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वाहनों की तेज रफ्तार बनी वन्यजीवों के लिए काल
बांकेगंज/लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 31 Jul 2015 04:52 PM IST
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तराई के जंगलों से होकर निकली सड़कों पर गुजरने वाले वाहनों की तेज रफ्तार वन्यजीवों का काल बन रही है। मानकों और गति सीमा को दरकिनार कर इन सड़कों पर वाहन तेज रफ्तार से फर्राटा भरते नजर आते हैं। इसके चलते आए दिन दुर्लभ वन्यजीव वहनों की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा रहे है। आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल एक-दो बाघ या तेंदुए सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं।
जंगल के रास्तों पर वाहनों को चलाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। जंगल के रास्ते पर वाहनों की गति सीमा तय है। इनका न तो पालन हो रहा है न जिम्मेदार लोग इसकी निगरानी ही कर रहे हैं। चालक रात के सन्नाटे में गति सीमा का पालन किए बिना सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते हैं। इसकी एक वजह रात के समय जंगल से गुजरते समय वाहन चालकों को अपराधियों का डर भी है। इसके कारण वे जंगल का रास्ता जल्दी पार करने की फिराक में वाहनों की रफ्तार तेज रखते हैं।
रात के समय अक्सर जंगल में भोजन की तलाश में निकलने वाले बाघ और तेंदुए अपने शिकार का पीछा करते हुए अनजाने में सड़क पार करते समय इन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर काल के गाल में समा जाते हैं। बुधवार को खुटार रोड पर किसी तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर एक तेंदुए की मौत हो गई थी। इससे पहले पिछले तीन साल में खुटार रोड पर ही तीन बाघों की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। पिछले साल ही भीरा-मैलानी रोड पर एक बाघ की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
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जंगल में वाहन चलाने के ये हैं नियम
-जंगल में वाहनों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो
-वाहनों की हेड लाइट ज्यादा चमकदार और दूर तक रोशनी जाने वाली न हो
-जंगल से गुजरते समय तेज हार्न का प्रयोग न किया जाए।
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इन पर है नियंत्रण की जिम्मेदारी
जंगल के अंदर से गुजरने वाले वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित वन क्षेत्र के रेंज अधिकारियों पर होती है। जंगलों में बने बैरियर पर विभागीय कर्मचारी गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेने के साथ ही वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार से न चलने की हिदायत देते हैं। नियम का पालन न करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है लेकिन इस मामले में किसी वाहन चालक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बैरियर पर जंगल के अंदर वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर के संकेत बोर्ड भी लगाए गए है। बावजूद इसके वाहन स्वामी नियमों की अनदेखी कर जंगल के सुनसान रास्तों पर तेज गति से वाहन चलाने से बाज नहीं आते।
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कोट..
जंगलों से होकर निकलने वाले वाहनों की गति पर नियंत्रण वन विभाग और पुलिस के सहयोग से किया जाता है। जंगल से गुजरने वाले वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। जंगल के बैरियरों पर लगातार निगरानी की जा रही है। बावजूद इसके वाहन स्वामी बैरियर के बाद सुनसान रास्ते में तेज गति से वाहन दौड़ाते है। जिससे जंगल में सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में आकर दुर्लभ वन्यजीवों की मौत हो जाती है। जंगल में निकलने वाले तेज रफ्तार वाहनों की गति नियंत्रण के लिए डीएम और डीएफओ साउथ खीरी के साथ बैठक कर नियम पालन की रणनीति बनाई जाएगी।
-महावीर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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जंगल के रास्तों पर वाहनों को चलाने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। जंगल के रास्ते पर वाहनों की गति सीमा तय है। इनका न तो पालन हो रहा है न जिम्मेदार लोग इसकी निगरानी ही कर रहे हैं। चालक रात के सन्नाटे में गति सीमा का पालन किए बिना सड़कों पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते हैं। इसकी एक वजह रात के समय जंगल से गुजरते समय वाहन चालकों को अपराधियों का डर भी है। इसके कारण वे जंगल का रास्ता जल्दी पार करने की फिराक में वाहनों की रफ्तार तेज रखते हैं।
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रात के समय अक्सर जंगल में भोजन की तलाश में निकलने वाले बाघ और तेंदुए अपने शिकार का पीछा करते हुए अनजाने में सड़क पार करते समय इन तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर काल के गाल में समा जाते हैं। बुधवार को खुटार रोड पर किसी तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर एक तेंदुए की मौत हो गई थी। इससे पहले पिछले तीन साल में खुटार रोड पर ही तीन बाघों की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। पिछले साल ही भीरा-मैलानी रोड पर एक बाघ की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
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जंगल में वाहन चलाने के ये हैं नियम
-जंगल में वाहनों की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक न हो
-वाहनों की हेड लाइट ज्यादा चमकदार और दूर तक रोशनी जाने वाली न हो
-जंगल से गुजरते समय तेज हार्न का प्रयोग न किया जाए।
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इन पर है नियंत्रण की जिम्मेदारी
जंगल के अंदर से गुजरने वाले वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित वन क्षेत्र के रेंज अधिकारियों पर होती है। जंगलों में बने बैरियर पर विभागीय कर्मचारी गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेने के साथ ही वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा से अधिक रफ्तार से न चलने की हिदायत देते हैं। नियम का पालन न करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है लेकिन इस मामले में किसी वाहन चालक पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बैरियर पर जंगल के अंदर वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर के संकेत बोर्ड भी लगाए गए है। बावजूद इसके वाहन स्वामी नियमों की अनदेखी कर जंगल के सुनसान रास्तों पर तेज गति से वाहन चलाने से बाज नहीं आते।
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कोट..
जंगलों से होकर निकलने वाले वाहनों की गति पर नियंत्रण वन विभाग और पुलिस के सहयोग से किया जाता है। जंगल से गुजरने वाले वाहनों की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है। जंगल के बैरियरों पर लगातार निगरानी की जा रही है। बावजूद इसके वाहन स्वामी बैरियर के बाद सुनसान रास्ते में तेज गति से वाहन दौड़ाते है। जिससे जंगल में सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में आकर दुर्लभ वन्यजीवों की मौत हो जाती है। जंगल में निकलने वाले तेज रफ्तार वाहनों की गति नियंत्रण के लिए डीएम और डीएफओ साउथ खीरी के साथ बैठक कर नियम पालन की रणनीति बनाई जाएगी।
-महावीर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क