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Lalitpur News: यात्रियों को फर्जी टिकट थमा रहे निजी बसों के कंडक्टर
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अधिकांश सड़कों पर संचालित निजी बसों के कंडक्टर यात्रियों को फर्जी टिकट थमाकर परिवहन व वाणिज्य कर विभाग को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन टिकटों पर न तो बस का नंबर, तारीख, सवारियों की संख्या और न ही किराया स्पष्ट होता है। ऐसे में सवारियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
जनपद की तीन ओर की सीमाएं मध्यप्रदेश से लगी हुई हैं। मुख्यालय स्थित बस स्टैंड से 70 बसें विभिन्न ब्लॉक, तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों को जाती हैं। लगभग 60 बसें मध्यप्रदेश के दतिया, शिवपुरी, गुना, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर जिलों के लिए जाती हैं। इससे यहां के बस स्टैंड को अंतरराज्यीय बस अड्डा कहा जाता है। बस स्टैंड से सफर कर रही सवारियों को निजी बसों में मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। कंडक्टर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, लेकिन जब रसीद (टिकट) देने की बारी आती है तो फर्जी रसीद थमा देते हैं। इस टिकट में न तो बस का नंबर, न यात्रा की तिथि और न ही सवारियों की संख्या होती है। किराया तो दूर टिकट पर क्रमांक तक नहीं लिखा होता। साथ ही बच्चे व महिलाओं और वृद्धजनों को सफर करने में अधिक समस्या हो रही है, लेकिन बसों की कमी के चलते मजबूरी में यात्रा करनी पड़ रही है। कई बार सवारियों के साथ लूटपाट व जेब कटने जैसी घटनाएं हो जाती हैं।
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पर्ची पर नहीं दर्ज होती जानकारी
निजी बसों में दी जाने वाली किराए की रसीद में कई कॉलम बने हैं। टिकट नंबर, बस नंबर, मार्ग कहां से कहां जाता है, साथ में सवारियों की संख्या, कंडक्टर का हस्ताक्षर व किराया का विवरण होता है, लेकिन कंडक्टर रसीद में कोई विवरण नहीं भरता। इससे यात्रियों को जानकारी नहीं हो पाती है।
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बस स्टैंड पर नहीं लगी कोई सूची
जिला मुख्यालय स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डा पर किराए की लिस्ट नहीं लगी है। इससे यात्रियों को किराया की जानकारी नहीं हो पाती है। कंडक्टर इसका फायदा उठा मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कई सवारियों से दो गुना किराया मांगते हैं न देने पर उतार तक देते हैं।
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स्टैंड पर नहीं है समय सारिणी
अंतरराज्यीय बस अड्डा का दर्जा तो दिया गया, लेकिन अब तक संचालित बसों की समय सारिणी नहीं लग पाई है। ऐसे में सवारियों काे बसों की जानकारी नहीं हो पाती। कई बार इंतजार करते रहने के बावजूद बस आकर चली जाती है, इससे महिलाओं व बच्चों के साथ सफर करने वालों को अधिक समस्या होती है।
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निजी बसों में टिकट में सभी प्रकार का विवरण अंकित होता है। इसको स्पष्ट भरना चाहिए। न भरने की जांच की जाएगी। निजी बस में सफर करने वाली सभी सवारियों का बीमा होता है।
- मो. कय्यूम खां, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी
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ललितपुर। अधिकांश सड़कों पर संचालित निजी बसों के कंडक्टर यात्रियों को फर्जी टिकट थमाकर परिवहन व वाणिज्य कर विभाग को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन टिकटों पर न तो बस का नंबर, तारीख, सवारियों की संख्या और न ही किराया स्पष्ट होता है। ऐसे में सवारियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है।
जनपद की तीन ओर की सीमाएं मध्यप्रदेश से लगी हुई हैं। मुख्यालय स्थित बस स्टैंड से 70 बसें विभिन्न ब्लॉक, तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों को जाती हैं। लगभग 60 बसें मध्यप्रदेश के दतिया, शिवपुरी, गुना, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर जिलों के लिए जाती हैं। इससे यहां के बस स्टैंड को अंतरराज्यीय बस अड्डा कहा जाता है। बस स्टैंड से सफर कर रही सवारियों को निजी बसों में मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। कंडक्टर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं, लेकिन जब रसीद (टिकट) देने की बारी आती है तो फर्जी रसीद थमा देते हैं। इस टिकट में न तो बस का नंबर, न यात्रा की तिथि और न ही सवारियों की संख्या होती है। किराया तो दूर टिकट पर क्रमांक तक नहीं लिखा होता। साथ ही बच्चे व महिलाओं और वृद्धजनों को सफर करने में अधिक समस्या हो रही है, लेकिन बसों की कमी के चलते मजबूरी में यात्रा करनी पड़ रही है। कई बार सवारियों के साथ लूटपाट व जेब कटने जैसी घटनाएं हो जाती हैं।
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पर्ची पर नहीं दर्ज होती जानकारी
निजी बसों में दी जाने वाली किराए की रसीद में कई कॉलम बने हैं। टिकट नंबर, बस नंबर, मार्ग कहां से कहां जाता है, साथ में सवारियों की संख्या, कंडक्टर का हस्ताक्षर व किराया का विवरण होता है, लेकिन कंडक्टर रसीद में कोई विवरण नहीं भरता। इससे यात्रियों को जानकारी नहीं हो पाती है।
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बस स्टैंड पर नहीं लगी कोई सूची
जिला मुख्यालय स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डा पर किराए की लिस्ट नहीं लगी है। इससे यात्रियों को किराया की जानकारी नहीं हो पाती है। कंडक्टर इसका फायदा उठा मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कई सवारियों से दो गुना किराया मांगते हैं न देने पर उतार तक देते हैं।
स्टैंड पर नहीं है समय सारिणी
अंतरराज्यीय बस अड्डा का दर्जा तो दिया गया, लेकिन अब तक संचालित बसों की समय सारिणी नहीं लग पाई है। ऐसे में सवारियों काे बसों की जानकारी नहीं हो पाती। कई बार इंतजार करते रहने के बावजूद बस आकर चली जाती है, इससे महिलाओं व बच्चों के साथ सफर करने वालों को अधिक समस्या होती है।
निजी बसों में टिकट में सभी प्रकार का विवरण अंकित होता है। इसको स्पष्ट भरना चाहिए। न भरने की जांच की जाएगी। निजी बस में सफर करने वाली सभी सवारियों का बीमा होता है।
- मो. कय्यूम खां, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी