{"_id":"660b1c76f8cfab6443085f44","slug":"become-the-one-who-spreads-happiness-in-the-world-lalitpur-news-c-131-1-ltp1001-112648-2024-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: दुनिया में खुशी बांटने वाले बन जाओ...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: दुनिया में खुशी बांटने वाले बन जाओ...
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक अजीमुश्शान हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के 106वें उर्स में मुशायरे का आयोजन किया गया। आल इंडिया कौमी एकता मुशायरे की अध्यक्षता शिशिरकांत चौबे सचिव विधानसभा मप्र व भारतीय सद्भावना मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार रहे। उर्स कमेटी के मुख्य संरक्षक राज्य मनोहर लाल पंथ ने शमा रोशन कर मुशायरे का आगाज किया। इससे पहले मौलाना व हाफिजों ने खुदा व नवी की शान में हम्द शरीफ व नात शरीफ पेश की।
मेहमान शायरों और कवियों ने बाबा के दरबार में खिराजे अकीदत पेश की। शायर शकील आरफी और इकबाल अजहर ने पहले नात शरीफ पेश करते हुए नवी की शान में पढ़ा, सिर्फ इतना चाहता है दीवाना या नवी, आपके दर पे हो मेरा आना जाना या नवी, हस्र तक बंटता रहेगा कम नहीं होगा कभी, आप लेकर आए हैं इतना खजाना या नवी। महाराष्ट्र में अमरावती से आए शायर अबरार कासिफ ने सुनाया, सवाल में नहीं रहे जवाब से निकल गए, वो जो अजीम थे किताब से निकल गए, वो खुशबुओं की बात तो बहुत पुरानी है, नया ये है रंग भी गुलाब के निकल गए।
जौहर कानपुरी ने जिले में कौमी एकता की मिसाल देते हुए हिंदू-मुस्लिम भाइयों को नवरात्रि व रमजान की मुबारकबाद दी। उन्होंने पंक्तियां पेश कीं, साथ कहने को तो यहां एक जहां रहता है, फिर भी तन्हा इंसान बड़ा बेचैन रहता है, वक्त वो भी था जब सब साथ रहा करते थे, अब तो एक परदेश तो कोई दूजे शहर में रहता है। और सिर्फ चेहरे से यूं खुशी का अंदाजा न लगा, वो खुशमिजाज है पर बड़ा संजीदा रहता है...सुनकर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं।
विज्ञापन
शाहिद अंजुम ने शायरी पेश की, आज नफरत के चरागों को बुझा कर रख दो, काबा और काशी के झगड़ों को मिटा कर रख दो, बेसबब दंगों-फसादों की तरफ मत जाओ, होश में आओ कि शोलों की तरफ मत जाओ, जान लेना नहीं जान देना सीखो, दुनिया में खुशी बांटने बाल बन जाओ, राम बाले हो तो वनवास नजर में रखो कर्बला वाले हो तो प्यास नजर में रखो। मुशायरे की महफिल सुबह करीब साढ़े चार बजे तक सजी रही। निजामत अबरार कासिफ ने की। संयोजक करीम असर व जहीर ललितपुरी रहे।
शायरों में शाहिद अंजुम, हाजी असरार चांदेरवी, राजीव रियाज, अफजल इलाहाबादी, वसीम झंझानवी, शकील कुरैशी झांसी, अबरार दानिश आदि शायरी से श्रोताओं को बांधे रखा। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन प्रेस क्लब के महासचिव मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, अरमान कुरैशी ने किया।
-- -- -- -- ये रहे मौजूद
उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, महासचिव हाजी साबिर अली, रमजानी दादा, जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश निरंजन, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन, अबरार अली, संयोजक प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले, मीडिया प्रभारी रिजवान उज्जमा, कोषाध्यक्ष हाजी अख्तर खान आदि मौजूद रहे।
.....
