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रासायनिक खादों ने बिगाड़ी माटी की सेहत, तालबेहट और मड़ावरा की मिट्टी सबसे खराब
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ललितपुर। जिले में बढ़ते रसायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी बीमार होती जा रही है। मिट्टी में जीवाश्म कार्बन के साथ नाइट्रोजन और फॉस्फोरस समेत कई पोषक तत्वों की कमी है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार ब्लॉक तालबेहट और मड़ावरा की माटी की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां पर फॉस्फोरस की कमी से फसलों के तने कमजोर हो रहे हैं और फलियां भी मजबूत नहीं हो रही हैं। साथ ही इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना कि यदि जैविक खादों का प्रयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ पैदावार बढ़ेगा।
जिले में बीते वर्षों में हुए मृदा परीक्षण के दौरान सामने आया है कि मिट्टी में मुख्य पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों में कहीं अधिक कमी तो कहीं ज्यादा होने से फसलों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। सभी ब्लॉकों में जीवाश्म कार्बन की मात्रा कम है। नाइट्रोजन और फास्फोरस भी ठीक मात्रा में नहीं है। इससे फसलों के पौधे और फलियां अधिक मजबूत नहीं होती हैं। दाना भी कम चमकदार होता है। यहां पर जैविक खादों का उपयोग कर सुधार लाया जा सकता है।
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यह है मुख्य पोषक तत्व की स्थिति
पोषक तत्व - तालबेहट मड़ावरा बिरधा बार जखौरा महरौनी
जीवाश्म कार्बन - बहुत कम बहुत कम बहुत कम कम कम कम
नाइट्रोजन - बहुत कम - बहुत कम बहुत कम - कम कम कम
फॉस्फोरस बहुत कम बहुत कम कम बहुत कम बहुत कम कम
पोटाश - अधिक अधिक अधिक अधिक अधिक अधिक
सामान्य पोषक तत्वों की स्थिति
सूक्ष्म पोषक - तालबेहट - बार - जखौरा - बिरधा - महरौनी - मड़ावरा
जिंक - सामान्य - सामान्य - कम - कम - सामान्य - सामान्य
लोहा - सामान्य - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक - अधिक
मैग्नीज - अधिक - अधिक - कम - सामान्य - कम - कम
तांबा - अधिक - अधिक - कम - अधिक - सामान्य - सामन्य
गंधक - सामान्य - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक - अधिक
बोरान - अधिक - कम - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक
307767 बांटे गए मृदा स्वास्थ कार्ड वितरित
जिले में वर्ष 2015-16 में शासन के निर्देशन पर मिट्टी का परीक्षण कार्य शुरू किया गया था। जिसमें 2016-17 में 209933 मृदा स्वास्थ कार्ड वितरित किए गए थे। इसी प्रकार लगातार मृदा परीक्षण किए गए और वर्ष 2019-20 तक 307767 बांटे गए मृदा हेल्थ कार्ड वितरण किए गए। इसके बाद बीते वर्ष 2019-20 में किसानों ने स्वेच्छा से 107 सैंपलों की जांच कराई थी।
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दो साल से नहीं हो रहा मृदा परीक्षण
जनपद में दो वर्ष से मृदा परीक्षण कार्य बंद चल रहा है। यह मिट्टी की सेहत की स्थिति बीते दो वर्ष पूर्व है। जबकि अब रासायनिक खादों का प्रयोग अधिक हो गया है। इससे अब मिट्टी के हाल की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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कृषकों को कर रहे जागरूक
रासायनिक खादों का अधिक उपयोग किया जा रहा है। वहीं खेती फसल चक्र से नहीं किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
- राजीव भारती, जिला कृषि अधिकारी ललितपुर
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जिले में बीते वर्षों में हुए मृदा परीक्षण के दौरान सामने आया है कि मिट्टी में मुख्य पोषक तत्वों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों में कहीं अधिक कमी तो कहीं ज्यादा होने से फसलों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। सभी ब्लॉकों में जीवाश्म कार्बन की मात्रा कम है। नाइट्रोजन और फास्फोरस भी ठीक मात्रा में नहीं है। इससे फसलों के पौधे और फलियां अधिक मजबूत नहीं होती हैं। दाना भी कम चमकदार होता है। यहां पर जैविक खादों का उपयोग कर सुधार लाया जा सकता है।
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यह है मुख्य पोषक तत्व की स्थिति
पोषक तत्व - तालबेहट मड़ावरा बिरधा बार जखौरा महरौनी
जीवाश्म कार्बन - बहुत कम बहुत कम बहुत कम कम कम कम
नाइट्रोजन - बहुत कम - बहुत कम बहुत कम - कम कम कम
फॉस्फोरस बहुत कम बहुत कम कम बहुत कम बहुत कम कम
पोटाश - अधिक अधिक अधिक अधिक अधिक अधिक
सामान्य पोषक तत्वों की स्थिति
सूक्ष्म पोषक - तालबेहट - बार - जखौरा - बिरधा - महरौनी - मड़ावरा
जिंक - सामान्य - सामान्य - कम - कम - सामान्य - सामान्य
लोहा - सामान्य - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक - अधिक
मैग्नीज - अधिक - अधिक - कम - सामान्य - कम - कम
तांबा - अधिक - अधिक - कम - अधिक - सामान्य - सामन्य
गंधक - सामान्य - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक - अधिक
बोरान - अधिक - कम - सामान्य - अधिक - सामान्य - अधिक
307767 बांटे गए मृदा स्वास्थ कार्ड वितरित
जिले में वर्ष 2015-16 में शासन के निर्देशन पर मिट्टी का परीक्षण कार्य शुरू किया गया था। जिसमें 2016-17 में 209933 मृदा स्वास्थ कार्ड वितरित किए गए थे। इसी प्रकार लगातार मृदा परीक्षण किए गए और वर्ष 2019-20 तक 307767 बांटे गए मृदा हेल्थ कार्ड वितरण किए गए। इसके बाद बीते वर्ष 2019-20 में किसानों ने स्वेच्छा से 107 सैंपलों की जांच कराई थी।
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दो साल से नहीं हो रहा मृदा परीक्षण
जनपद में दो वर्ष से मृदा परीक्षण कार्य बंद चल रहा है। यह मिट्टी की सेहत की स्थिति बीते दो वर्ष पूर्व है। जबकि अब रासायनिक खादों का प्रयोग अधिक हो गया है। इससे अब मिट्टी के हाल की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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कृषकों को कर रहे जागरूक
रासायनिक खादों का अधिक उपयोग किया जा रहा है। वहीं खेती फसल चक्र से नहीं किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
- राजीव भारती, जिला कृषि अधिकारी ललितपुर