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पाली से तोड़ो नाता, नहीं तो चुनाव बहिष्कार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2016 12:31 AM IST
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politics news lalitpur
- फोटो : demo pic
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पाली तहसील अंतर्गत ग्राम बारचौन, सकतू, बुदनी, नाराहट, गदनपुर, मुड़िया, पड़रिया, गुड़ाबुजुर्ग, ककरुवा, दैनपुरा आदि के ग्रामीणों ने एक ज्ञापन मुख्य चुनाव आयोग, राज्यपाल, राजस्व परिषद् अध्यक्ष, व मंडलायुक्त को भेजकर सही तहसील में गांव को जोड़े जाने की मांग की है। चेतावनी दी गई अगर 2017 विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले इन गांवों को पाली तहसील से पृथक नहीं किया गया तो सभी लोग चुनाव बहिष्कार करेंगे।
बताते चलें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में जनपद में दो नई तहसीलें बनाई थीं, जिससे संपूर्ण जिले में ख़ुशी मनाई गई थी। लेकिन कुछ कर्मचारियों और अफसरों के गलत सर्वे की बदौलत वह दोनों तहसीलें कुछ ग्रामों के लिए अभिशाप साबित हुई जिससे कहीं ख़ुशी कहीं गम का माहौल बन गया। क्योंकि कुछ ग्रामों के लोग जहां 10-15 किमी की दूरी तय करने से ही तहसील कार्यालय पहुंच जाते, वहीं गलत सर्वे में फंसे ग्रामीणों को अब 50 से 60 किमी दूरी तय करनी पड़ती है।
इस समस्या से निजात दिलाने के लिए विधायक द्वारा राज्यपाल को एक प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया था। जिस पर राज्यपाल ने तत्कालीन राजस्व मन्त्री को आदेशित किया था कि उक्त ग्रामों का सर्वे कराकर कार्यवाही अमल में लायी जाये। इस पर प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारी के माध्यम से सर्वे कराया जिस पर तत्कालीन तहसीलदार महरौनी ने सवेेँ कर अपनी रिपोर्ट भेज दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्राम वासियों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है। आगामी विधानसभा चुनाव 2017 से पहले अगर कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जाती है तो चुनाव बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।
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बताते चलें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में जनपद में दो नई तहसीलें बनाई थीं, जिससे संपूर्ण जिले में ख़ुशी मनाई गई थी। लेकिन कुछ कर्मचारियों और अफसरों के गलत सर्वे की बदौलत वह दोनों तहसीलें कुछ ग्रामों के लिए अभिशाप साबित हुई जिससे कहीं ख़ुशी कहीं गम का माहौल बन गया। क्योंकि कुछ ग्रामों के लोग जहां 10-15 किमी की दूरी तय करने से ही तहसील कार्यालय पहुंच जाते, वहीं गलत सर्वे में फंसे ग्रामीणों को अब 50 से 60 किमी दूरी तय करनी पड़ती है।
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इस समस्या से निजात दिलाने के लिए विधायक द्वारा राज्यपाल को एक प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया था। जिस पर राज्यपाल ने तत्कालीन राजस्व मन्त्री को आदेशित किया था कि उक्त ग्रामों का सर्वे कराकर कार्यवाही अमल में लायी जाये। इस पर प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारी के माध्यम से सर्वे कराया जिस पर तत्कालीन तहसीलदार महरौनी ने सवेेँ कर अपनी रिपोर्ट भेज दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्राम वासियों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है। आगामी विधानसभा चुनाव 2017 से पहले अगर कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जाती है तो चुनाव बहिष्कार करने को बाध्य होंगे।
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