी। जिसका बीमा प्रीमियम का 4,888.5 रुपया पंजाब नेशनल बैंक शाखा बिरधा में बीमा कंपनी को भेजा गया था, जिसे उसके खाते से डेबिट किया गया था। उसकी उड़द की फसल की बीमित राशि 1,85,4442.8 रुपये थी। इसी प्रकार सोयाबीन की फसल का बीमा 49010.20 रुपये का था। वर्ष 2022 में अतिवृष्टि होने के कारण उड़द व सोयाबीन की फसल पूर्ण रूप से नष्ट हो गई थी। जिसके बाद उसकी फसल क्षति का आंकलन किया गया। फसल क्षति की रिपोर्ट के अनुसार उसकी फसल क्षति का भुगतान किया जाना था, लेकिन नहीं किया गया तो उसने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को 11 अप्रैल 2022 को नोटिस दिया। जिस पर बीस जून 2023 को उड़द की क्षति के लिए 14,368.73 रुपये व सोयाबीन की फसल क्षति के बाबत 3080.66 रुपये का भुगतान किया गया। इस प्रकार बीमा कंपनी द्वारा उसकी फसल क्षति के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। जिस पर उसने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की अदालत में वाद दायर किया। इस पर अब न्यायालय ने उसका वाद स्वीकार किया और अध्यक्ष सीताराम, सदस्य ओमप्रकाश विश्वकर्मा और रफिया खातून की अदालत ने तथ्यों के आधार पर किसान की उड़द की फसल की क्षति होने के ऐवज में बीमा कंपनी को 1,22,441 रुपये और सोयाबीन की फसल क्षति की बाबत 31,226 रुपये अदा करने के आदेश दिए। साथ ही फसल क्षति उड़द व सोयाबीन की शेष राशि पर 29 जून 2023 से सात फीसदी साधारण वार्षिक ब्याज भी अदा करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त न्यायालय ने बीमा कंपनी को किसान के लिए कष्ट पीड़ा के लिए दस हजार रुपये देने के आदेश दिए।
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