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Lalitpur News: हवा के बाद अब गोविंद सागर बांध का पानी हो रहा दूषित
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के लिए जीवनदायिनी बने गोविंद सागर बांध के पानी में गंदगी का अंबार लगा है। भराव क्षेत्र के किनारों पर सफेद झाग दिखाई देने लगा है। इससे बांध का पानी दूषित होने की आशंका है।
शहजाद नदी पर निर्मित गोविंद सागर बांध यहां के सबसे पुराने बांधों में शुमार है। इस बांध में प्राचीन पद्धति की साइफन प्रणाली लगी है। बांध का पूर्ण जलस्तर 363.93 मीटर है। 96.79 मिलियन घनमीटर पानी आरक्षित करने की क्षमता है। यहां के पानी का 60 फीसदी हिस्सा फसलों की सिंचाई के लिए आरक्षित रखा जाता है। करीब 10820 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है, जोकि 190.09 किलोमीटर लंबी दायीं व बायीं नहर प्रणाली के जरिये होती है। शेष पानी से शहर व रेलवे विभाग को पेयजल आपूर्ति की जाती है।
जल शोधन के बाद इसका पानी नगर की आबादी के लिए दिया जाता है। वर्तमान में गोविंद सागर बांध का पानी दूषित हो रहा है। इसके किनारे पर कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक, शैवाल सहित अन्य हानिकारक वस्तुएं उतरा रही हैं। झांसी-सागर नेशनल हाईवे-44 के किनारे भराव क्षेत्र में गंदगी के साथ सफेद झाग दिखने लगा है। ऐसा नहीं है कि सिंचाई विभाग को बांध में गंदगी होने की जानकारी नहीं है। लेकिन, वह इसकी साफ सफाई नहीं करवा रहे हैं।
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बदबू से लोग परेशान : गोविंद सागर बांध पर शहर के कई लोग स्वस्थ रहने के लिए मॉर्निंग वाक पर जाते हैं, जिसमें बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक शामिल रहते हैं। वर्तमान में इन लोगों को बांध के गेट के पास पानी में उतरा रही मरी हुई मछलियों की बदबू का सामना करना पड़ रहा है।
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बांध के पानी का उपयोग
- 31 एमएलडी शहर की पेयजल के लिए सप्लाई
- 12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना को
- 0.2 एमएलडी रेलवे विभाग को
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बांध में गंदगी और झाग दिखाई देने पर इसकी जांच कराई जाएगी। पानी में गंदगी किसी भी स्थिति में नहीं रहने दी जाएगी। -इंजी. उमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल
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ललितपुर। शहर के लिए जीवनदायिनी बने गोविंद सागर बांध के पानी में गंदगी का अंबार लगा है। भराव क्षेत्र के किनारों पर सफेद झाग दिखाई देने लगा है। इससे बांध का पानी दूषित होने की आशंका है।
शहजाद नदी पर निर्मित गोविंद सागर बांध यहां के सबसे पुराने बांधों में शुमार है। इस बांध में प्राचीन पद्धति की साइफन प्रणाली लगी है। बांध का पूर्ण जलस्तर 363.93 मीटर है। 96.79 मिलियन घनमीटर पानी आरक्षित करने की क्षमता है। यहां के पानी का 60 फीसदी हिस्सा फसलों की सिंचाई के लिए आरक्षित रखा जाता है। करीब 10820 हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है, जोकि 190.09 किलोमीटर लंबी दायीं व बायीं नहर प्रणाली के जरिये होती है। शेष पानी से शहर व रेलवे विभाग को पेयजल आपूर्ति की जाती है।
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जल शोधन के बाद इसका पानी नगर की आबादी के लिए दिया जाता है। वर्तमान में गोविंद सागर बांध का पानी दूषित हो रहा है। इसके किनारे पर कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक, शैवाल सहित अन्य हानिकारक वस्तुएं उतरा रही हैं। झांसी-सागर नेशनल हाईवे-44 के किनारे भराव क्षेत्र में गंदगी के साथ सफेद झाग दिखने लगा है। ऐसा नहीं है कि सिंचाई विभाग को बांध में गंदगी होने की जानकारी नहीं है। लेकिन, वह इसकी साफ सफाई नहीं करवा रहे हैं।
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बदबू से लोग परेशान : गोविंद सागर बांध पर शहर के कई लोग स्वस्थ रहने के लिए मॉर्निंग वाक पर जाते हैं, जिसमें बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक शामिल रहते हैं। वर्तमान में इन लोगों को बांध के गेट के पास पानी में उतरा रही मरी हुई मछलियों की बदबू का सामना करना पड़ रहा है।
बांध के पानी का उपयोग
- 31 एमएलडी शहर की पेयजल के लिए सप्लाई
- 12 एमएलडी नेहरू नगर पाइप पेयजल परियोजना को
- 0.2 एमएलडी रेलवे विभाग को
बांध में गंदगी और झाग दिखाई देने पर इसकी जांच कराई जाएगी। पानी में गंदगी किसी भी स्थिति में नहीं रहने दी जाएगी। -इंजी. उमेश चंद्र, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल