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Lakhimpur Kheri News: मुफलिसी पर भारी मंजीत के सुरंग से निकलने की खुशी...परिवार ने धूमधाम से मनाई दिवाली

Thu, 30 Nov 2023 12:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Nov 2023 12:39 AM IST
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The happiness of Manjit coming out of the tunnel outweighs the poverty...the family celebrated Diwali with pomp
लखीमपुर खीरी/तिकुनिया/बेलरायां। उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे बेलरायां क्षेत्र के भैरमपुर गांव के मंजीत के मंगलवार को सकुशल बाहर आने के बाद परिवार ने दिवाली मनाई। पिछले 17 दिन से चिंता के बीच खामोशी में डूबे गांव में मंगलवार की रात से खुशी का माहौल है। मंजीत के सुरंग से सकुशल बाहर निकलने पर वहीं मौजूद पिता ने बेटे का माथा चूमा और माला पहनाई, दूसरी तरफ घर पर मां और बहन समेत पूरे परिवार ने आतिशबाजी की। बेटे से वीडियो कॉल पर बात की। बेहद गरीबी में जी रहे चौधरी परिवार के लिए बेटे को देखने के लिए उत्तरकाशी तक का सफर आसान नहीं था। पिता ने बहू के जेवर गिरवी रख उत्तरकाशी का रास्ता तय किया। मगर, जिंदा बचे बेटे की खुशी में मुफलिसी का दर्द फिलहाल अब काफूर है, और गांव में जश्न का माहौल है।
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पिछले 17 दिन से सुरंग में फंसे खीरी के मंजीत समेत 41 मजदूरों के निकलने से पूरा देश खुश है। इधर, खीरी के जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर स्थित निघासन तहसील के भैरमपुर गांव के बेहद गरीब परिवार के मंजीत तक पिता चौधरी के पहुंचने का सफर आसान नहीं था। एक तो बड़ा बेटा दीपू मुंबई में एक हादसे में जान गंवा बेटा था और दूसरा बेटा 17 दिन से सुरंग में फंसा था, ऊपर से घर में एक फूटी कौड़ी तक नहीं थी। उत्तरकाशी तक जाने का इंतजाम कैसे हो, यह सबसे बड़ा सवाल था। ऐसे में पिता ने फैसला लिया कि बहू के जेवर जो उनके पास रखे हैं कि उन्हें गिरवी रखेंगे और बेटे को लेने जाएंगे। पिता ने दस हजार रुपये में जेवर गिरवी रखे। एक हजार पत्नी को दिए ताकि उनकी गैरमौजूदगी में खाना खर्च चलता रहे। इसके बाद अपने छोटे भाई के साथ उत्तरकाशी का रुख किया। गरीबी का आलम यह है कि पास में एक अदद फोन भी नहीं कि जिससे अपने लाडले मंजीत के कुशलक्षेम का समाचार वह हर दिन अपनी पत्नी और परिजनों से साझा कर सकें। पड़ोसी रोजाना बात करा रहे थे।
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आखिरकार 17 दिन बाद मंगलवार का वह मंगल दिन आया और मंजीत अपने अन्य 40 मजदूर साथियों के साथ टनल से बाहर आया। अमर उजाला से बातचीत में मंजीत की मां ने बताया कि पिता ने पुत्र काे माला पहनाकर और माथा चूमकर दूसरा जन्म मानते हुए स्वागत किया।
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पैसों की किसे चिंता... बेटा ही असली धन

पहले खुद के जेवर गिरवी रख मंजीत को कमाने के लिए भेजना और फिर सुरंग मेंं फंसने पर बहू के जेवर गिरवी रखकर मिले पैसे से पिता के उत्तरकाशी जाने पर मंजीत की मां को कोई अफसोस नहीं है। वह कहती हैं कि गिरवी सामान व पैसों से उन्हें मोह नहीं है। हमारा बेटा असली धन है।



एसडीएम को बताया दर्द... अब तक नहीं मिला न्याय

बुधवार एसडीएम अश्वनी कुमार से मंजीत की मां चौधराइन से मिलने पहुंचे। बताया कि आपका बेटा शुक्रवार को घर आ जाएगा। इस पर खुशी जताते हुए चौधराइन ने शिकायत भी की। कहा कि उनके बड़े बेटे दीपू की मौत की न्यायिक जांच अभी भी चल रही है। हमें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने एसडीएम को दीपू की मौत के बाद हो रही जांच से जुड़े कागज भी सौंपे। एसडीएम को बताया कि वह प्राथमिक विद्यालय में रसोइया का काम कर रही हैं। उसी से परिवार का गुजर बसर हो रहा है।





घर अइये हमारा बाबू, कढ़ी-रोटी खिलइये
बेटे के घर आने की सूचना से पूरा परिवार खुश है और बेटे के स्वागत की तैयारियां कर रहा है। अमर उजाला से बात करते हुए मंजीत की मां ने कहा कि हमारे बाबू को कढ़ी-रोटी बहुत पसंद है। घर अइये हम इंतजार कर रहे हैं, बाबू को कढ़ी-रोटी खिलइये। उसे पकौड़ी बहुत पसंद है। हम बनइये उसके लिए। उसे लै जाइ के पहले ब्रह्म देव बाबा के दर्शन करइये और कथा सुनिए। ऊके बाद काली मंदिर पर पूजा करिए।





सरकार हमारा भगवान, उन्हें खूब दुआ

मंजीत की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार हमारी भगवान हो गई। हमारे बेटे को बचा लिया। हमें भूखे नहीं सोने दिया। आगे कहा कि हम सरकार मदद मांगेगे। सरकार से पैसा लेकर भंडारा कराएंगे। हमारे पास न खेती न कुछ, सरकार से नहीं मांगेंगे तो किससे मांगेंगे। घर में माैजूद मंजीत के मामा गगन चौहान ने बताया कि यह बड़ी उपलब्धि है। अगर सरकार इतनी तत्परता से कदम ना उठाती, तो शायद उनका भांजा बाहर नहीं आ पाता।






मंजीत के स्कूल से घर पहुंचे बच्चों ने परिजनों का बढ़ाया हौसला

मंजीत गांव के जिस पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पहले पढ़ाई कर चुका था। वहां के बच्चे बुधवार मंजीत के घर पहुंचे और परिजनों का हौसला बढ़ाया। शिक्षक ने ग्रामीण और परिजनों के साथ राष्ट्रगान गाया।




परिवार समेत जनप्रतिनिधियों को मंजीत के आने का इंतजार

मंगलवार को मंजीत के टनल से बाहर निकलने की सुखद खबर के बाद बुधवार को कोई भी जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। सबको इंतजार है मंजीत के वापस आने का। हालांकि, प्रभारी डीएम और सीडीओ अनिल कुमार सिंह के निर्देश पर निघासन एसडीएम अश्विनी कुमार मौके पर पहुंचे और परिवार को मिलने वाली सरकारी योजनाओं की पात्रता की जांच की। एसडीएम ने बताया कि परिवार का राशन कार्ड बना हुआ है। दादा के नाम पर 0.23 हेक्टेयर जमीन है। पीएम आवास का लाभ पहले ही मिल चुका है।
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