फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   ‘जमुनिया’ ने जगाई संघर्ष की अलख

‘जमुनिया’ ने जगाई संघर्ष की अलख

Mon, 10 Jun 2013 05:30 AM IST
Lalitpur
Lalitpur Updated Mon, 10 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
ललितपुर। सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण का संदेश देने वाले कार्यक्रम ‘जमुनिया’ का तुवन मंदिर प्रांगण में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में उद्घाटन किया गया। यह नाटक एक विधवा महिला के संघर्ष की कहानी है, जो शिक्षा और सरकारी योजनाओं के बल पर अन्याय व भ्रष्टाचार से लड़कर जीतती है। तुवन मंदिर प्रांगण पर प्रदर्शित की गई इस नाट्य प्रस्तुति का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, जिलाधिकारी ओपी वर्मा व उनकी धर्मपत्नी ने किया।
विज्ञापन

उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि पुरुष व महिला समाज के दो पहिये हैं, कोई एक पहिया खराब हो जाए तो समाज का बढ़ना बंद हो जाता है। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या की निंदा की और कहा कि महिला को सांसद सोनिया गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती व सांसद सुषमा स्वराज की तरह बनाना चाहिए। इसके बाद अत्याधुनिक ढंग से तैयार किए गए विशाल मंच पर ‘जमुनिया’ की प्रस्तुति प्रारंभ होती है। नाटक का कथानक एक गांव का है, जिसमें रहने वाली एक विधवा महिला ‘जमुनिया’ की संपत्ति उसका देवर पंचायत से मिलकर हड़प लेता है। समाज की आंखों में धूल झोंकने के लिए देवर उसका एक बच्चा भी छीनकर अपने पास रख लेता है और विधवा महिला को धक्के मारकर घर से निकाल देता है। बेटी को अपने साथ लेकर विधवा महिला पैदल दूसरे गांव पहुंचती है और यहां झोपड़ी में एक बूढ़े चौकीदार से उसकी मुलाकात हो जाती है और चौकीदार उसको बेटी मानकर अपने घर रख लेता है। ‘जमुनिया’ सूप बनाना सीखकर अपनी बच्ची का भरण पोषण करने लगती है। इस बीच गांव में शारदा नामक महिला से उसकी दोस्ती हो जाती है। गांव में दाई नहीं होने से गर्भवती शारदा की दर्दनाक मौत हो जाती है। इस हादसे से ‘जमुनिया’ विचलित हो उठती है, लेकिन कुछ दिनों बाद वह चौकीदार काका से पढ़ने की इच्छा जताती है और काका प्रौढ़ शिक्षा केंद्र में उसको प्रवेश दिला देते हैं। शिक्षा का उपयोग करके जमुनिया परेशान ग्रामीणों की मदद करती है। गांव में उसकी ख्याति फैलने लगती है। इस बीच पंचायत चुनाव आते हैं और ‘जमुनिया’ दशकों से जीतने वाले ग्राम प्रधान को पराजित करके गांव की प्रधान बन जाती है। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत हुए घपलों को उजागर करके विधवा महिला गांव के विकास में जुट जाती है। जिलाधिकारी व अन्य अफसरों से मिलकर वह गांव में स्कूल, अस्पताल, सड़क बनवाती है। अन्य विकास कार्य भी तेजी के साथ चलने लगते हैं। गांव में पीसीओ भी लग जाता है। इसके बाद ‘जमुनिया’ अपनी ससुराल पहुंचती है। वह अपना बच्चा व पति की संपत्ति हासिल करती है। तुवन मंदिर प्रांगण में सैकड़ों की संख्या में लोगों इस नाट्य प्रस्तुति को देखा और सराहना की। इस दौरान नगर पालिका परिषद अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, रामस्वरूप देवलिया, जलील खां, नरेंद्र कड़ंकी, गजेंद्र सिंह बुंदेला, ज्ञानचंद्र अलया, वीरेंद्र शर्मा, राहुल राय आदि मौजूद मौजूद रहे।
विज्ञापन


महिला प्रधान हुईं सम्मानित
ललितपुर। महिला सशक्तिकरण के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिला ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया। इस दौरान अतिथियों ने बालाबेहट प्रधान कुमारी दीपा देवी, ककौरिया प्रधान शीलादेवी निरंजन, अंडेला प्रधान धनुष रानी, खजूरिया प्रधान मधू जैन, करमरा प्रधान बड़ी दुलैया को ट्रॉफी प्रदान की।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed