{"_id":"5cba127bbdec2214031bdafe","slug":"51555698299-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
ललितपुर। जिले में आजादी के बाद से अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंच पाई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल के भवनों का निर्माण तो करा दिया है, लेकिन चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा सकी है। हालांकि, प्राथमिक उपचार के लिए फार्मासिस्ट के भरोसे काम चल रहा है। लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी अथवा नेता ने समस्या को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है। इस कारण किसी का ध्यान इस ओर नहीं है।
सरकार ने निर्धनों को नि:शुल्क इलाज देने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की है, जिसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए पांच लाख रुपये के इलाज की सुविधा है। लेकिन, जिले में खुले सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने नये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवनों का निर्माण करा दिया, पर इनमें चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कितना मिल रहा है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज उपचार की आस लेकर आते है, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने पर मायूस होकर लौट जाते है। ऐसे में उन्हें उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। जिले में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अलावा 198 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं।
विज्ञापन
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर यह हैं कर्मचारी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के प्राथमिक उपचार के लिए एक फार्मासिस्ट, एक लैब सहायक, बार्ड ब्याय, एएनएम व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त हैं, जो अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जिले में चिकित्सकों की कमी है। इसके कारण कुछ नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक उपचार की सुविधा देने के लिए फार्मासिस्ट को तैनात किया गया है।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जनप्रतिनिधि व नेताओं ने नही ली सुध
जिले में बड़ा नर्सिंग होम नहीं है। मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल में भी गंभीर बीमारियों के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं है। यहां पर गंभीर मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया जाता है। इसके लिए कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता आगे नहीं आया है और न ही किसी प्रत्याशी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है।
विज्ञापन
ललितपुर। जिले में आजादी के बाद से अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंच पाई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पताल के भवनों का निर्माण तो करा दिया है, लेकिन चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा सकी है। हालांकि, प्राथमिक उपचार के लिए फार्मासिस्ट के भरोसे काम चल रहा है। लोकसभा चुनाव में किसी भी पार्टी अथवा नेता ने समस्या को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया है। इस कारण किसी का ध्यान इस ओर नहीं है।
सरकार ने निर्धनों को नि:शुल्क इलाज देने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की है, जिसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए पांच लाख रुपये के इलाज की सुविधा है। लेकिन, जिले में खुले सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने नये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवनों का निर्माण करा दिया, पर इनमें चिकित्सकों व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कितना मिल रहा है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीज उपचार की आस लेकर आते है, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने पर मायूस होकर लौट जाते है। ऐसे में उन्हें उपचार के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ता है। जिले में चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके अलावा 198 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं।
विज्ञापन
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर यह हैं कर्मचारी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों के प्राथमिक उपचार के लिए एक फार्मासिस्ट, एक लैब सहायक, बार्ड ब्याय, एएनएम व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त हैं, जो अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
जिले में चिकित्सकों की कमी है। इसके कारण कुछ नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्राथमिक उपचार की सुविधा देने के लिए फार्मासिस्ट को तैनात किया गया है।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जनप्रतिनिधि व नेताओं ने नही ली सुध
जिले में बड़ा नर्सिंग होम नहीं है। मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल में भी गंभीर बीमारियों के इलाज की पर्याप्त सुविधा नहीं है। यहां पर गंभीर मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया जाता है। इसके लिए कोई भी जनप्रतिनिधि या नेता आगे नहीं आया है और न ही किसी प्रत्याशी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है।