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Lalitpur News: मजदूरों के फंसे रहे 3.60 लाख, आठ सचिवों पर अर्थदंड लगा महज 185 रुपये
Mon, 15 May 2023 12:06 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Mon, 15 May 2023 12:06 AM IST
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ललितपुर। मनरेगा में मजदूरों को न तो काम मिल रहा है और न ही उनको मजदूरी का भुगतान हो रहा है। मजदूरी न मिलने पर मजदूरों को तो आर्थिक संकट झेलना पड़ा, लेकिन इसमें लापरवाही बरतने पर आठ सचिवों पर केवल 185 रुपये अर्थदंड लगाया गया। जिले में 111 मस्टरोलों के 3.60 लाख रुपये का भुगतान न करने पर लगने वाला अर्थदंड सरकारी योजना की हकीकत बताने के लिए काफी है।
मनरेगा में काम करने के बाद मजदूरों का भुगतान 15 दिन में न करने पर मस्टरोल की कुल धनराशि का 0.05 प्रतिशत अर्थदंड सचिवों से वसूल किया जाता है। जिले की 415 ग्राम पंचायतों में मनरेगा में 2,00,906 जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें 1,44,594 सक्रिय मजदूर हैं। जिले में बीते वित्तीय वर्ष में मनरेगा से बड़े स्तर पर काम कराए गए, लेकिन श्रमिकों को भुगतान नहीं किया गया।
मजदूरी का भुगतान न मिलने पर जब अफसरों ने जांच की तो पाया कि जखौरा की छह ग्राम पंचायतों में 101 मस्टरोलों का भुगतान देरी से हुआ। इसमें गांव खड़ेरा के 52, जिजयावन के 33, कुआंतला के सात, रघुनाथपुरा के छह, लखनपुरा के दो व गुरसौरा का एक मस्टरोल का 3.44 लाख रुपये का भुगतान 15 दिन के अंदर नहीं किया गया। इस पर जिम्मेदार छह सचिवों पर महज 172 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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वहीं ब्लॉक बार की ग्राम पंचायत बम्हौरी खडै़त में आठ मस्टरोल के 10 हजार रुपये के भुगतान में देरी पर सचिव पर 10 रुपये और ब्लॉक तालबेहट में दो मस्टरोल के छह हजार रुपये का भुगतान देर से करने पर सचिव पर महज तीन रुपये जुर्माना लगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने अफसरों को नोटिस जारी किए हैं। अब जब भुगतान में देरी पर अर्थदंड लगाने का नियम इतना कमजोर है, तो मजदूरों का समय पर भुगतान मिलना बस कोरे निर्देश हैं।
मजदूर कर रहे पलायन
मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के पास खेती के लिए भूमि न के बराबर होती है। वह सिर्फ मजदूरी पर आश्रित रहते हैं। लेकिन मनरेगा में काम करने के बाद विलंब से भुगतान होने से मजदूरों का मोह भंग होता है। वह शहरी इलाकों में मजदूरी करने के लिए पलायन करते हैं।
मजदूरों के खाते में जाएगा अर्थदंड
विलंब भुगतान के दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों से वसूली जाने वाली अर्थदंड की धनराशि मनरेगा फंड में सीधे जमा कराई जाती है। इसके बाद प्रभावित मजदूरों के खाते में शासन स्तर से धनराशि भेजी जाती है।
मनरेगा योजना के तहत विभिन्न ब्लॉक की आठ ग्राम पंचायतों में मस्टरोल का विलंब से भुगतान करने वाले सचिवों पर 185 रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इसके लिए सचिवों को नोटिस जारी किए गए हैं। - रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा
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मनरेगा में काम करने के बाद मजदूरों का भुगतान 15 दिन में न करने पर मस्टरोल की कुल धनराशि का 0.05 प्रतिशत अर्थदंड सचिवों से वसूल किया जाता है। जिले की 415 ग्राम पंचायतों में मनरेगा में 2,00,906 जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें 1,44,594 सक्रिय मजदूर हैं। जिले में बीते वित्तीय वर्ष में मनरेगा से बड़े स्तर पर काम कराए गए, लेकिन श्रमिकों को भुगतान नहीं किया गया।
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मजदूरी का भुगतान न मिलने पर जब अफसरों ने जांच की तो पाया कि जखौरा की छह ग्राम पंचायतों में 101 मस्टरोलों का भुगतान देरी से हुआ। इसमें गांव खड़ेरा के 52, जिजयावन के 33, कुआंतला के सात, रघुनाथपुरा के छह, लखनपुरा के दो व गुरसौरा का एक मस्टरोल का 3.44 लाख रुपये का भुगतान 15 दिन के अंदर नहीं किया गया। इस पर जिम्मेदार छह सचिवों पर महज 172 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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वहीं ब्लॉक बार की ग्राम पंचायत बम्हौरी खडै़त में आठ मस्टरोल के 10 हजार रुपये के भुगतान में देरी पर सचिव पर 10 रुपये और ब्लॉक तालबेहट में दो मस्टरोल के छह हजार रुपये का भुगतान देर से करने पर सचिव पर महज तीन रुपये जुर्माना लगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने अफसरों को नोटिस जारी किए हैं। अब जब भुगतान में देरी पर अर्थदंड लगाने का नियम इतना कमजोर है, तो मजदूरों का समय पर भुगतान मिलना बस कोरे निर्देश हैं।
मजदूर कर रहे पलायन
मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के पास खेती के लिए भूमि न के बराबर होती है। वह सिर्फ मजदूरी पर आश्रित रहते हैं। लेकिन मनरेगा में काम करने के बाद विलंब से भुगतान होने से मजदूरों का मोह भंग होता है। वह शहरी इलाकों में मजदूरी करने के लिए पलायन करते हैं।
मजदूरों के खाते में जाएगा अर्थदंड
विलंब भुगतान के दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों से वसूली जाने वाली अर्थदंड की धनराशि मनरेगा फंड में सीधे जमा कराई जाती है। इसके बाद प्रभावित मजदूरों के खाते में शासन स्तर से धनराशि भेजी जाती है।
मनरेगा योजना के तहत विभिन्न ब्लॉक की आठ ग्राम पंचायतों में मस्टरोल का विलंब से भुगतान करने वाले सचिवों पर 185 रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इसके लिए सचिवों को नोटिस जारी किए गए हैं। - रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा