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पाली तहसील की मांग को लेकर प्रदर्शन

Lalitpur Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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ललितपुर। नगर पंचायत पाली को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए पाली के निवासी सड़कों उतर आए हैं। बृहस्पतिवार को हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने गोविंदसागर बांध से जनपद मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया। कलेक्ट्रेट परिसर में तहसील की मांग को लेकर ग्रामीणों ने जंगी प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने भ्रमण के दौरान विगत दिनों नाराहट में आयोजित एक समारोह में नाराहट को तहसील का दर्जा दिलाने संबंधी बयान दिया था। इस बयान से नगर पंचायत पाली में खलबली मच गई। लंबे समय से पाली को तहसील का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलनरत ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर अपनी नाराजगी जाहिर की। शुक्रवार को तहसील की मांग को लेकर पाली बंद रहा तथा हजारों ग्रामीणों ने ललितपुर की ओर कूच कर दिया। इस दौरान उन्होंने ‘पाली को तहसील बनाओ यही हमारा नारा है’, ‘आधी रोटी खायंगे पाली तहसील बनाएंगे’ के जमकर नारे लगाए। पैदल मार्च करते हुए हजारों की संख्या में ग्रामीण नेहरू महाविद्यालय, मवेशी बाजार, शहजादपुल, सावरकर चौक, घंटाघर होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर रामकुमार चौरसिया ने समस्त अभिलेखों सहित तहसील बनाने के लिए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम आनंद स्वरूप को सौंपा। ज्ञापन के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में सभा का आयोजन किया गया। इसमें पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नंद किशोर सोनी ने कहा कि नगर पंचायत के आसपास 135 गांव जुड़े हैं, जिसका संपूर्ण क्षेत्रफल 700 वर्ग किलोमीटर है, यदि तहसील का निर्माण हो जाता है तो क्षेत्र का विकास हो जाएगा। पूर्व लेखपाल दयाराम पारौचे ने कहा कि अकेले नगर पंचायत की आबादी बीस हजार से ऊपर है। प्रस्तावित तहसील के लिए आराजी नंबर 517 व 250 में करीब 14 एकड़ जमीन उपलब्ध है। इसके बाद भी अनावश्यक देरी समझ में नहीं आ रही है। लाल सिंह एडवोकेट प्रधान कैथोरा ने कहा कि चांदपुर जहाजपुर, देवगढ़, नीलकंठेश्वर, दूधई आदि तीर्थक्षेत्र इसके पास हैं, यहां पर्यटकों का आना जाना बना रहता है। यदि विकास हो जाएगा तो पर्यटकों के साथ आमदानी भी बढ़ेगी। प्रदीप कुमार जैन ने कहा कि सिमरधा, जीरोन, जाखलौन, पिपरई, बालाबेहट, डोंगराकला, बिरधा, खितवांस, गौना, नाराहट, पारौल, मसौरा कलां आदि बारह न्याय पंचायतें लगीं हुईं हैं। यदि पाली तहसील का निर्माण हो जाता है तो सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास हो जाएगा।
ज्ञापन पर नगर पंचायत अध्यक्ष कुमार चौरसिया, नंद किशोर सोनी, जय कुमार, अरविंद कुमार, सुरेश सेन, गीता देवी, संतोषी पार्षद, सुदामा प्रसाद, संजीव कुमार चौरसिया, सचिन, हरीराम चौरसिया, चंद्र कुमार, नरसिंह चौरसिया, संतोष प्रजापति, रमेश, भान सिंह, जगत सिंह परमार, काशीराम, खुशी बरार, रमेश पाल, संतोष विश्वकर्मा, सुखनंदन, गुली, रमेश, सुदामा, पप्पू साहू, मूलचंद्र नामदेव, लखनलाल, बृजेश, राजाराम, महेश, महेंद्र, सुरेंद्र, निसार खान, कनई, गोविंददास, रामचरन, मलखान, पुरुषोत्तम, विनोद, महेंद्र, पहलवान, लखन सिंह, रामसिंह, कृपाल सिंह, रूपदास, धर्मेंद्र, राकेश, लालजी, प्रकाश, गनेश, राजू, सूरज सिंह, प्रकाश सहित कस्बा के सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षर हैं। अंत में अमित पांडेय ने सभी का आभार प्रकट किया।
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पाली में बंद रहा बाजार
पाली(ललितपुर)। कस्बा में पाली तहसील को लेकर शुक्रवार को व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। इस मांग का व्यापारियों सहित आम लोगों ने साथ दिया।
शुक्रवार को व्यापारियों ने अपनी दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखकर तहसील की मांग में भाग लिया। नगर पंचायत में एक भी दुकान नहीं खुलने से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। होटलों से लेकर पान के डिब्बे तक बंद रहे। कस्बा में आने वाले लोग चाय की चुस्की लेने के लिए तरस गए। इधर कस्बा में कहानीकार ओमप्रकाश भास्कर ने बंद के दौरान लोगों को पाली तहसील बनाने के लिए जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने नगर की गली-गली में जाकर लोगों को तहसील के समर्थन में जानकारी दी।
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बोले पाली के लोग
तहसील बनाने में हो रही अनावश्यक देरी
जिले में तालबेहट, महरौनी व पाली तीन नगर पंचायतें हैं। तालबेहट व महरौनी पहले से ही तहसील बन चुकीं हैं, लेकिन पाली को तहसील बनाने में क्यों देरी की जा रही है यह समझ से परे है। हम लोगों को तहसील चाहिए इसके लिए चाहे हमें कुछ भी करना पड़े।
जय कुमार जैन, नगर महामंत्री व्यापार मंडल
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नहीं हो रहा विकास
शासन प्रशासन के साथ प्रदेश में सत्ताधारी राजनैतिक दलों से लगातार तहसील बनाने के लिए मांग की जा रही है। लेकिन अभी तक तहसील को नहीं बनाया गया है। इससे हमारा क्षेत्र विकास में पीछे चला जा रहा है।
सुरेश सेन, पार्षद पति वार्ड नंबर 8
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तहसील की मांग हमारा हक
हम अपने क्षेत्र के विकास की मांग कर रहे हैं। तहसील हमारा हक है और इसकी मांग करना हमारा अधिकार है। तहसील के लिए जनपद से लेकर लखनऊ तक लड़ाई लड़ी जाएगी और पाली को तहसील बनवाकर ही रहेंगे।
रामकुमार चौरसिया, नगर पंचायत अध्यक्ष
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हो रहा सौतेला व्यवहार
पाली नगर पंचायत के साथ चालीस सालों से लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। हम लोगों की मांग को राजनीतिक अड़ंगेबाजी के चलते दबाया जा रहा है। जबकि तहसील निर्माण के लिए यह क्षेत्र सभी मानकों पर खरा उतरता है।
राजाराम चौरसिया, पार्षद पति
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सबसे ज्यादा देते हैं राजस्व
जिले की तीन नगर पंचायतों में कस्बा के सबसे अधिक राजस्व की वसूली की जाती है। इससे सरकार को आमदनी होती है। हम गरीबों से कर तो वसूला जा रहा है। लेकिन विकास नहीं किया जा रहा है। यह सरासर अन्याय है।
मुवीन शाह, पार्षद वार्ड नंबर 1
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भौगोलिक दृष्टि से हमारा दावा अधिक खरा है। नगर पंचायत की बीस हजार आबादी के साथ 135 गांव इसके आसपास हैं। यदि तहसील का निर्माण हो जाता है तो पूरे क्षेत्र का विकास हो जाएगा। रोजगार के अवसर बढ़ने से बेरोजगारी कम हो जाएगी।
संजीव चौरसिया, नगर कांग्रेस अध्यक्ष
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पाली तहसील में शामिल होने से किया इंकार
धौर्रा (ललितपुर)। जहां एक नगर पंचायत पाली क्षेत्र के निवासी पाली को तहसील बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं धौर्रा क्षेत्र के ग्रामीणों ने पाली तहसील में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया है। इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनके गांवों को ललितपुर तहसील में ही रखा जाए अन्यथा, की स्थिति में उन्हें आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा।
क्षेत्रीय विकास संघर्ष समिति के तत्वावधान में गांधी चबूतरा स्थित मैदान में अयोजित बैठक में पाली में धौर्रा, कपासी, मादौन, पिपरई ग्राम पंचायतों को शामिल करने का निर्णय लिया गया था। बाद में प्रभारी जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया था। ज्ञापन में बताया गया कि राजस्व परिषद की 2009 में आयोजित बैठक में पाली तहसील में चार ग्राम पंचायतों को रखने का निर्णय लिया गया था, इसका कस्बा के लोगों ने विरोध किया था और चारों गांव धौर्रा, कपासी, मादौन, पिपरई को ललितपुर तहसील में रखने की मांग की गई थी। कस्बा में लोगों ने कहा कि पाली में ग्राम पंचायतों को रखने से उल्टी तरफ जाना पड़ेगा, इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। बैठक में वक्ताओं ने पाली तहसील में चारों ग्राम पंचायत को शामिल करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बैठक में इमरान खान, अखिलेश जैन, संतोष कुशवाहा, नवीन जैन, रामेश्वर मिश्र, यशपाल परिहार, ओमप्रकाश यादव, संजय जैन, वीर सिंह यादव, सियाराम शर्मा, परशुराम शर्मा, रामबाबू चौरसिया, गोविंद कुशवाहा, आलोक सिंह, आशाराम विश्वकर्मा, सुभाष नामदेव, सत्यम जैन, सुखमान यादव, ओपी यादव, महेंद्र लिटौरिया सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

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