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उत्तम क्षमा जहां मन होई, अंतर बाहर शत्रु ना कोई

Wed, 31 Aug 2022 11:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 31 Aug 2022 11:24 PM IST
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Best forgiveness wherever there is a mind, there is no enemy outside the difference
मड़ावरा धर्मसभा को संबोधित करते जैन मुनि - फोटो : LALITPUR
मड़ावरा। पर्वराज पर्यूषण के प्रथम दिन बुधवार को नगर में उत्तम क्षमा धर्म पालन करते हुए बीते-बिसरे समय की आपसी कटुता को समाप्त कर क्षमा की याचना कर आपसी सौहार्द को बढ़ावा दिया गया। वर्णीनगर मडावरा में आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य अष्टम निर्यापक श्रमण मुनि अभय सागर, श्रमण मुनि प्रभात सागर, श्रमण मुनि निरीह सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में पर्यूषण महापर्व हर्ष व उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है।
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दशलक्षण पर्व के प्रथम दिवस शांतिधारा का सौभाग्य संतोष बजाज, साहिल बजाज, घनश्यामदास, अभिषेक जैन डोंगरा परिवार ने प्राप्त किया। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश सिंघई, सुधीर सिंघई, संतोष बजाज, सुधीर खुटगंवा ने प्राप्त किया। प्रात:काल संगीतमय पूजन, आरती पं. गजेंद्र कुमार सौंरया एवं जैन युवा जागृति सेवा समिति के डायरेक्टर धर्मेंद्र सराफ के निर्देशन में आयोजित किए गए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रभात सागर महाराज ने कहा कि उत्तम क्षमा धर्म हमें मित्रता सिखाता है। श्वेतांबर संप्रदाय में आठ दिन के पर्यूषण पर्व मनाए जाते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय में भाद्रपद मास में दशलक्षण महापर्व पंचमी से प्रारंभ होकर अनंत चतुर्दशी तक दस दिनों के मनाते हैं। वैसे तो वर्ष में दो बार पर्यूषण पर्व आते हैं लेकिन मुख्य रूप से भाद्रप्रद में धर्म प्रभावना पूर्वक मनाए जाते हैं। दोपहर में परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि अभय सागर महाराज ने तत्वार्थ सूत्र का अर्थ सहित वाचन किया। रात्रि में प्रवचन,धार्मिक क्रियाएं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के विद्वान प्रोफेसर दीपक जैन के निर्देशन में आयोजित हुए।
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भेदभाव को त्याग कर नया जीवन प्रारंभ करें : मुनि विनंद सागर
तालबेहट। पर्वराज पर्यूषण के शुभारंभ पर मुनि विनंद सागर महाराज ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है, हमें प्रत्येक जीव से मैत्री भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दस दिवसीय इस पर्व में अधिक से अधिक लोग धर्म लाभ लेकर अपने पापों का नाश करना चाहिए जिससे धर्म वृद्धि होगी। लोग अपने पुराने भेदभाव को त्याग कर नया जीवन प्रारंभ करते हुए अपने क्षमा धर्म में वृद्धि करें। इस मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष ऋषभ कुमार जैन, मंत्री सनत कुमार जैन, कमल कुमार जैन, विजय कृष्ण जैन, कमल कुमार जैन आदि मौजूद रहे। संवाद
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