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पूर्व मंत्री ने कोर्ट में किया सरेंडर, अंतरिम जमानत मिली
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:43 AM IST
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पूर्व मंत्री ने किया समर्पण, अंतरिम जमानत मिली
ललितपुर।
शहर में 12 वर्ष पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर हुई गोलीबारी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय से मिले तलब होने के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद आखिरकार शुक्रवार को पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा बुंदेला व वीरु राजा को न्यायालय में सरेंडर करना ही पड़ा। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) हरकेश कुमार की अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान तीनों लोगों को अंतरिम जमानत दे दी है। जमानत पर अंतिम सुनवाई के लिए 27 जून की तिथि नियत की गई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ भगत राजा के पुत्र व जिला पंचायत की पूराकलां सीट से सदस्य संजय सिंह बुंदेला उर्फ संजू राजा व समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष जयराम सिंह यादव के पुत्र जाखलौन सीट से जिला पंचायत सदस्य जोगेंद्र सिंह यादव अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। जिपं अध्यक्ष पद पर वर्चस्व को लेकर पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के चांदमारी आवास पर जान से मारने की नीयत और दहशत फैलाने के उद्देश्य से मंत्री पुत्र संजू राजा, पवन राजा बुंदेला, बम्बू सोनी, हन्नू पटेल, सत्येंद्र परमार, डीपी राजा ने फायरिंग की थी। इसमें पूर्व सपा जिलाध्यक्ष ने तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला व दोनों पुत्रों समेत आठ लोगों के खिलाफ इस मामले में मुकदमा पंजीकृत कराया था। घटना के कुछ दिनों बाद संजू राजा व डीपी राजा की हत्या हो गई थी, लेकिन जिपं अध्यक्ष चुनाव के दौरान पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर गोलीबारी के मामले में पुलिस ने तत्कालीन राज्यमंत्री व उनके पुत्र पवन राजा व वीरु राजा को घटना में नाम देने के बाद भी आरोपी नहीं बनाया गया था। ये लोग पुलिस ने विवेचना के दौरान अलग कर दिए थे और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। मामले में सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वादी पूर्व सपा जिलाध्यक्ष, उनकी पत्नी गजेंद्र राजा व अतल सिंह द्वारा न्यायालय को दिए बयानों में गोलीबारी की घटना में पूर्व मंत्री समेत उक्त तीन लोगों का भी शामिल होना बताया। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने गवाहों के बयानों व साक्ष्यों के आधार पर धारा 319 सीआरपीसी के तहत पूर्व मंत्री समेत उक्त तीनों को तलब किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इसके आधार पर न्यायालय ने 10 मार्च 2017 को तीनों को मुल्जिम मानते हुए न्यायालय में तलब होने के आदेश दिए थे। इस पर पूर्व मंत्री ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। साथ ही उच्च न्यायालय में क्रमिनल रिवीजन के तहत तलबी के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया था। इसे उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया और तीस दिन के अंदर 25 जून तक तीनों को अपर सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में पेेश होने का आदेश दिया था। इसके बाद अब उक्त गोलीबारी के मामले में सिविल लाइन निवासी पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा व वीरुराजा पुत्र निर्भान सिंह ने 24 जून दिन शुक्रवार को न्यायालय के समक्ष आत्मसर्मपण कर दिया। तीनों अभियुक्तों को न्यायालय द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में लिया गया और तीनों अभियुक्तों के अधिवक्ता द्वारा उनका जमानत प्रार्थना पत्र जिला न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से पत्रावली एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण जमानत प्रार्थना पत्र अधीनस्थ न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। एडीजे कोर्ट में उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र भी अभियुक्तों की ओर से प्रस्तुत किया गया। जिस पर अभियोजन द्वारा मुल्जिमों के आपराधिक इतिहास के संबंध में थाने से रिपोर्ट तलब करने की अपील की गई और समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने मुल्जिमों के जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर अंतरिम जमानत दे दी और जमानत पर अंतिम सुनवाई को 27 जून की तिथि मुकरर्र कर दी।
