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डाक्टरों का तबादला नहीं कर पाएंगे सीएमओ
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डाक्टरों का तबादला नहीं कर पाएंगे सीएमओ
ललितपुर। शासन ने फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (एफआरयू) को सशक्त बनाने के लिए सीएमओ के अधिकारों में कटौती कर दी है। अब वह इस यूनिट के डाक्टरों का तबादला नहीं कर सकेंगे। यही नहीं, डॉक्टर्स को अपने जनपद में रहने का मौका मिलेगा।
मंगलवार को चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण निदेशालय, राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से फर्स्ट रेफरल यूनिट को सक्रिय बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यशाला की शुरुआत निदेशक मातृ शिशु कल्याण डॉक्टर सुरेश चंद्रा ने की। इस मौके पर प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत अब डॉक्टर को अपने गृह जनपद में रहने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। डॉक्टर का तबादला मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए जल्द ही शासनादेश जारी होने जा रहा है। वसंत कुमार, अधिशाषी निदेशक उत्तर प्रदेश तकनीक सहयोग इकाई ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे का मकसद गुणवत्तापरक प्रसव कराने के लिए बेहतर माहौल देना है। एफआरयू में चयन प्रकिया वरिष्ठता के आधार पर की जा रही है, साथ ही दंपत्ति डॉक्टर को एक ही स्वास्थ्य इकाई चयन करने की सुविधा दी जाएगी।
......
एफआरयू को किया जा रहा सक्रिय
एफआरयू का मतलब जहां आपरेशन से बच्चों को पैदा किया जाता है। इसमें स्टाफ की कमी न रहे, इसलिए निर्णय लिए गए हैं। तालबेहट चिकित्सालय में भी चिकित्सकों की कमी है। उच्चस्थ अफसरों के निर्णय से ऐसे अस्पतालों को मजबूती मिलेगी।
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डॉ. प्रताप सिंह, सीएमओ ललितपुर
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ललितपुर। शासन ने फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (एफआरयू) को सशक्त बनाने के लिए सीएमओ के अधिकारों में कटौती कर दी है। अब वह इस यूनिट के डाक्टरों का तबादला नहीं कर सकेंगे। यही नहीं, डॉक्टर्स को अपने जनपद में रहने का मौका मिलेगा।
मंगलवार को चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण निदेशालय, राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से फर्स्ट रेफरल यूनिट को सक्रिय बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यशाला की शुरुआत निदेशक मातृ शिशु कल्याण डॉक्टर सुरेश चंद्रा ने की। इस मौके पर प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत अब डॉक्टर को अपने गृह जनपद में रहने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। डॉक्टर का तबादला मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए जल्द ही शासनादेश जारी होने जा रहा है। वसंत कुमार, अधिशाषी निदेशक उत्तर प्रदेश तकनीक सहयोग इकाई ने कहा कि इस कार्यक्रम के पीछे का मकसद गुणवत्तापरक प्रसव कराने के लिए बेहतर माहौल देना है। एफआरयू में चयन प्रकिया वरिष्ठता के आधार पर की जा रही है, साथ ही दंपत्ति डॉक्टर को एक ही स्वास्थ्य इकाई चयन करने की सुविधा दी जाएगी।
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एफआरयू को किया जा रहा सक्रिय
एफआरयू का मतलब जहां आपरेशन से बच्चों को पैदा किया जाता है। इसमें स्टाफ की कमी न रहे, इसलिए निर्णय लिए गए हैं। तालबेहट चिकित्सालय में भी चिकित्सकों की कमी है। उच्चस्थ अफसरों के निर्णय से ऐसे अस्पतालों को मजबूती मिलेगी।
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डॉ. प्रताप सिंह, सीएमओ ललितपुर