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अब तक जमा हुए साढ़े तीन सौ करोड़ के ज्यादा पुराने नोट
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 13 Nov 2016 12:02 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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- नोट बदलने को लेकर शनिवार को भी रही अफरातफरी
- सौ, पचास और छोटे नोटों की किल्लत से परेशान रहे लोग
- सर्राफा बाजार बंद, दूसरे बाजारों में पसरा सन्नाटा
व्यापार ठप, छोटे-बड़े लेनदेन ठप, घरेलू कामकाज ठप न रोजी रोजगार की चिंता, बस चिंता है तो एक हजार और पांच सौ के नोट बदलने और खातों में जमा करने की। सौ-पचास के नोटों को हासिल करने की होड़ में बैंकों के काउंटरों और शहर में इक्का दुक्का खुले एटीएम के सामने लगी लंबी-लंबी कतारों में पूरा शहर उमड़ आया। गली मोहल्लों और बाजार में हर तरफ सिर्फ नोटों की ही चर्चा थी। इन चर्चाओं के बीच तरह-तरह की अफवाहों का भी बाजार गर्म रहा।
लीड बैंक मैनेजर एके द्विवेदी के मुताबिक पिछले तीन दिनों में जिले के अंदर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये मूल्य की एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों की पुरानी करेंसी जमा हुई है। इन तीन दिनों में सबसे ज्यादा धनराशि शुक्रवार को हुई है। उनका कहना है कि पांच और दो हजार के नए नोटों के अलावा छोटी करेंसी की कमी होने के कारण कुछ दिक्कत सामने आ रही है।
माह का दूसरा शनिवार होने के बावजूद भी बैंक और डाकघर खुले। शनिवार को भी बैंकों में गुरुवार और शुक्रवार से कम भीड़ नहीं थी। स्टेट बैंक में तो बैंक के बाहर तक लंबी कतारें लगी देखी गईं। अंदर का हाल खचाखच भरा हुआ था। शनिवार को नोट खातों में जमा करने वाले लोगों की अपेक्षा बदलने वाले और खातों से पैसा निकालने वाले लोगों की भीड़ ज्यादा थी।
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दूसरी बैंकों का भी कुछ यही हाल था। छोटी करेंसी की कमी के चलते लोगों को धन निकासी में दिक्कतें हुई। करेंसी की कमी के चलते एटीएम में पैसा नहीं लोड किया जा सका। बैंकों से लोगों को जरूरत के मुताबिक धन नहीं मिल सका इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए। बाजार में तीन दिनों से सन्नाटा पसरा नजर आया।
बाजार में सन्नाटा, सर्राफ की दुकानें बंद
करेंसी की कमी से बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। बाजार में दुकानें खुली जरूर हैं, लेकिन खरीदार नदारद हैं। इलेक्ट्रानिक्स के एक दुकानदार ने बताया कि तीन दिनों से वह एक रुपया का सामान तक नहीं बेंच पाए हैं। उधर मुंबई और बड़े शहरों में सर्राफा दुकानों पर छापे पड़ने से दहशत में आए सर्राफा व्यावसाइयों ने दो दिनों से अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले हैं। आज भी सर्राफा बाजार बंद रहा।
एक घंटे में खाली हुए एटीएमए बैंकों में नहीं करेंसी
पलियाकलां। एक हजार और पांच सौ के नोटों के बंद होने के बाद अब दुश्वारियां पैदा होने लगी हैं। बैंकों के एटीएम महज एक घंटे के भीतर खाली हो गए हैं तो बैंकों में करेंसी न होने से लोगों को रोजमर्रा के खर्च में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि बैंक बस जमा करने में लगे हुए हैं। इससे त्राहि-त्राहि मची हुई है और सुनने वाला कोई नहीं है। इलाहाबाद बैंक ने अपने एटीएम की शुरूआत शुक्रवार की शाम को की, लेकिन महज एक घंटे के भीतर ही उसमें रखा कैश खत्म हो गया। जिसको कैश मिल गया उसकी स्थिति किसी जंग जीत लेने से कम नहीं थी। शनिवार को एचडीएफसी बैंक ने एटीएम सेवा शुरू की लेकिन महज एक घंटे की भीतर ही यहां कैश खत्म हो गया और यहां लगी लंबी लाइनों में लोगों को वापस मायूसी के साथ जाना पड़ा। जिला सहकारी बैंक को छोड़ अन्य बैंकों में काम हो रहा है तो बस सिर्फ जमा करने का।
बैंक में भुगतान न होने से ग्रामीणों को परेशानी
उचौलिया। पांच सौ, एक हजार के नोट बंद होने के बाद लोगों के पास मौजूद नोट किसी काम के न होने और तीसरे दिन भी बैंकों से भुगतान न होने से ग्रामीणों के जरूरी काम रुक गये हैं। कस्बे में कोई एटीएम नहीं है जिससे लोग परेशान हैं। जिला सहकारी बैंक और इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से शनिवार को तीसरे दिन भी भुगतान न किए जाने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक में रुपये निकालने वालों को करेंसी न होने का बहाना बनाकर टरकाया जा रहा है। कई घरों में शादी की तैयारियों पर असर पड़ा है।
तीसरे दिन भी बैंकों में रही भारी भीड़
खमरिया। क्षेत्र के बैंक और डाकघरों में तीसरे दिन भी 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने को भारी भीड़ लगी रही। बैंकों में अभी नए नोटों और 100 रुपये से छोटे नोट उपलब्ध न होने से पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा। यहां कैश जमा तो किया गया, लेकिन पुराने नोट बदलने अथवा खाते से निकालने की सुविधा नहीं दी गई। डाकघर ऐरा के पोस्ट मास्टर राजकुमार सिंह ने बताया हमारे पास नोट बदलने का कोई आदेश नहीं है। इसी तरह जिला सहकारी बैंक, इलाहाबाद यूपी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक ईसानगर और रुद्रपुर आदि क्षेत्र की सभी बैंक शाखाओं और डाकघरों में प्रबंधकों ने कैश उपलब्ध न होने बहाना बना कर ग्राहकों को टरकाते रहे। आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरा दिन नोट बदलने की जद्दोजहद में लगे रहे।
तीसरे दिन भी नोट बदलने को लगी रही लाइनें
ओयल। तीसरे दिन भी बैंकों के सामने पुराने नोटों से छुटकारा पाने की जद्दोजहद जारी रही। बैंक शाखाओं में बदलने और जमा करने को लाइनें लगी रहीं। सुबह से देर शाम तक बैंकों का काम जारी रहा।
पुराने नोटों से छुटकारा पाने को अफरातफरी
तिकुनियां। कस्बे की राष्ट्रीय बैंकों में पांच सौै और एक हजार रुपये के नोटों को बैंक में जमा करने को लेकर लोगों में अफरातफरी मची रही। यहां बैंकों में रसूखदार लोगों का काम पहले हो रहा है, बाद में अन्य उपभोक्ताओं को करेंसी न होना बताकर लौटा दिया जाता है। जिससे लोगों में निराशा बनी है। कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक में ग्राहकों के नोटों की जमा निकासी का काम काफी धीमी गति से किया जा रहा है जहां पर लोग परेशान हैं। सेंट्रल बैंक भारतीय स्टेट बैंक में लंबी लाइन नोट जमा करने वालों की लगने से रास्ता जाम हो गया।
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- सौ, पचास और छोटे नोटों की किल्लत से परेशान रहे लोग
- सर्राफा बाजार बंद, दूसरे बाजारों में पसरा सन्नाटा
व्यापार ठप, छोटे-बड़े लेनदेन ठप, घरेलू कामकाज ठप न रोजी रोजगार की चिंता, बस चिंता है तो एक हजार और पांच सौ के नोट बदलने और खातों में जमा करने की। सौ-पचास के नोटों को हासिल करने की होड़ में बैंकों के काउंटरों और शहर में इक्का दुक्का खुले एटीएम के सामने लगी लंबी-लंबी कतारों में पूरा शहर उमड़ आया। गली मोहल्लों और बाजार में हर तरफ सिर्फ नोटों की ही चर्चा थी। इन चर्चाओं के बीच तरह-तरह की अफवाहों का भी बाजार गर्म रहा।
लीड बैंक मैनेजर एके द्विवेदी के मुताबिक पिछले तीन दिनों में जिले के अंदर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये मूल्य की एक हजार और पांच सौ रुपये के नोटों की पुरानी करेंसी जमा हुई है। इन तीन दिनों में सबसे ज्यादा धनराशि शुक्रवार को हुई है। उनका कहना है कि पांच और दो हजार के नए नोटों के अलावा छोटी करेंसी की कमी होने के कारण कुछ दिक्कत सामने आ रही है।
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माह का दूसरा शनिवार होने के बावजूद भी बैंक और डाकघर खुले। शनिवार को भी बैंकों में गुरुवार और शुक्रवार से कम भीड़ नहीं थी। स्टेट बैंक में तो बैंक के बाहर तक लंबी कतारें लगी देखी गईं। अंदर का हाल खचाखच भरा हुआ था। शनिवार को नोट खातों में जमा करने वाले लोगों की अपेक्षा बदलने वाले और खातों से पैसा निकालने वाले लोगों की भीड़ ज्यादा थी।
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दूसरी बैंकों का भी कुछ यही हाल था। छोटी करेंसी की कमी के चलते लोगों को धन निकासी में दिक्कतें हुई। करेंसी की कमी के चलते एटीएम में पैसा नहीं लोड किया जा सका। बैंकों से लोगों को जरूरत के मुताबिक धन नहीं मिल सका इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए। बाजार में तीन दिनों से सन्नाटा पसरा नजर आया।
बाजार में सन्नाटा, सर्राफ की दुकानें बंद
करेंसी की कमी से बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है। बाजार में दुकानें खुली जरूर हैं, लेकिन खरीदार नदारद हैं। इलेक्ट्रानिक्स के एक दुकानदार ने बताया कि तीन दिनों से वह एक रुपया का सामान तक नहीं बेंच पाए हैं। उधर मुंबई और बड़े शहरों में सर्राफा दुकानों पर छापे पड़ने से दहशत में आए सर्राफा व्यावसाइयों ने दो दिनों से अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले हैं। आज भी सर्राफा बाजार बंद रहा।
एक घंटे में खाली हुए एटीएमए बैंकों में नहीं करेंसी
पलियाकलां। एक हजार और पांच सौ के नोटों के बंद होने के बाद अब दुश्वारियां पैदा होने लगी हैं। बैंकों के एटीएम महज एक घंटे के भीतर खाली हो गए हैं तो बैंकों में करेंसी न होने से लोगों को रोजमर्रा के खर्च में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि बैंक बस जमा करने में लगे हुए हैं। इससे त्राहि-त्राहि मची हुई है और सुनने वाला कोई नहीं है। इलाहाबाद बैंक ने अपने एटीएम की शुरूआत शुक्रवार की शाम को की, लेकिन महज एक घंटे के भीतर ही उसमें रखा कैश खत्म हो गया। जिसको कैश मिल गया उसकी स्थिति किसी जंग जीत लेने से कम नहीं थी। शनिवार को एचडीएफसी बैंक ने एटीएम सेवा शुरू की लेकिन महज एक घंटे की भीतर ही यहां कैश खत्म हो गया और यहां लगी लंबी लाइनों में लोगों को वापस मायूसी के साथ जाना पड़ा। जिला सहकारी बैंक को छोड़ अन्य बैंकों में काम हो रहा है तो बस सिर्फ जमा करने का।
बैंक में भुगतान न होने से ग्रामीणों को परेशानी
उचौलिया। पांच सौ, एक हजार के नोट बंद होने के बाद लोगों के पास मौजूद नोट किसी काम के न होने और तीसरे दिन भी बैंकों से भुगतान न होने से ग्रामीणों के जरूरी काम रुक गये हैं। कस्बे में कोई एटीएम नहीं है जिससे लोग परेशान हैं। जिला सहकारी बैंक और इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से शनिवार को तीसरे दिन भी भुगतान न किए जाने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक में रुपये निकालने वालों को करेंसी न होने का बहाना बनाकर टरकाया जा रहा है। कई घरों में शादी की तैयारियों पर असर पड़ा है।
तीसरे दिन भी बैंकों में रही भारी भीड़
खमरिया। क्षेत्र के बैंक और डाकघरों में तीसरे दिन भी 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने को भारी भीड़ लगी रही। बैंकों में अभी नए नोटों और 100 रुपये से छोटे नोट उपलब्ध न होने से पूरे दिन अफरातफरी का माहौल रहा। यहां कैश जमा तो किया गया, लेकिन पुराने नोट बदलने अथवा खाते से निकालने की सुविधा नहीं दी गई। डाकघर ऐरा के पोस्ट मास्टर राजकुमार सिंह ने बताया हमारे पास नोट बदलने का कोई आदेश नहीं है। इसी तरह जिला सहकारी बैंक, इलाहाबाद यूपी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक ईसानगर और रुद्रपुर आदि क्षेत्र की सभी बैंक शाखाओं और डाकघरों में प्रबंधकों ने कैश उपलब्ध न होने बहाना बना कर ग्राहकों को टरकाते रहे। आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरा दिन नोट बदलने की जद्दोजहद में लगे रहे।
तीसरे दिन भी नोट बदलने को लगी रही लाइनें
ओयल। तीसरे दिन भी बैंकों के सामने पुराने नोटों से छुटकारा पाने की जद्दोजहद जारी रही। बैंक शाखाओं में बदलने और जमा करने को लाइनें लगी रहीं। सुबह से देर शाम तक बैंकों का काम जारी रहा।
पुराने नोटों से छुटकारा पाने को अफरातफरी
तिकुनियां। कस्बे की राष्ट्रीय बैंकों में पांच सौै और एक हजार रुपये के नोटों को बैंक में जमा करने को लेकर लोगों में अफरातफरी मची रही। यहां बैंकों में रसूखदार लोगों का काम पहले हो रहा है, बाद में अन्य उपभोक्ताओं को करेंसी न होना बताकर लौटा दिया जाता है। जिससे लोगों में निराशा बनी है। कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक में ग्राहकों के नोटों की जमा निकासी का काम काफी धीमी गति से किया जा रहा है जहां पर लोग परेशान हैं। सेंट्रल बैंक भारतीय स्टेट बैंक में लंबी लाइन नोट जमा करने वालों की लगने से रास्ता जाम हो गया।