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Lakhimpur Kheri News: मौनी अमावस्या पर संगम में नहाने गए अदलीशपुर के तीरथराम मौर्य लापता
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तीरथ राम मौर्य।
खमरिया। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में स्नान करने गए थाना ईसानगर के गांव अदलीशपुर निवासी तीरथराम मौर्य लापता हो गए हैं। साथ गए लोग उन्हें तलाश कर रहे हैं, पुलिस को भी सूचना दी गई है, पर वह नहीं मिले हैं। इससे उनके घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
गांव अदलीशपुर निवासी तीरथराम अपने साथी कमलेश कुमार, बुद्धा, छन्नू तथा जगदंबा के साथ 27 जनवरी की सुबह ट्रेन से प्रयागराज गए थे। घर वालों का कहना है कि साथ गए लोगों से संपर्क किया तो कमलेश ने बताया कि 28 जनवरी की रात में तीरथराम सब लोगों के साथ ही थे, लेकिन हादसे के बाद कहीं खो गए। पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। तीरथराम के साथी अभी प्रयागराज में ही हैं और उन्हें पुलिस की मदद से खोज रहे हैं।
उधर, तीरथराम के लापता होने से उनके परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। तीरथराम के तीन बच्चे हैं। बड़े लड़के का नाम सर्वेश व छोटे का नाम मुकेश है। एक पुत्री, जिसका नाम गुड़िया है। तीरथ राम मौर्य किसान हैं। उनकी पत्नी का स्वर्गवास तीन वर्ष पहले हो गया था।
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हादसे के समय दहशत और बेचैनी में बीते चार घंटे
- अध्यापक राजेश बोले- सायरन बजाती दर्जनों एंबुलेंस के पहुंचने से डर और बढ़ गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
मैलानी। महाकुंभ में हादसे के दिन संगम तट पर परिवार सहित मौजूद मैलानी के अध्यापक राजेश राय ने घर लौटकर बताया कि रात में हादसे के दौरान चार घंटे बेहद दहशत और बेचैनी में बीते। मौके पर सायरन बजाती दर्जनों एंबुलेंस के पहुंचने से डर और बढ़ गया था।
मोहल्ला दामोदरपुर निवासी अध्यापक राजेश राय ने बताया कि पत्नी, माता और अन्य परिजन के साथ वह ट्रेन नंबर 05312 काठगोदाम-झूंसी महाकुंभ स्पेशल से मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए यहां से 27 जनवरी को रवाना होकर 29 को रात एक बजे संगम तट पर डुबकी लगाने पहुंचे। शाही स्नान का समय था। इस कारण भीड़ अत्यधिक थी।
इसी बीच वहां से पांच सौ मीटर की दूरी पर हादसे की खबर फैल गई। कुछ ही देर में घुड़सवार पुलिस सहित अन्य बलों के जवान एंबुलेंस के लिए कॉरीडोर बनाने लगे। सायरन बजाती एंबुलेंस की आवाजाही शुरू हो गई। यह देख हम सब भी दहशत, बेचैनी और घबराहट में आ गए। करीब तीन घंटे तक एंबुलेंस के आने और घायलों को ले जाने का सिलसिला चलता रहा। यह देख घबराहट और बढ़ गई। एंबुलेंस का आवागमन कम होने पर राहत की सांस ली।
बताया कि तड़के चार बजे स्नान करने के बाद वहां से करीब दस किमी पैदल चलकर शाम चार बजे फाफामऊ पहुंचे और बस में बैठ गए। रात बारह बजे बस वहां से निकल सकी। तब जाकर बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे लखनऊ पहुंचे। लखनऊ से गोरखपुर-मैलानी एक्सप्रेस में सवार होकर बृहस्पतिवार को मैलानी पहुंचे।