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ललितपुर।
शहर में 12 वर्ष पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर हुई गोलीबारी के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय से मिले तलब होने के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद आखिरकार शुक्रवार को पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा बुंदेला व वीरु राजा को न्यायालय में सरेंडर करना ही पड़ा। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) हरकेश कुमार की अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान तीनों लोगों को अंतरिम जमानत दे दी है। जमानत पर अंतिम सुनवाई के लिए 27 जून की तिथि नियत की गई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ भगत राजा के पुत्र व जिला पंचायत की पूराकलां सीट से सदस्य संजय सिंह बुंदेला उर्फ संजू राजा व समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष जयराम सिंह यादव के पुत्र जाखलौन सीट से जिला पंचायत सदस्य जोगेंद्र सिंह यादव अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार थे। जिपं अध्यक्ष पद पर वर्चस्व को लेकर पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के चांदमारी आवास पर जान से मारने की नीयत और दहशत फैलाने के उद्देश्य से मंत्री पुत्र संजू राजा, पवन राजा बुंदेला, बम्बू सोनी, हन्नू पटेल, सत्येंद्र परमार, डीपी राजा ने फायरिंग की थी। इसमें पूर्व सपा जिलाध्यक्ष ने तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला व दोनों पुत्रों समेत आठ लोगों के खिलाफ इस मामले में मुकदमा पंजीकृत कराया था। घटना के कुछ दिनों बाद संजू राजा व डीपी राजा की हत्या हो गई थी, लेकिन जिपं अध्यक्ष चुनाव के दौरान पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के घर गोलीबारी के मामले में पुलिस ने तत्कालीन राज्यमंत्री व उनके पुत्र पवन राजा व वीरु राजा को घटना में नाम देने के बाद भी आरोपी नहीं बनाया गया था। ये लोग पुलिस ने विवेचना के दौरान अलग कर दिए थे और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा है। मामले में सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वादी पूर्व सपा जिलाध्यक्ष, उनकी पत्नी गजेंद्र राजा व अतल सिंह द्वारा न्यायालय को दिए बयानों में गोलीबारी की घटना में पूर्व मंत्री समेत उक्त तीन लोगों का भी शामिल होना बताया। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने गवाहों के बयानों व साक्ष्यों के आधार पर धारा 319 सीआरपीसी के तहत पूर्व मंत्री समेत उक्त तीनों को तलब किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। इसके आधार पर न्यायालय ने 10 मार्च 2017 को तीनों को मुल्जिम मानते हुए न्यायालय में तलब होने के आदेश दिए थे। इस पर पूर्व मंत्री ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी। साथ ही उच्च न्यायालय में क्रमिनल रिवीजन के तहत तलबी के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया था। इसे उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया और तीस दिन के अंदर 25 जून तक तीनों को अपर सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में पेेश होने का आदेश दिया था। इसके बाद अब उक्त गोलीबारी के मामले में सिविल लाइन निवासी पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह बुुंदेला, उनके पुत्र पवन राजा व वीरुराजा पुत्र निर्भान सिंह ने 24 जून दिन शुक्रवार को न्यायालय के समक्ष आत्मसर्मपण कर दिया। तीनों अभियुक्तों को न्यायालय द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में लिया गया और तीनों अभियुक्तों के अधिवक्ता द्वारा उनका जमानत प्रार्थना पत्र जिला न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से पत्रावली एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण जमानत प्रार्थना पत्र अधीनस्थ न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। एडीजे कोर्ट में उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र भी अभियुक्तों की ओर से प्रस्तुत किया गया। जिस पर अभियोजन द्वारा मुल्जिमों के आपराधिक इतिहास के संबंध में थाने से रिपोर्ट तलब करने की अपील की गई और समय मांगा, जिस पर न्यायालय ने मुल्जिमों के जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर अंतरिम जमानत दे दी और जमानत पर अंतिम सुनवाई को 27 जून की तिथि मुकरर्र कर दी।
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