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जब बाजार में थाली बजाकर भीड़ इकट्ठी करनी पड़ी

Wed, 12 Jan 2022 12:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jan 2022 12:33 AM IST
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When a crowd had to be gathered by playing a plate in the market
लखीमपुर खीरी। आजादी के बाद पहला विधानसभा चुनाव 1952 में हुआ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमाल अहमद रिजवी मोहम्मदी ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। उस समय चुनाव खर्च की सीमा मात्र पांच हजार हुआ करती थी लेकिन वह भी खर्च करना मुश्किल हो जाता था। नेताओं में दिखावे की प्रवृत्ति नहीं थी। न गाड़ियों का लाव लश्कर होता था, न ही लाउडस्पीकरों का शोर गुल। एक बार प्रचार के दौरान थाली बजाकर भीड़ जुटाई गई।
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दिवंगत कमाल अहमद रिजवी के नजदीकी रहे रवि प्रताप सिंह ने बताया कि उनके पहले चुनाव में कई ऐसे रोचक प्रसंग जुड़े हैं जिन्हें सुनकर हंसी भी आती है और आश्चर्य भी होता है। बताया कि कमाल अहमद रिजवी अक्सर चुनाव के उन दिलचस्प प्रसंगों का जिक्र किया करते थे। जिसे सुनकर लोग हंसते हंसते लोटपोट हो जाते थे। उन्होंने एक बार बताया कि जब वह मोहम्मदी ईस्ट से विधानसभा का पहला चुनाव लड़ रहे थे तो कांग्रेस पार्टी ने क्षेत्र का दौरा करने के लिए उन्हें एक पुरानी जीप दी थी। इसमें हेड लाइट तक नहीं थी। रात में गाड़ी चलाने में काफी दिक्कत होती थी। समस्या से निपटने के लिए उन्होंने छह सेल की एक टार्च खरीदी। रात के समय जब गाड़ी लेकर निकलते तो एक व्यक्ति टार्च की रोशनी से रास्ता दिखाता रहता था।
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उन दिनों लाउडस्पीकर भी बहुत कम थे। उनके पास लाउडस्पीकर नहीं था। बताया कि टिन का भोंपू बनाकर उससे प्रचार करते थे। बिना लाउडस्पीकर भीड़ जुटाने और अपनी बात कहने में दिक्कत आती थी। लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जोर-जोर से चिल्लाना पड़ता था। एक बार गणेशपुर गांव की साप्ताहिक बाजार में कमाल अहमद रिजवी चुनाव प्रचार करने के लिए पहुंचे। जीप बाजार के बाहर खड़ी कर दी। इससे उनके आने की बात कोई नहीं जान पाया। उनके एक साथी मैकूलाल बाजार से तुरंत एक थाली और करछुल खरीद लाए और एक जगह खड़े होकर उसे बजाने लगे। देखते ही देखते वहां भीड़ इकट्ठा हो गई। उन्होंने अपनी बात कही और आगे बढ़ गए। यह थाली और करछुल पूरे चुनाव भर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने का माध्यम बनी रही।
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रवि प्रताप सिंह ने बताया कि एक बार कमाल अहमद रिजवी ने बेहद रोचक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि इस चुनाव के दौरान एक मजेदार वाकया हुआ। चुनाव प्रचार करते हुए वह मढ़िया गांव पहुंचे जहां रात हो जाने के कारण रात बिताने के लिए सीताराम के यहां ठहर गए। उनके सोने की व्यवस्था जहां की गई थी उसी जगह कुछ दूरी पर गाय बंधी थी। रात में वह सो रहे थे उसी समय गाय पास में आ गई और गोबर कर दिया। गोबर का कुछ हिस्सा उनके चेहरे पर भी पड़ा। नींद खुली तो सारा माजरा समझ में आते ही बडी हंसी आई और अपनी बेचारगी पर तरस भी।

तीन बार विधायक रहे कमाल अहमद, 98 साल की उम्र में हुआ था निधन
रवि प्रताप सिंह कहते हैं कि उन दिनों चुनाव में कोई भी उम्मीदवार एक दूसरे पर व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करता था। दलगत आलोचनाएं जरूर होती थीं। कमाल अहमद रिजवी ने उन्हें बताया था कि उस चुनाव में वह 29000 वोट पाकर जीते थे। दूसरे नंबर जनसंघ के राम स्वरूप मिश्रा रहे थे। उन्हें मात्र 3000 वोट मिले थे। वह चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले अपने प्रतिद्वंद्वियों के पास आशीर्वाद लेने गए। उन्होंने उन्हें खुले दिल से बधाई और आशीर्वाद दिया। तीन बार विधायक और 21 साल तक जिला परिषद अध्यक्ष और 28 साल तक जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे कमाल अहमद रिजवी का 98 साल की उम्र में निधन हुआ। राजनीति के बनते बिगड़ते स्वरूप को उन्होंने बहुत ही नजदीक से देखा था।
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