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बाल विकास परियोजना अधिकारी निलंबित
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ललितपुर। बाल विकास परियोजना अधिकारी तालबेहट को अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करना महंगा पड़ गया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशक ने विभिन्न गड़बड़ियां उजागर होने पर उन्हें निलंबित कर दिया है।
नौनिहालों, किशोरी, गर्भवती व धात्री माताओं को पौष्टिक आहार मुहैया कराने वाले विभाग के कर्मियों की कार्यप्रणाली किसी से छिपी नहीं है। खासकर, आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर मनमानी के आरोप लगते रहते हैं। अब तो विभाग के अफसरों की जुगलबंदी भी इसमें सामने आ रही है। ऐसा ही एक प्रकरण बाल विकास परियोजना तालबेहट का उजागर हुआ है। यहां तैनात बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रीति भिलवारे ने खूब मनमानी बरती। उन्होंने उच्चाधिकारियों के आदेशों को हवा में उड़ा दिया। यही नहीं, उन पर अमर्यादित भाषा एवं अभद्र शब्दों के आरोप भी लगे। इस पर बाल विकास सेेवा एवं पुष्टाहार निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने उन्हें निलंबित कर जिला कार्यक्रम अधिकारी झांसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए अपर परियोजना प्रबंधक को नियुक्त कर दिया।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी किया निलंबित
बाल विकास परियोजना तालबेहट में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामरती पाल को भी बरती गई अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया है। इन पर आरोप हैं कि वह निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं खोलतीं व उच्च अधिकारियों के खिलाफ अनर्गल शिकायतें करती हैं।
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सचिव का रोका वेतन
ललितपुर। मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय ने मनरेगा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर विभागीय शिकंजा कस दिया है। उन्होंने श्रमिकों का समय से भुगतान नहीं करने के मामले में एक ग्राम पंचायत अधिकारी का जनवरी का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है। सीडीओ ने छह जनवरी को मनरेगा की एमआईएस के माध्यम से समीक्षा की। इसमें पाया था कि ग्राम पंचायत बड़ोखरा में कार्य आरंभ नहीं किए गए हैं। श्रमिकों के खाते सही नहीं दिए जा रहे हैं, जिस कारण श्रमिकों के बैंक खातों में धनराशि प्राप्त नहीं हो पा रही है। यही नहीं, कई सालों के कार्य अपूर्ण हैं। इस पर सीडीओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी धीरेंद्र कुमार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि श्रमिकों के सही बैंक खाते मनरेगा एमआईएस पर अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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नौनिहालों, किशोरी, गर्भवती व धात्री माताओं को पौष्टिक आहार मुहैया कराने वाले विभाग के कर्मियों की कार्यप्रणाली किसी से छिपी नहीं है। खासकर, आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर मनमानी के आरोप लगते रहते हैं। अब तो विभाग के अफसरों की जुगलबंदी भी इसमें सामने आ रही है। ऐसा ही एक प्रकरण बाल विकास परियोजना तालबेहट का उजागर हुआ है। यहां तैनात बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रीति भिलवारे ने खूब मनमानी बरती। उन्होंने उच्चाधिकारियों के आदेशों को हवा में उड़ा दिया। यही नहीं, उन पर अमर्यादित भाषा एवं अभद्र शब्दों के आरोप भी लगे। इस पर बाल विकास सेेवा एवं पुष्टाहार निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने उन्हें निलंबित कर जिला कार्यक्रम अधिकारी झांसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए अपर परियोजना प्रबंधक को नियुक्त कर दिया।
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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी किया निलंबित
बाल विकास परियोजना तालबेहट में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मी रामरती पाल को भी बरती गई अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया है। इन पर आरोप हैं कि वह निर्धारित समय पर कार्यालय नहीं खोलतीं व उच्च अधिकारियों के खिलाफ अनर्गल शिकायतें करती हैं।
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सचिव का रोका वेतन
ललितपुर। मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय ने मनरेगा में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर विभागीय शिकंजा कस दिया है। उन्होंने श्रमिकों का समय से भुगतान नहीं करने के मामले में एक ग्राम पंचायत अधिकारी का जनवरी का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है। सीडीओ ने छह जनवरी को मनरेगा की एमआईएस के माध्यम से समीक्षा की। इसमें पाया था कि ग्राम पंचायत बड़ोखरा में कार्य आरंभ नहीं किए गए हैं। श्रमिकों के खाते सही नहीं दिए जा रहे हैं, जिस कारण श्रमिकों के बैंक खातों में धनराशि प्राप्त नहीं हो पा रही है। यही नहीं, कई सालों के कार्य अपूर्ण हैं। इस पर सीडीओ ने ग्राम पंचायत अधिकारी धीरेंद्र कुमार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि श्रमिकों के सही बैंक खाते मनरेगा एमआईएस पर अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।