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जिला अस्पताल में इंजैक्शन लगते ही बिगड़ी 16 बच्चों की हालत
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बच्चा वार्ड में एक पलंग पर लेटे दो बच्चे
- फोटो : LALITPUR
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जिला अस्पताल में इंजेक्शन से बिगड़ी 16 बच्चों की हालत
ललितपुर। जिला अस्पताल में शुक्रवार की रात ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों द्वारा बच्चों को इंजेक्शन लगाने के कारण वार्ड में भर्ती 16 बच्चों की हालत बिगड़ गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आनन-फानन में चिकित्सकों को भेज कर बच्चों को उपचार मुहैया कराया। बच्चों की हालत में सुबह तक सुुुधार आ गया।
जिला अस्पताल में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहर के प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार मरीज उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में मौसम में हो रहे परिवर्तन से मौसमी बीमारियां पैर पसारने लगीं है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है, जिसका नजारा जिला अस्पताल में बच्चा व महिला वार्ड में देखने को मिल रहा है। यहां पर बेहतर उपचार की आस में आने वाले लोगों को अस्पताल में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही का शिकार होना पड़ रहा है। शुक्रवार की रात में बच्चा व महिला वार्ड में तैनात स्टाफ ने बच्चों को एक इंजेक्शन लगाया। इसके बाद चिकित्सीय परामर्श के अनुसार बोतल लगाई। बोतल लगते ही बच्चों की सेहत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते वार्ड में भर्ती 16 बच्चों की हालत खराब हो गई। बच्चे सर्दी के चलते कांपने लगे। तीमारदारों ने बच्चों की सेहत खराब होती देख व हाथ पैर कांपने पर रोने लगे।
वार्ड में मरीजों के तीमारदार चिल्लाने लगे। इससे कर्मचारियों के हाथ- पैर फूल गए। जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह को दी गई। उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनीष कुमार व ईएमओ डा. सच्चिदानंद को वार्ड में भर्ती बच्चों का उपचार करने के निर्देश दिए। चिकित्सकों ने मौके पर पहुंच कर बच्चों को लग रही ड्रिप को हटाकर एक-एक इंजेक्शन लगाया, जिससे बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे। काफी देर बाद कुछ बच्चों को राहत मिली। वहीं कुछ की हालत में सुधार हो पाया।
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इससे पहले ही हो चुकी घटनाएं
जिला अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व में कई लापरवाही उजागर हुईं है। इनमें बीते वर्ष एक शव को बाहर तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ था। इस पर परिजन शव को कंधे पर लेकर गए थे। एक शव अस्पताल स्थित मोर्चरी में सात दिनों तक सड़ता रहा था। कई बार लोगों को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाती है।
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बच्चे को उल्टी व दस्त हो रहे थे। पहले सीएचसी तालबेहट में उपचार कराया, हालत में सुधार नहीं होने पर जिला अस्ताल में लाए थे। जहां पर इंजेक्शन लगने से बच्चे की हालत काफी बिगड़ गई थी।
- पाना, तालबेहट
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इंजेक्शन लगते ही बच्चा एकदम से कांपने लगा। इसके बाद ड्रिप हटाकर एक इंजेक्शन देने पर उल्टी दस्त होने लगे। देर सुबह तक बच्चे की हालत में सुधार आ सका।
- मेघा देवी
शुक्रवार की रात में महिला व बच्चा वार्ड में एक साथ 16 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। इसमें इंजेक्शन के न घुलने से हालत खराब होने की संभावना जताई जा रही है। स्पष्ट कारण जानने के लिए मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. एसके वासवानी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय
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ललितपुर। जिला अस्पताल में शुक्रवार की रात ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों द्वारा बच्चों को इंजेक्शन लगाने के कारण वार्ड में भर्ती 16 बच्चों की हालत बिगड़ गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आनन-फानन में चिकित्सकों को भेज कर बच्चों को उपचार मुहैया कराया। बच्चों की हालत में सुबह तक सुुुधार आ गया।
जिला अस्पताल में सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहर के प्रतिदिन डेढ़ से दो हजार मरीज उपचार कराने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में मौसम में हो रहे परिवर्तन से मौसमी बीमारियां पैर पसारने लगीं है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है, जिसका नजारा जिला अस्पताल में बच्चा व महिला वार्ड में देखने को मिल रहा है। यहां पर बेहतर उपचार की आस में आने वाले लोगों को अस्पताल में तैनात कर्मचारियों की लापरवाही का शिकार होना पड़ रहा है। शुक्रवार की रात में बच्चा व महिला वार्ड में तैनात स्टाफ ने बच्चों को एक इंजेक्शन लगाया। इसके बाद चिकित्सीय परामर्श के अनुसार बोतल लगाई। बोतल लगते ही बच्चों की सेहत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते वार्ड में भर्ती 16 बच्चों की हालत खराब हो गई। बच्चे सर्दी के चलते कांपने लगे। तीमारदारों ने बच्चों की सेहत खराब होती देख व हाथ पैर कांपने पर रोने लगे।
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वार्ड में मरीजों के तीमारदार चिल्लाने लगे। इससे कर्मचारियों के हाथ- पैर फूल गए। जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह को दी गई। उन्होंने बाल रोग विशेषज्ञ डा. मनीष कुमार व ईएमओ डा. सच्चिदानंद को वार्ड में भर्ती बच्चों का उपचार करने के निर्देश दिए। चिकित्सकों ने मौके पर पहुंच कर बच्चों को लग रही ड्रिप को हटाकर एक-एक इंजेक्शन लगाया, जिससे बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे। काफी देर बाद कुछ बच्चों को राहत मिली। वहीं कुछ की हालत में सुधार हो पाया।
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इससे पहले ही हो चुकी घटनाएं
जिला अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व में कई लापरवाही उजागर हुईं है। इनमें बीते वर्ष एक शव को बाहर तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ था। इस पर परिजन शव को कंधे पर लेकर गए थे। एक शव अस्पताल स्थित मोर्चरी में सात दिनों तक सड़ता रहा था। कई बार लोगों को शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल पाती है।
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बच्चे को उल्टी व दस्त हो रहे थे। पहले सीएचसी तालबेहट में उपचार कराया, हालत में सुधार नहीं होने पर जिला अस्ताल में लाए थे। जहां पर इंजेक्शन लगने से बच्चे की हालत काफी बिगड़ गई थी।
- पाना, तालबेहट
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इंजेक्शन लगते ही बच्चा एकदम से कांपने लगा। इसके बाद ड्रिप हटाकर एक इंजेक्शन देने पर उल्टी दस्त होने लगे। देर सुबह तक बच्चे की हालत में सुधार आ सका।
- मेघा देवी
शुक्रवार की रात में महिला व बच्चा वार्ड में एक साथ 16 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। इसमें इंजेक्शन के न घुलने से हालत खराब होने की संभावना जताई जा रही है। स्पष्ट कारण जानने के लिए मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. एसके वासवानी
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय