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अम्रुत योजना से डलेगी पाइप लाइन, बनेंगे पार्क
ब्यूरो
Updated Mon, 23 Nov 2015 01:01 AM IST
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ललितपुर। केंद्र सरकार व राज्य सरकार के सहयोग से नगर में अम्रुत योजना के अंतर्गत नगरवासियों के लिए पाइप लाइन डालने के साथ-साथ खूबसूरत पार्क बनाने का काम किया जाएगा। विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ लखनऊ में वार्ता हो चुकी है। अब इसकी स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
वर्ष 20011 की जनगणना के अनुसार शहर में भले ही 23,644 भवन बने हुए हों, लेकिन वर्तमान में भवनों की संख्या 28 हजार को पार कर गई है। ग्रामीण जनसंख्या नगर में तेजी से बसती चली जा रही है। यही कारण है कि मुहल्लों में खाली पड़े प्लाट अब भवनों में तब्दील हो गए हैँ।
आंकड़ों में नगर में डेढ़ लाख की आबादी है, लेकिन हकीकत यह है कि आबादी इससे काफी अधिक हो गई है। तेजी से बढ़ती आबादी और भवनों से नगर पालिका की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रहीं हैं।
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चार साल पहले नगर से निकलने वाला कचरा 60 मीट्रिक टन के आसपास था, जो नए सर्वे के अनुसार वर्तमान में 80 मीट्रिक टन पहुंच गया है। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की अटल मिशन फोर रिजुवेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेेशन (अम्रुत) योजना के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकारें नगरों के विकास की योजना तैयार कर रहीं हैं। अम्रुत
योजना में प्रदेश के 64 शहर शामिल हैं, जिसमें ललितपुर का भी नाम है। इसके अंतर्गत लखनऊ में होने वाली बैठकों में नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, तत्कालीन नगर पालिका अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता विपिन कुमार व नगर विकास से जुड़े विभागीय अधिकारी भाग ले चुके हैं। नगर में आबादी के साथ भवन, निकलने वाले कचरा, मतदाता, नाले व नालियों का पूरा विवरण जमा किया जा चुका है।
अफसरों की मानें तो नगर में पेयजल संकट के पूरी तरह से समाधान के लिए करीब 53 किमी पाइप लाइन, अधिक पानी वाले कुछ इलाकों में सीवर लाइन के साथ पार्कों का निर्माण किया जाना है। जिनमें अधिकांश पार्क कांशीराम आवासीय कालोनी में निर्मित किए जाएंगे। नगर में इन योजनाओं की स्वीकृृति मिलने से वर्षों से जारी पेयजल समस्या का समाधान हो जाएगा। साथ ही आबादी के हिसाब से पार्क बनने से लोगों को घूमने के लिए भी जगह मिल जाएगी।
जल्द किया जाएगा पत्राचार
जिम्मेदारों की मानें तो नगर से संबंधित आंकड़ों को लखनऊ में हुई बैठकों में पहुंचा दिया गया है। इसके अनुसार नगर विकास योजनाएं बनाकर जल्द ही पत्राचार किया जा सकता है। इसके बाद आम सहमति के आधार पर नगर विकास के संबंध में निर्णय लिया जाएगा, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
पानी के लिए नेहरू नगर ने लड़ी लड़ाई
पेयजल के लिए नेहरू नगरवासी लंबे समय से लड़ाई लड़ते चले आ रहे हैं। एक बार तो विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे, लेकिन यदि केंद्र व राज्य के सहयोग से 53 किमी पाइप लाइन डलती है तो नेहरू नगर सहित अपर व लोअर जोन के सभी इलाकों तक पानी पहुंचना आसान हो जाएगा।
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वर्ष 20011 की जनगणना के अनुसार शहर में भले ही 23,644 भवन बने हुए हों, लेकिन वर्तमान में भवनों की संख्या 28 हजार को पार कर गई है। ग्रामीण जनसंख्या नगर में तेजी से बसती चली जा रही है। यही कारण है कि मुहल्लों में खाली पड़े प्लाट अब भवनों में तब्दील हो गए हैँ।
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आंकड़ों में नगर में डेढ़ लाख की आबादी है, लेकिन हकीकत यह है कि आबादी इससे काफी अधिक हो गई है। तेजी से बढ़ती आबादी और भवनों से नगर पालिका की जिम्मेदारियां बढ़ती जा रहीं हैं।
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चार साल पहले नगर से निकलने वाला कचरा 60 मीट्रिक टन के आसपास था, जो नए सर्वे के अनुसार वर्तमान में 80 मीट्रिक टन पहुंच गया है। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की अटल मिशन फोर रिजुवेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेेशन (अम्रुत) योजना के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकारें नगरों के विकास की योजना तैयार कर रहीं हैं। अम्रुत
योजना में प्रदेश के 64 शहर शामिल हैं, जिसमें ललितपुर का भी नाम है। इसके अंतर्गत लखनऊ में होने वाली बैठकों में नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, तत्कालीन नगर पालिका अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता विपिन कुमार व नगर विकास से जुड़े विभागीय अधिकारी भाग ले चुके हैं। नगर में आबादी के साथ भवन, निकलने वाले कचरा, मतदाता, नाले व नालियों का पूरा विवरण जमा किया जा चुका है।
अफसरों की मानें तो नगर में पेयजल संकट के पूरी तरह से समाधान के लिए करीब 53 किमी पाइप लाइन, अधिक पानी वाले कुछ इलाकों में सीवर लाइन के साथ पार्कों का निर्माण किया जाना है। जिनमें अधिकांश पार्क कांशीराम आवासीय कालोनी में निर्मित किए जाएंगे। नगर में इन योजनाओं की स्वीकृृति मिलने से वर्षों से जारी पेयजल समस्या का समाधान हो जाएगा। साथ ही आबादी के हिसाब से पार्क बनने से लोगों को घूमने के लिए भी जगह मिल जाएगी।
जल्द किया जाएगा पत्राचार
जिम्मेदारों की मानें तो नगर से संबंधित आंकड़ों को लखनऊ में हुई बैठकों में पहुंचा दिया गया है। इसके अनुसार नगर विकास योजनाएं बनाकर जल्द ही पत्राचार किया जा सकता है। इसके बाद आम सहमति के आधार पर नगर विकास के संबंध में निर्णय लिया जाएगा, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
पानी के लिए नेहरू नगर ने लड़ी लड़ाई
पेयजल के लिए नेहरू नगरवासी लंबे समय से लड़ाई लड़ते चले आ रहे हैं। एक बार तो विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। इससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे, लेकिन यदि केंद्र व राज्य के सहयोग से 53 किमी पाइप लाइन डलती है तो नेहरू नगर सहित अपर व लोअर जोन के सभी इलाकों तक पानी पहुंचना आसान हो जाएगा।