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स्वाइन फ्लू रोग के लिए कंट्रोल रुम स्थापित
Updated Sat, 12 Aug 2017 02:00 AM IST
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स्वाइन फ्लू की रोकथाम को कंट्रोल रूम स्थापित
ललितपुर।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वाईन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारियों को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूप स्थापित किया है। साथ ही आम लोगों को स्वाईन फ्लू के लक्षणों के साथ ही बचाव के उपाय बताए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उक्त बीमारी के लक्षण और बचाव की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों की टीम को निर्देशित किया है। उन्होंने बैठक में बताया कि स्वाइन फ्लू/एच1एन1 के रोगी में बुखार, सिरदर्द, खांसी, खराब गला, बहती या बंद नाक, सांस लेने में तकलीफ, अन्य लक्षण बदन दर्द, थकान, ठिठुरन, अतिसार, उल्टी, बलगम में खून आना आदि की शिकायत हो सकती है। उन्होंने बताया कि इन्फ्लुएंजा ए-एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) बेहद संक्रामक रोग है। इसका संक्रमण एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में खांसने, छींकने के दौरान निकलने वाले संदूषित कण द्वारा फैलता हैं। यह वाइरस कठोर सतह पर 24 घंटे और कोमल सतह पर 20 घंटे तक जीवित रह सकता हैं। 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले बुजुर्गों, 5 वर्ष की आयु से छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को बीमारी का अधिक खतरा रहता है।
छोटे बच्चों में यदि बुखार हो, चिड़चिड़ापन हो, तरल पदार्थ तथा भोजन न कर रहे हो तो उन्हें चिकित्सालय ले जाये। उन्होंने इस रोग से बचाव को लोगों के लिए बताया कि वह छींकते एवं खांसते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल/कपड़े या टिशू पेपर से अवश्य ढकें। हमेशा अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं। अनावश्यक भीड़भाड वाली जगह से बचें और स्वाईन फ्लू से संक्रमित लोगों से लगभग 6 फीट की दूरी बनाये रखे। बुखार, सिर दर्द, खांसी और गले में खराश हो तो सार्वजनिक जगहों से दूर रहें और तुरंत डाक्टर से सलाह लें।
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उन्होंने बताया कि यह लक्षण किसी भी व्यक्ति में पाये जाने की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाएं या कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 05176-27437 एवं डा. देशराज सिंह दोहरे जिला एपीडिमोलॉजिस्ट मोबाइल नंबर 9977733204 या राज्य द्वारा जारी हैल्प लाईन 18001805145 पर संपर्क करें।
इंफेक्टेड लोगों से दूर रहें
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि ऐसे इंफेक्टेड लोगों से हाथ न मिलाएं, गले न लगें या दैहिक संपर्क में आने वाले अन्य अभिवादन न करें। सार्वजनिक जगह पर न थूकें एवं उपयोग में आये टिशू पेपर को कूड़ेदान में ही फेकें। फिजिशियन के परामर्श के बिना कोई दवाई न लें।
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ललितपुर।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वाईन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारियों को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूप स्थापित किया है। साथ ही आम लोगों को स्वाईन फ्लू के लक्षणों के साथ ही बचाव के उपाय बताए हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए उक्त बीमारी के लक्षण और बचाव की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए चिकित्सकों की टीम को निर्देशित किया है। उन्होंने बैठक में बताया कि स्वाइन फ्लू/एच1एन1 के रोगी में बुखार, सिरदर्द, खांसी, खराब गला, बहती या बंद नाक, सांस लेने में तकलीफ, अन्य लक्षण बदन दर्द, थकान, ठिठुरन, अतिसार, उल्टी, बलगम में खून आना आदि की शिकायत हो सकती है। उन्होंने बताया कि इन्फ्लुएंजा ए-एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) बेहद संक्रामक रोग है। इसका संक्रमण एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में खांसने, छींकने के दौरान निकलने वाले संदूषित कण द्वारा फैलता हैं। यह वाइरस कठोर सतह पर 24 घंटे और कोमल सतह पर 20 घंटे तक जीवित रह सकता हैं। 65 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले बुजुर्गों, 5 वर्ष की आयु से छोटे बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को बीमारी का अधिक खतरा रहता है।
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छोटे बच्चों में यदि बुखार हो, चिड़चिड़ापन हो, तरल पदार्थ तथा भोजन न कर रहे हो तो उन्हें चिकित्सालय ले जाये। उन्होंने इस रोग से बचाव को लोगों के लिए बताया कि वह छींकते एवं खांसते समय अपने मुंह और नाक को रुमाल/कपड़े या टिशू पेपर से अवश्य ढकें। हमेशा अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं। अनावश्यक भीड़भाड वाली जगह से बचें और स्वाईन फ्लू से संक्रमित लोगों से लगभग 6 फीट की दूरी बनाये रखे। बुखार, सिर दर्द, खांसी और गले में खराश हो तो सार्वजनिक जगहों से दूर रहें और तुरंत डाक्टर से सलाह लें।
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उन्होंने बताया कि यह लक्षण किसी भी व्यक्ति में पाये जाने की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाएं या कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 05176-27437 एवं डा. देशराज सिंह दोहरे जिला एपीडिमोलॉजिस्ट मोबाइल नंबर 9977733204 या राज्य द्वारा जारी हैल्प लाईन 18001805145 पर संपर्क करें।
इंफेक्टेड लोगों से दूर रहें
मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि ऐसे इंफेक्टेड लोगों से हाथ न मिलाएं, गले न लगें या दैहिक संपर्क में आने वाले अन्य अभिवादन न करें। सार्वजनिक जगह पर न थूकें एवं उपयोग में आये टिशू पेपर को कूड़ेदान में ही फेकें। फिजिशियन के परामर्श के बिना कोई दवाई न लें।