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Lalitpur News: देश की पहचान बना बुंदेलखंड का राई, सैरा, फाग और ढिमरयाई नृत्य

Tue, 29 Apr 2025 12:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 29 Apr 2025 12:33 AM IST
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Bundelkhand's Rai, Saira, Faag and Dhimrayai dance became the identity of the country
शैलेश गौतम
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ललितपुर। यहां भले ही अभी तक बुंदेली कला अकादमी नहीं बन सकी, लेकिन बुंदेली राई, सैरा, फाग और ढिमरयाई नृत्य ने देश में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। बुंदेली सम्राट लोक कला संस्था के जितेंद्र कुमार ने कलाकारों को ऐसा मंच दिया है, जिससे जनपद की अलग पहचान बन गई है। उनका कहना है कि यहां बुंदेली कला अकादमी बन जाए तो कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपना प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
मोनिया सैरा बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में एक पारंपरिक लोक नृत्य है। इसका इतिहास हजारों साल पुराना है, जो पूरी तरह कृष्ण भक्ति को समर्पित है। प्रकृति और गोवंश के प्रति संरक्षण का इसमें संदेश दिया जाता है। मौनिया बिना कुछ खाए और मौन व्रत धारण किए कई किलोमीटर पैदल चलकर नाचते गाते चलते हैं। दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा होती है, बुंदेलखंड में दीपावली के एक दिन बाद होने वाले मोनिया नृत्य की धूम पूरे जनपद के साथ ही बुंदेलखंड में रहती है। यहां तक कि यह नृत्य वृंदावन में भी प्रसिद्ध है। इसे गोवर्धन पर्वत उठाने के बाद भगवान कृष्ण की भक्ति में प्रकृति पूरक परंपरा के तौर पर मनाया जाता है।
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मान्यता के अनुसार मौनिया की टोलियां 12-12 गांवों को घेरकर जगह-जगह नृत्य करती हैं और यह टोली इसी प्रकार 12 वर्ष तक इस नृत्य को करती है। वर्तमान में सैरा लोक नृत्य विलुप्त होने के कगार पर है। नई पीढ़ी के लोग अपनी संस्कृति के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं या फिर काफी कम रुचि दिखा रहे हैं।
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ये हैं बुंदेलखंड के प्रमुख लोक नृत्य
बुंदेलखंड और जनपद में बुंदेली लोक नृत्य में राई, सैरा, फाग गीत और ढिमरयाई प्रमुख रूप से हैं। ये लोक नृत्य मुख्य रूप से त्योहारों या विशेष आयोजन के दौरान ही देखने को मिलते हैं। सैरा नृत्य दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा पर देखने को मिलता है, तो फाग गायन होली पर सुनाई देता है।

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देश में मिली पहचान, लहराया परचम
बुंदेलखंड के राई, सैरा नृत्य के जनपद के कलाकारों ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गोवा, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, पंजाब, नागालैंड समेत कई राज्यों के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में भी प्रतिभा दिखाई है। जी-20 दिल्ली, जी-20 आगरा, जी-20 लखनऊ, जी-20 वाराणसी, ट्रंप यात्रा भारत-आगरा, अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर, भारत-नेपाल मैत्री महोत्सव, फ्रांस अंतरराष्ट्रीय फोक फेस्टिवल, अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर समिट, अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉनक्लेव में भी इन नृत्यों ने अपनी पहचान बनाई है।
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