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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   When the farmers heard the story of the death of their companions the eyes of the farmers were filled with tears.

आंखों देखी : साथियों की मौत का किस्सा सुना तो किसानों की भर आई आंखें, तमतमा उठे चेहरे

Tue, 05 Oct 2021 03:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 05 Oct 2021 03:04 AM IST
सार

अन्नदाता किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने 400-500 किसानों के बीच मौत का पूरा किस्सा बयां किया। घटना से आक्रोशित किसान टिकैत के कहने पर भी नहीं लौटे घरों को।

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When the farmers heard the story of the death of their companions the eyes of the farmers were filled with tears.
लखीमपुर खीरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तिकुनिया से लौटे किसानों ने जब पूरनपुर में किसानों को वहां का आंखों देखा हाल सुनाया तो सैकड़ों किसानों के चेहरे आक्रोश से भर आए। आंखें नम हो गईं। आक्रोश के चलते तिकुनिया की घटना के बाद से ही किसान रविवार को शाम पूरनपुर में सड़कों पर उतर आए हैं। अन्नदाता किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने 400-500 किसानों के बीच मौत का पूरा किस्सा बयां किया।

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आपको बताते चलें कि किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को रात 12 बजे से 12.20 बजे पूरनपुर में सड़क पर धरना दे रहे किसानों के बीच रहे। रात में ही उन्होंने किसानों से कहा था कि वे अपने-अपने घरों को चले जाएं लेकिन कोई भी किसान घर के लिए नहीं गया। राकेश टिकैत ने यह भी कहा था कि वह सोमवार को सुबह अगले आंदोलन के विषय में बताएंगे, लेकिन किसानों ने कह दिया कि वह तभी सड़क से हटेंगे जब किसानों को रौंदने के आरोप से घिरे मंत्री के बेटे पर कार्रवाई हो जाए। किसानों के तेवर तीखे थे और कई किसानों ने बताया कि रात 11 बजे जब से उन्होंने मौत का वह मंजर सुना तब से दोषियों पर कार्रवाई के लिए वह डटे हुए हैं।
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मेरे सामने हुई लवप्रीत की मौत
जब हमारे किसानों को कार से कुचला गया उस वक्त मैं और किसान नेता तजिंद्र सिंह बिर्क अपनी-अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ रहे थे। क्योंकि मंत्री का रूट प्रशासन ने डायवर्ट कर दिया था। इसलिए  काले झंडे दिखाने का कार्यक्रम लगभग समाप्त होने की ओर था, लेकिन सत्ता के नशे में चूर नेताओं की दो गाड़ियां अचानक आईं और सड़क के किनारे पर खड़े किसानों को कुचलती हुई आगे बढ़ती चलीं। जो असंतुलित होकर पलट गईं।
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मेरे साथ मौजूद बिर्क को भी जबरदस्त टक्कर लगी। वे गिर गए। कई और किसान भी घायल हुए। लवप्रीत सिंह की मौत मेरे सामने ही हुई। वह अपनी दो बहनों का अकेला भाई था। जब मैंने तिकुनिया से लौटकर रात 11 बजे पूरनपुर में किसानों को यह मंजर सुनाया तो अधिकतर की आंखें नम हो गईं। गुस्से के आंसू निकल पकड़े। किसानों का कहना था कि मंत्री और उसके बेटे पर कार्रवाई की जाए। किसानों ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक हम घर नहीं लौटेंगे।   
- मनप्रीत सिंह, जिलाध्यक्ष, अन्नदाता किसान यूनियन

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