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Lalitpur News: खरीफ फसल के बीमा क्लेम के भुगतान में गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी गठित

Wed, 16 Apr 2025 12:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Apr 2025 12:42 AM IST
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Committee formed to investigate irregularities in payment of insurance claims for Kharif crops
- जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी से दो बार में मांगा था 17 और नौ बिंदुओं का विवरण
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। खरीफ की फसल के व्यक्तिगत बीमा क्लेम के भुगतान में गड़बड़ी के मामले में जिलाधिकारी ने सीडीओ की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी से किसानों से प्राप्त आवेदनों के सापेक्ष दो बार में अलग-अलग बिदुओं पर पूर्ण विवरण मांगा था। पहली बार में बीमा कंपनी ने उक्त मामले में भ्रामक और अस्पष्ट सूचनाएं दे दीं, जिस पर डीएम ने नाराजगी जताते ही उक्त मामले में बीमा कंपनी से नौ अन्य बिंदुओं पर भी सूचना मांगी, जिसका विवरण बीमा कंपनी से मिलने के बाद जांच समिति बनाई गई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ की फसल के व्यक्तिगत बीमा क्लेम में भुगतान में भारी गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इस पर जिलाधिकारी ने बीते साल 20 दिसंबर को प्रमुख सचिव कृषि लखनऊ को पत्र लिखकर उक्त मामले में गड़बड़ी की जांच कराए जाने का अनुरोध किया था। इसमें बताया कि उक्त बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने व्यक्तिगत क्लेम के ऑनलाइन आवेदन दर्ज कराने में कोई मदद नहीं की थी। वहीं आवेदन की संख्या भी सीमित करने का प्रयास किया गया था। इसमें कृषि विभाग के कर्मचारियों के प्रयास से जनपद में कुल बीमित 1.16 लाख के सापेक्ष 68,100 किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा एप के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराई जा सकीं। दिसंबर माह में बीमा कंपनी द्वारा प्रथम किस्त के रूप में 36,036 किसानों को 4.04 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति धनराशि का भुगतान किया गया, जो प्रति किसान औसत 1122 रुपये है। जबकि उड़द की फसल का औसतन नुकसान 40 से 70 फीसदी हुआ था। इसमें बताया था कि नुकसान के अनुपात में उड़द की फसल में कुल बीमित धनराशि 26,400 प्रति हेक्टेयर के सापेक्ष प्रति हेक्टेयर 15,840 रुपये क्षतिपूर्ति होनी चाहिए।
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जनपद की औसत लैंड होल्डिंग 1.41 हेक्टेयर है और कृषकों द्वारा 23 भूमि पर उड़द की खेती की जाती है। यानि कुल 36,036 कृषकों ने लगभग 33,800 हेक्टेयर में उड़द की खेती की गई थी, जिसमें लगभग 53.65 करोड़ का भुगतान अपेक्षित था। बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में जो प्रवृत्ति दशाई गई, उसके अनुसार जनपद के प्रभावित किसानों को कुल अधिकतम 7.64 करोड़ रुपये का ही व्यक्तिगत भुगतान अपेक्षित है, जबकि यह न्यूनतम 101.39 करोड़ होना चाहिए था। लखनऊ कृषि अनुभाग से उक्त मामले में सम्यक जांच पंद्रह दिन में पूर्ण करने के लिए एक जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए गए, जिस पर जिलाधिकारी ने उक्त मामले में संबंधित बीमा कंपनी को पत्राचार करके व्यक्तिगत क्लेम के लिए लगभग 48,180 किसानों से प्राप्त आवेदनों के सापेक्ष फसल में हुए नुकसान के बारे में 17 बिंदुओं पर पूर्ण विवरण मांगा था।
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इस पर बीमा कंपनी ने तीस मार्च को जिलाधिकारी को अस्पष्ट और भ्रामक सूचना दी, जिस पर जिलाधिकारी ने उक्त मामले में बीमा कंपनी से नौ बिंदुओं पर अलग से स्पष्ट सूचना मांगी थी। अब उक्त मामले में बीमा कंपनी ने जिलाधिकारी को सूचनाएं उपलब्ध करा दीं और अब जिलाधिकारी ने उक्त मामले में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इसमें सीडीओ के अलावा जिला कृषि अधिकारी, जिला सांख्यिकी अधिकारी, प्रबंधक जिला अग्रणी बैंक, प्रतिनिधि ईआईसी राजेश जायसवाल, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार टोंटे, भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा को शामिल किया गया है। जिलाधिकारी ने जांच समिति को मध्यावधि बीमा के लिए लगभग 68 हजार किसानों से प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों के सापेक्ष गाटावार भुगतान की राशि का आवेदन में उल्लिखित क्षति प्रतिशत और सर्वेक्षण में प्राप्त क्षति प्रतिशत से मिलान कर फसल बीमा योजना के प्रावधानों के आलेख में संस्तुति सहित अपनी आख्या एक सप्ताह में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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