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एकता के बगैर समाज नहीं कर सकता आदर्श की स्थापना
Updated Wed, 25 Apr 2018 03:20 AM IST
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एकता के बगैर समाज नहीं कर सकता आदर्श की स्थापना
ललितपुर।
क्षेत्रपाल जैन मंदिर प्रांगण में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि एकता ही समाज का दीपक है। एकता के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन है जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। वहीं, विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है। हाल ही में आये सुप्रीमकोर्ट के इच्छा मृत्यु के निर्णय पर जैन धर्म में सल्लेखना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन आचार शास्त्र में सल्लेखनापूर्वक होने वाली मृत्यु को समाधिमरण, पंडितमरण अथवा संधारा भी कहा जाता है। इसका अर्थ है. जीवन के अंतिम समय में तप विशेष की आराधना करना है। समाधिपूर्वक मृत्यु का वरण करना ही मृत्यु महोत्सव है। विचारों की दृढ़ता और प्रसन्न चित्त वाला व्यक्ति ही सल्लेखना को धारण कर सकता है। सल्लेखना, संथारा एक धार्मिक प्रक्रिया है न कि आत्महत्या। इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडै़या, संयोजक प्रदीप सतरवांस, प्रबंधकद्वय मोदी पंकज पार्षद, राजेंद्र लल्लू थनवारा, उपाध्यक्ष मीना इमलिया, डॉ. सुनील संचय, डॉ. संजीव कड़ंकी, अक्षय अलया, संजीव जैन ममता स्पोर्ट्स, जिनेंद्र जैन, गेंदालाल सतभैया, अखिलेश गदयाना, ज्ञानचंद्र जैन सागर, पंडित शीतल चंद्र जैन, जिनेंद्र थनवारा, महेंद्र जैन, महेंद्र सिंघई, सोमचंद्र जैन, निहालचंद्र उपस्थित रहे। संचालन जैन पंचायत के महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने किया।
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ललितपुर।
क्षेत्रपाल जैन मंदिर प्रांगण में मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र संत आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि एकता ही समाज का दीपक है। एकता के बिना समाज आदर्श स्थापित नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में संगठन का बड़ा महत्व है। अकेला मनुष्य शक्तिहीन है जबकि संगठित होने पर उसमें शक्ति आ जाती है। वहीं, विघटन समाज के लिए विनाशक शक्ति है। हाल ही में आये सुप्रीमकोर्ट के इच्छा मृत्यु के निर्णय पर जैन धर्म में सल्लेखना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जैन आचार शास्त्र में सल्लेखनापूर्वक होने वाली मृत्यु को समाधिमरण, पंडितमरण अथवा संधारा भी कहा जाता है। इसका अर्थ है. जीवन के अंतिम समय में तप विशेष की आराधना करना है। समाधिपूर्वक मृत्यु का वरण करना ही मृत्यु महोत्सव है। विचारों की दृढ़ता और प्रसन्न चित्त वाला व्यक्ति ही सल्लेखना को धारण कर सकता है। सल्लेखना, संथारा एक धार्मिक प्रक्रिया है न कि आत्महत्या। इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडै़या, संयोजक प्रदीप सतरवांस, प्रबंधकद्वय मोदी पंकज पार्षद, राजेंद्र लल्लू थनवारा, उपाध्यक्ष मीना इमलिया, डॉ. सुनील संचय, डॉ. संजीव कड़ंकी, अक्षय अलया, संजीव जैन ममता स्पोर्ट्स, जिनेंद्र जैन, गेंदालाल सतभैया, अखिलेश गदयाना, ज्ञानचंद्र जैन सागर, पंडित शीतल चंद्र जैन, जिनेंद्र थनवारा, महेंद्र जैन, महेंद्र सिंघई, सोमचंद्र जैन, निहालचंद्र उपस्थित रहे। संचालन जैन पंचायत के महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया ने किया।
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