ऐसा लगा मानो किसी देव दूत ने दिखाई राह
महेवागंज। मानो वहां कोई देवदूत मिल गया हो, जिससे वह सकुशल अपने घर आ सकीं। यह शब्द कुंभ में अपनों से बिछड़ने वाली श्रद्धालु राजकुमारी के हैं।
शारदा नगर के बेलखुर्द गांव निवासी रामजीवन वर्मा ने बताया कि मंगलवार को ढखेरवा से 22 श्रद्धालुओं की एक टोली बस से महाकुंभ मेला गई थी। उसमें माता विजय लक्ष्मी, बड़ी बहन राजकुमारी और उनकी भाभी रेनू भी थीं। सभी के पास नाम पता और मोबाइल नंबर लिखी पर्ची थी। हादसे के दौरान भीड़ के बीच रात में राजकुमारी अपनों से बिछड़ गईं। पर्ची से मदद मिली। ग्राउंड 14 की चौकी पर एनाउंस किया गया। तब परिजन मिल गए।
बताया स्नान कर सभी निकले तो सामान भरा थैला भाभी को थमा दिया। इस बीच मेले में वह फिर भटक गईं। साथ रहे लोगों ने काफी खोजबीन की। इस बार पर्ची साथ न होने से तलाशने में दिक्कत हुई। किसी तरह वह मेले से बाहर निकलीं। इस बीच किसी श्रद्धालु ने उन्हें लखीमपुर की रोडवेज बस में बिठा दिया। देर रात वह घर पहुंचीं। घरवालों को आप बीती बताई। इस पर घरवालों ने साथियों को फोन कर राजकुमारी के सकुशल घर आने की बात बताई। इससे साथ गए लोगों ने राहत की सांस ली। संवाद
माता-पिता से 24 घंटे बाद हो सका संपर्क, ली राहत की सांस
लखीमपुर खीरी। सुआगाड़ा निवासी राजेश अपनी पत्नी गुड्डी देवी व गांव के ही एक बाबाजी चंद्रभाल के साथ ही महाकुंभ में स्नान करने के लिए ट्रेन से गए थे। वह लोग रास्ते में थे, तभी हादसे की जानकारी मिली। किसी के पास मोबाइल नहीं था, जिसकी वजह से उनसे संपर्क नहीं हो सका। बृहस्पतिवार की शाम उन्होंने किसी के मोबाइल नंबर से फोन पर सकुशल होने की जानकारी दी। बताया कि वह लोग सीतापुर आ चुके हैं। राजेश के बेटे शोमिल सिंह ने बताया कि मम्मी-पापा से बात हो गई है। अब चिंता की कोई बात नहीं।
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गांव अदलीशपुर निवासी तीरथराम अपने साथी कमलेश कुमार, बुद्धा, छन्नू तथा जगदंबा के साथ 27 जनवरी की सुबह ट्रेन से प्रयागराज गए थे। घर वालों का कहना है कि साथ गए लोगों से संपर्क किया तो कमलेश ने बताया कि 28 जनवरी की रात में तीरथराम सब लोगों के साथ ही थे, लेकिन हादसे के बाद कहीं खो गए। पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। तीरथराम के साथी अभी प्रयागराज में ही हैं और उन्हें पुलिस की मदद से खोज रहे हैं।
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उधर, तीरथराम के लापता होने से उनके परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। तीरथराम के तीन बच्चे हैं। बड़े लड़के का नाम सर्वेश व छोटे का नाम मुकेश है। एक पुत्री, जिसका नाम गुड़िया है। तीरथ राम मौर्य किसान हैं। उनकी पत्नी का स्वर्गवास तीन वर्ष पहले हो गया था।
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हादसे के समय दहशत और बेचैनी में बीते चार घंटे
- अध्यापक राजेश बोले- सायरन बजाती दर्जनों एंबुलेंस के पहुंचने से डर और बढ़ गया था
संवाद न्यूज एजेंसी
मैलानी। महाकुंभ में हादसे के दिन संगम तट पर परिवार सहित मौजूद मैलानी के अध्यापक राजेश राय ने घर लौटकर बताया कि रात में हादसे के दौरान चार घंटे बेहद दहशत और बेचैनी में बीते। मौके पर सायरन बजाती दर्जनों एंबुलेंस के पहुंचने से डर और बढ़ गया था।
