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अब जालीदार ट्रैक्टर से बाघ की सघन तलाश

Wed, 30 Dec 2020 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 12:48 AM IST
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Wild Animals
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए घूम रहे बाघ को खोजने के सारे प्रयास विफल होने के बाद अब वन विभाग अत्याधुनिक जालीदार ट्रैक्टर का सहारा ले रहा है। जिन स्थानों पर पैदल नहीं पहुंचा जा सकता वहां वन कर्मी इस ट्रैक्टर के जरिए जाकर बाघ को तलाश करेंगे। उधर दो दिन पहले एक झलक दिखने के बाद बाघ फिर जंगल में गुम हो गया।
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किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में पिछले 12 दिनों से वन विभाग की टीमों के साथ आंख-मिचौली का खेल, खेल रहा बाघ दो दिन पहले सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार और वन कर्मियों को दिखाई दिया था, जो बाद में आंखों से ऐसा ओझल हुआ कि आज तक उसका सुराग नहीं मिल पाया है। इससे सर्च अभियान का नतीजा शून्य साबित हुआ। वन विभाग का कहना है कि बाघ जंगल में ही मौजूद है, लेकिन घनी ऊंची झाड़ियां और नरकुल की घास के कारण उसे तलाशना मुश्किल हो रहा है। घनी झाड़ियों के कारण ही बाघ ड्रोन कैमरों की नजर में नहीं आ रहा है।
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डॉ आरके सिंह के नेत्तृत्व में ट्रैंक्युलाइज टीमें पिछले एक हफ्ते से किशनपुर सेंक्चुरी में ही डेरा डाले हुए हैं। सुबह से शाम तक जंगल की खाक छानने के बाद भी टीमों को बाघ के दर्शन नहीं हुए। ऐसे में बाघ को टैंक्युलाइज कर उसके गले में फंसा फंदा निकालना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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दो दिन और इंतजार के बाद बनाई जाएगी नई रणनीत
दुधवा टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक /फील्ड निदेशक संजय पाठक ने बताया कि अगले दो दिन बाघ की तलाश करने के बाद उसे ट्रैंक्युलाइज करने में यदि कामयाबी नहीं मिली तो विशेषज्ञों से बातचीत कर नई रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल बाघ सुरक्षित है और उसकी गतिविधियां सामान्य हैं। यह वन विभाग के लिए राहत की बात है।
दिन भर रहता छिपा, रात में चहलकदमी करता है बाघ
लगातार पेट्रोलिंग से घबराया बाघ दिन भर झाड़ियों में छिपा रहता है,लेकिन रात में पेट्रोलिंग बंद होने के बाद जंगल में घूमता है। इस बात का अंदाजा बाघ के पगचिह्न देखकर लगाया है।

घास के मैदान में हाथियों से की गई कांबिंग
बाघ की संभावित मौजूदगी वाले स्थलों पर घास के मैदानों की कांबिंग हाथियों के जरिए की जा रही है। इस अभियान में कुल चार हाथी लगाए गए हैं।
दो दिन पहले पेट्रोलिंग टीमों को नजर आने के बाद बाघ जंगल में छिप गया है। उसे तलाश करने की पूरी कोशिश की जा रही है। यदि दो दिन में सफलता नहीं मिलती है तो विशेषज्ञों से परामर्श कर नई रणनीति तैयार की जाएगी।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक /फील्ड निदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व।
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