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Lalitpur News: ग्रामीण इलाकों में निर्मित भवनों पर बन सकेगी बैंक लिमिट
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- विधानसभा में बिल पास होने के बाद 51892 परिवारों को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ग्रामीणों को मालिकाना हक दिलाने वाला कानून विधानसभा में पास हो गया है, जिससे 625 ग्रामों के 51892 परिवारों को लाभ मिलेगा।
विधानसभा में पास बिल से भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के स्वामित्व अभिलेखों को कानूनी मान्यता प्राप्त हो गई है। अब ग्रामीण इलाकों में निर्मित भवनों का स्वामित्व किसानों को मिल सकेगा। साथ ही उनके इन भवनों पर बैंक से ऋण भी प्राप्त हो सकेगा। साथ ही बैंक लिमिट भी बन सकेगी। इस नये कानून से जिन लोगों के मकान ग्रामीण इलाकों में हैं, वह बैंक लिमिट बनवाकर कोई आर्थिक गतिविधि में अपनी भागीदारी कर सकते हैं। वर्तमान सिर्फ शहरी क्षेत्रों के भवनों को बैंक संपत्ति के रूप में मानता था। क्योंकि ग्रामीण इलाकों में किसानों के पास कोई भी अपने भवन का पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं होता है। जनपद में इस योजना के तहत 51852 परिवारों को लाभ दिलाया जा चुका है।
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भूमि अधिग्रहण मामलों में होगा फायदा
अभी तक किसी विकास परियोजना में भूमि अधिग्रहण के दौरान उस भूमि पर बने भवनों के लिए लेखपाल के किसानों को चक्कर लगाने पड़ते थे। इसके बाद ही उन्हें भवन के मुआवजा का लाभ मिलता था। ऐसे में कई लोग वंचित भी जाते थे। लेकिन अब घरौनी बिल से उन्हें मालिकाना हक मिल गया है। जिससे उन्हें अब लेखपालों का मोहताज नहीं होना होगा।
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जनपद के सभी 625 आबादी ग्रामों में 51892 परिवारों को घरौनी वितरित की जा चुकी है। शासन के आदेश पर यह कार्य किया गया था। घरौनी से ग्रामीणों को उनके भवनों का मालिकाना हक मिला है।
अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। ग्रामीणों को मालिकाना हक दिलाने वाला कानून विधानसभा में पास हो गया है, जिससे 625 ग्रामों के 51892 परिवारों को लाभ मिलेगा।
विधानसभा में पास बिल से भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के स्वामित्व अभिलेखों को कानूनी मान्यता प्राप्त हो गई है। अब ग्रामीण इलाकों में निर्मित भवनों का स्वामित्व किसानों को मिल सकेगा। साथ ही उनके इन भवनों पर बैंक से ऋण भी प्राप्त हो सकेगा। साथ ही बैंक लिमिट भी बन सकेगी। इस नये कानून से जिन लोगों के मकान ग्रामीण इलाकों में हैं, वह बैंक लिमिट बनवाकर कोई आर्थिक गतिविधि में अपनी भागीदारी कर सकते हैं। वर्तमान सिर्फ शहरी क्षेत्रों के भवनों को बैंक संपत्ति के रूप में मानता था। क्योंकि ग्रामीण इलाकों में किसानों के पास कोई भी अपने भवन का पुख्ता दस्तावेज मौजूद नहीं होता है। जनपद में इस योजना के तहत 51852 परिवारों को लाभ दिलाया जा चुका है।
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भूमि अधिग्रहण मामलों में होगा फायदा
अभी तक किसी विकास परियोजना में भूमि अधिग्रहण के दौरान उस भूमि पर बने भवनों के लिए लेखपाल के किसानों को चक्कर लगाने पड़ते थे। इसके बाद ही उन्हें भवन के मुआवजा का लाभ मिलता था। ऐसे में कई लोग वंचित भी जाते थे। लेकिन अब घरौनी बिल से उन्हें मालिकाना हक मिल गया है। जिससे उन्हें अब लेखपालों का मोहताज नहीं होना होगा।
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जनपद के सभी 625 आबादी ग्रामों में 51892 परिवारों को घरौनी वितरित की जा चुकी है। शासन के आदेश पर यह कार्य किया गया था। घरौनी से ग्रामीणों को उनके भवनों का मालिकाना हक मिला है।
अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।