मोहल्ला दामोदरपुर निवासी अध्यापक राजेश राय ने बताया कि पत्नी, माता और अन्य परिजन के साथ वह ट्रेन नंबर 05312 काठगोदाम-झूंसी महाकुंभ स्पेशल से मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए यहां से 27 जनवरी को रवाना होकर 29 को रात एक बजे संगम तट पर डुबकी लगाने पहुंचे। शाही स्नान का समय था। इस कारण भीड़ अत्यधिक थी।
इसी बीच वहां से पांच सौ मीटर की दूरी पर हादसे की खबर फैल गई। कुछ ही देर में घुड़सवार पुलिस सहित अन्य बलों के जवान एंबुलेंस के लिए कॉरीडोर बनाने लगे। सायरन बजाती एंबुलेंस की आवाजाही शुरू हो गई। यह देख हम सब भी दहशत, बेचैनी और घबराहट में आ गए। करीब तीन घंटे तक एंबुलेंस के आने और घायलों को ले जाने का सिलसिला चलता रहा। यह देख घबराहट और बढ़ गई। एंबुलेंस का आवागमन कम होने पर राहत की सांस ली।
बताया कि तड़के चार बजे स्नान करने के बाद वहां से करीब दस किमी पैदल चलकर शाम चार बजे फाफामऊ पहुंचे और बस में बैठ गए। रात बारह बजे बस वहां से निकल सकी। तब जाकर बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे लखनऊ पहुंचे। लखनऊ से गोरखपुर-मैलानी एक्सप्रेस में सवार होकर बृहस्पतिवार को मैलानी पहुंचे।
ऐसा लगा मानो किसी देव दूत ने दिखाई राह
महेवागंज। मानो वहां कोई देवदूत मिल गया हो, जिससे वह सकुशल अपने घर आ सकीं। यह शब्द कुंभ में अपनों से बिछड़ने वाली श्रद्धालु राजकुमारी के हैं।
शारदा नगर के बेलखुर्द गांव निवासी रामजीवन वर्मा ने बताया कि मंगलवार को ढखेरवा से 22 श्रद्धालुओं की एक टोली बस से महाकुंभ मेला गई थी। उसमें माता विजय लक्ष्मी, बड़ी बहन राजकुमारी और उनकी भाभी रेनू भी थीं। सभी के पास नाम पता और मोबाइल नंबर लिखी पर्ची थी। हादसे के दौरान भीड़ के बीच रात में राजकुमारी अपनों से बिछड़ गईं। पर्ची से मदद मिली। ग्राउंड 14 की चौकी पर एनाउंस किया गया। तब परिजन मिल गए।
बताया स्नान कर सभी निकले तो सामान भरा थैला भाभी को थमा दिया। इस बीच मेले में वह फिर भटक गईं। साथ रहे लोगों ने काफी खोजबीन की। इस बार पर्ची साथ न होने से तलाशने में दिक्कत हुई। किसी तरह वह मेले से बाहर निकलीं। इस बीच किसी श्रद्धालु ने उन्हें लखीमपुर की रोडवेज बस में बिठा दिया। देर रात वह घर पहुंचीं। घरवालों को आप बीती बताई। इस पर घरवालों ने साथियों को फोन कर राजकुमारी के सकुशल घर आने की बात बताई। इससे साथ गए लोगों ने राहत की सांस ली। संवाद
माता-पिता से 24 घंटे बाद हो सका संपर्क, ली राहत की सांस
लखीमपुर खीरी। सुआगाड़ा निवासी राजेश अपनी पत्नी गुड्डी देवी व गांव के ही एक बाबाजी चंद्रभाल के साथ ही महाकुंभ में स्नान करने के लिए ट्रेन से गए थे। वह लोग रास्ते में थे, तभी हादसे की जानकारी मिली। किसी के पास मोबाइल नहीं था, जिसकी वजह से उनसे संपर्क नहीं हो सका। बृहस्पतिवार की शाम उन्होंने किसी के मोबाइल नंबर से फोन पर सकुशल होने की जानकारी दी। बताया कि वह लोग सीतापुर आ चुके हैं। राजेश के बेटे शोमिल सिंह ने बताया कि मम्मी-पापा से बात हो गई है। अब चिंता की कोई बात नहीं।

तीरथ राम मौर्य।

तीरथ राम मौर्य।

तीरथ राम मौर्य।