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अन्य: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के बयान से शिक्षामित्रों की उम्मीदों पर फिरा पानी
Updated Sat, 10 Mar 2018 01:29 AM IST
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के बयान से शिक्षा मित्र निराश
ललितपुर। जनपद समेत प्रदेश के सभी शिक्षामित्र काफी दिनों से यह उम्मीद लगाए हुए थे कि योगी सरकार नवीन शैक्षिक सत्र से उनके लिए कुछ बेहतर करेगी। लेकिन विगत रोज बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल द्वारा जारी किए गए बयान से सभी शिक्षामित्रों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। राज्यमंत्री जायसवाल ने साफ शब्दों में यह कहा है कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों को मानदेय 10 हजार कर चुकी है, इससे अधिक मानदेय बढ़ाने का कोई विचार व प्रस्ताव नहीं है।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के इस बयान से जनपद समेत सूबे के समस्त शिक्षामित्रों की उम्मीदें टूट गई हैं। इससे स्थानीय शिक्षामित्रों में रोष है। वहीं, शिक्षामित्रों ने विगत माह हुई टेट की परीक्षा में भी हुई लापरवाही को भी सरकार की साजिश बताया है।
अनदेखी का भुगतना पड़ेगा खामियाजा
सुप्रीम कोर्ट से आहत शिक्षामित्र उत्तर प्रदेश सरकार से उम्मीद रखे थे कि इस महंगाई के दौर में सरकार सम्मान जनक मानदेय देने पर विचार करेगी। इसका उत्तर प्रदेश के 01 लाख 72 हजार शिक्षामित्र बेसबरी से इंतजार कर रहे थे। लेकिन बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के बयान से सभी आहत हैं। क्योंकि शिक्षामित्र 80 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय करके विद्यालय शिक्षण कार्य करने जा रहे है। इसमें लगभग 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह आने-जाने में खर्च हो रहा है। अब शिक्षामित्र सरकार द्वारा दिए जा रहे 10 हजार रुपये के मानदेय में अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें। यदि अब भी शिक्षामित्रों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगामी समय में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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-भगवत सिंह बैस
जिलाध्यक्ष
आदर्श समायोजित शिक्षक/शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन
शिक्षामित्र समायोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद से लेकर आज तक सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील व निराशाजनक रहा है। टेट परीक्षा में हुई लापरवाही और भर्ती प्रक्रिया को जटिल बनाकर सरकार ने भर्ती को बाधित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कुल मिलाकर रोजगारपरक सरकार का दम भरने वाली सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह फेल रही है। बाकी की कसर बेसिक शिक्षामंत्री द्वारा दिए गए तथ्यहीन बयानों ने पूरी कर दी है। विभाग अभी तक यह बताने में नाकाम रहा है कि यदि लिखित परीक्षा का उद्देश्य गुणवत्तापरक शिक्षा है तो पूर्व से कार्यरत शिक्षक जिन्होंने इस परीक्षा को पास नहीं किया है वह कैसे शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखेंगे।
श्रीनारायण पांडेय
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय कंचनपुरा।
पूर्व में मेरा समायोजन नहीं हो सका था, केवल 3500 रुपये मानदेय में ही अपना जिम्मेदारियां निभा रहा था। इसके बाद यह मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया, जो पहले से काफी अधिक है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों के हिसाब से कम ही है। वर्तमान सरकार से उम्मीद थी कि अब यह सरकार हमारे लिए कुछ करेगी। लेकिन अनुपम जायसवाल ने जो बयान दिए, उससे में बहुत आहत हुआ हूं। यदि बेसिक शिक्षा मंत्री ने अपना बयान नहीं बदला और सदमे से कोई भी शिक्षामित्र की मौत होती है तो इसके पीछे सरकार जिम्मेदार होगी।
- आशाराम अहिरवार
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय इमलिया कलां।
समायोजित होने के बाद जीवन ने रफ्तार पकड़ ली थी, इससे परिवार में सब खुश थे। लेकिन, सरकार न्यायोचित कदम न उठाए जाने के कारण जीवन से बहुत हताश हूं। कब क्या घटना घटित हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि दो बार टीईटी पास होने के बाद भी शासन से न्याय नहीं मिला।
- गोविंद विहारी दुबे
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय देवरी।
मेरा विगत जुलाई माह से मानदेय नहीं मिला है और हर रोज अपने गांव से 50 किलोमीटर दूरी तय करके विद्यालय जाता हूं। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि मोटर साइकिल में भी पेट्रोल डलवाने के लिए दूसरों से कर्जा लेना पड़ता है। पिछले दिनों में मैं काफी कर्जे में आ गया हूं, हमेशा ही मानसिक तनाव बना रहता है। यदि मुझे कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार शासन होगा।
लालाराम रजक
परिषदीय शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय बलरगुवा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा मंत्री महिला होते हुए भी हम महिला शिक्षामित्रों की अनदेखी कर रहे हैं। एक ओर जब भारत के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री महिला दिवस की बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारी उपेक्षा की गई है। यदि सरकार हमारे हक में तुरंत निर्णय नहीं लेती तो प्रदेश की महिला शिक्षामित्र प्रतिभाग करेगी।
अर्चना राजपूत
समायोजित शिक्षामित्र, जखौरा।
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ललितपुर। जनपद समेत प्रदेश के सभी शिक्षामित्र काफी दिनों से यह उम्मीद लगाए हुए थे कि योगी सरकार नवीन शैक्षिक सत्र से उनके लिए कुछ बेहतर करेगी। लेकिन विगत रोज बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल द्वारा जारी किए गए बयान से सभी शिक्षामित्रों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। राज्यमंत्री जायसवाल ने साफ शब्दों में यह कहा है कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों को मानदेय 10 हजार कर चुकी है, इससे अधिक मानदेय बढ़ाने का कोई विचार व प्रस्ताव नहीं है।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के इस बयान से जनपद समेत सूबे के समस्त शिक्षामित्रों की उम्मीदें टूट गई हैं। इससे स्थानीय शिक्षामित्रों में रोष है। वहीं, शिक्षामित्रों ने विगत माह हुई टेट की परीक्षा में भी हुई लापरवाही को भी सरकार की साजिश बताया है।
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अनदेखी का भुगतना पड़ेगा खामियाजा
सुप्रीम कोर्ट से आहत शिक्षामित्र उत्तर प्रदेश सरकार से उम्मीद रखे थे कि इस महंगाई के दौर में सरकार सम्मान जनक मानदेय देने पर विचार करेगी। इसका उत्तर प्रदेश के 01 लाख 72 हजार शिक्षामित्र बेसबरी से इंतजार कर रहे थे। लेकिन बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के बयान से सभी आहत हैं। क्योंकि शिक्षामित्र 80 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय करके विद्यालय शिक्षण कार्य करने जा रहे है। इसमें लगभग 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह आने-जाने में खर्च हो रहा है। अब शिक्षामित्र सरकार द्वारा दिए जा रहे 10 हजार रुपये के मानदेय में अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें। यदि अब भी शिक्षामित्रों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगामी समय में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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-भगवत सिंह बैस
जिलाध्यक्ष
आदर्श समायोजित शिक्षक/शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन
शिक्षामित्र समायोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद से लेकर आज तक सरकार का रवैया बेहद असंवेदनशील व निराशाजनक रहा है। टेट परीक्षा में हुई लापरवाही और भर्ती प्रक्रिया को जटिल बनाकर सरकार ने भर्ती को बाधित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कुल मिलाकर रोजगारपरक सरकार का दम भरने वाली सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह फेल रही है। बाकी की कसर बेसिक शिक्षामंत्री द्वारा दिए गए तथ्यहीन बयानों ने पूरी कर दी है। विभाग अभी तक यह बताने में नाकाम रहा है कि यदि लिखित परीक्षा का उद्देश्य गुणवत्तापरक शिक्षा है तो पूर्व से कार्यरत शिक्षक जिन्होंने इस परीक्षा को पास नहीं किया है वह कैसे शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखेंगे।
श्रीनारायण पांडेय
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय कंचनपुरा।
पूर्व में मेरा समायोजन नहीं हो सका था, केवल 3500 रुपये मानदेय में ही अपना जिम्मेदारियां निभा रहा था। इसके बाद यह मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया, जो पहले से काफी अधिक है, लेकिन वर्तमान की जरूरतों के हिसाब से कम ही है। वर्तमान सरकार से उम्मीद थी कि अब यह सरकार हमारे लिए कुछ करेगी। लेकिन अनुपम जायसवाल ने जो बयान दिए, उससे में बहुत आहत हुआ हूं। यदि बेसिक शिक्षा मंत्री ने अपना बयान नहीं बदला और सदमे से कोई भी शिक्षामित्र की मौत होती है तो इसके पीछे सरकार जिम्मेदार होगी।
- आशाराम अहिरवार
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय इमलिया कलां।
समायोजित होने के बाद जीवन ने रफ्तार पकड़ ली थी, इससे परिवार में सब खुश थे। लेकिन, सरकार न्यायोचित कदम न उठाए जाने के कारण जीवन से बहुत हताश हूं। कब क्या घटना घटित हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि दो बार टीईटी पास होने के बाद भी शासन से न्याय नहीं मिला।
- गोविंद विहारी दुबे
शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय देवरी।
मेरा विगत जुलाई माह से मानदेय नहीं मिला है और हर रोज अपने गांव से 50 किलोमीटर दूरी तय करके विद्यालय जाता हूं। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि मोटर साइकिल में भी पेट्रोल डलवाने के लिए दूसरों से कर्जा लेना पड़ता है। पिछले दिनों में मैं काफी कर्जे में आ गया हूं, हमेशा ही मानसिक तनाव बना रहता है। यदि मुझे कुछ होता है तो इसका जिम्मेदार शासन होगा।
लालाराम रजक
परिषदीय शिक्षामित्र, प्राथमिक विद्यालय बलरगुवा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा मंत्री महिला होते हुए भी हम महिला शिक्षामित्रों की अनदेखी कर रहे हैं। एक ओर जब भारत के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री महिला दिवस की बधाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारी उपेक्षा की गई है। यदि सरकार हमारे हक में तुरंत निर्णय नहीं लेती तो प्रदेश की महिला शिक्षामित्र प्रतिभाग करेगी।
अर्चना राजपूत
समायोजित शिक्षामित्र, जखौरा।