आज ये रहेंगे मशहूर कव्वाल
सदनशाह की दरगाह पर आज दो अप्रैल को सरफराज चिश्ती कव्वाल संभल मुरादाबाद ,टीवी सिंगर इंटरनेशनल फेम कव्वाली पेश करेंगे।
विज्ञापन
ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक अजीमुश्शान हजरत बाबा सदनशाह रहमत उल्ला अलैह के 106वें उर्स में मुशायरे का आयोजन किया गया। आल इंडिया कौमी एकता मुशायरे की अध्यक्षता शिशिरकांत चौबे सचिव विधानसभा मप्र व भारतीय सद्भावना मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार रहे। उर्स कमेटी के मुख्य संरक्षक राज्य मनोहर लाल पंथ ने शमा रोशन कर मुशायरे का आगाज किया। इससे पहले मौलाना व हाफिजों ने खुदा व नवी की शान में हम्द शरीफ व नात शरीफ पेश की।
मेहमान शायरों और कवियों ने बाबा के दरबार में खिराजे अकीदत पेश की। शायर शकील आरफी और इकबाल अजहर ने पहले नात शरीफ पेश करते हुए नवी की शान में पढ़ा, सिर्फ इतना चाहता है दीवाना या नवी, आपके दर पे हो मेरा आना जाना या नवी, हस्र तक बंटता रहेगा कम नहीं होगा कभी, आप लेकर आए हैं इतना खजाना या नवी। महाराष्ट्र में अमरावती से आए शायर अबरार कासिफ ने सुनाया, सवाल में नहीं रहे जवाब से निकल गए, वो जो अजीम थे किताब से निकल गए, वो खुशबुओं की बात तो बहुत पुरानी है, नया ये है रंग भी गुलाब के निकल गए।
विज्ञापन
जौहर कानपुरी ने जिले में कौमी एकता की मिसाल देते हुए हिंदू-मुस्लिम भाइयों को नवरात्रि व रमजान की मुबारकबाद दी। उन्होंने पंक्तियां पेश कीं, साथ कहने को तो यहां एक जहां रहता है, फिर भी तन्हा इंसान बड़ा बेचैन रहता है, वक्त वो भी था जब सब साथ रहा करते थे, अब तो एक परदेश तो कोई दूजे शहर में रहता है। और सिर्फ चेहरे से यूं खुशी का अंदाजा न लगा, वो खुशमिजाज है पर बड़ा संजीदा रहता है...सुनकर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं।
विज्ञापन
शाहिद अंजुम ने शायरी पेश की, आज नफरत के चरागों को बुझा कर रख दो, काबा और काशी के झगड़ों को मिटा कर रख दो, बेसबब दंगों-फसादों की तरफ मत जाओ, होश में आओ कि शोलों की तरफ मत जाओ, जान लेना नहीं जान देना सीखो, दुनिया में खुशी बांटने बाल बन जाओ, राम बाले हो तो वनवास नजर में रखो कर्बला वाले हो तो प्यास नजर में रखो। मुशायरे की महफिल सुबह करीब साढ़े चार बजे तक सजी रही। निजामत अबरार कासिफ ने की। संयोजक करीम असर व जहीर ललितपुरी रहे।
शायरों में शाहिद अंजुम, हाजी असरार चांदेरवी, राजीव रियाज, अफजल इलाहाबादी, वसीम झंझानवी, शकील कुरैशी झांसी, अबरार दानिश आदि शायरी से श्रोताओं को बांधे रखा। नायब सदर अब्दुल रहमान कल्ला ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन प्रेस क्लब के महासचिव मोहम्मद नसीम व शाकिर अली, अरमान कुरैशी ने किया।
उर्स कमेटी के सदर हाजी बाबू बदरुद्दीन कुरैशी, महासचिव हाजी साबिर अली, रमजानी दादा, जिला पंचायत अध्यक्ष कैलाश निरंजन, सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार जैन, अबरार अली, संयोजक प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले, मीडिया प्रभारी रिजवान उज्जमा, कोषाध्यक्ष हाजी अख्तर खान आदि मौजूद रहे।
.....
आज ये रहेंगे मशहूर कव्वाल
सदनशाह की दरगाह पर आज दो अप्रैल को सरफराज चिश्ती कव्वाल संभल मुरादाबाद ,टीवी सिंगर इंटरनेशनल फेम कव्वाली पेश करेंगे।