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दीपावली पर गल्ला व्यापारियों व राइस मिलर्स की चांदी
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आढ़तियों के यहां धान के ढेर।
क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों को धान बेचकर किसानों ने की त्योहार मनाने की जुगाड़
लखीमपुर खीरी। दिवाली पर गल्ला व्यापारियों और राइस मिलर्स की भी चांदी रही। कारण, किसानों ने नकद लेने के लिए अपना धान इन्हें बेचा। किसानों का कहना था कि केंद्र प्रभारी धान को देखकर कई कमियां निकालते हैं, वहीं रुपये भी महीनों में मिल पाते हैं। वहीं व्यापारियों को धान बेचने से उनकी दिवाली आसानी से बन जाएगी।
बताते चलें कि खरीफ सीजन 2022-23 में जनपद में सरकारी धान खरीद एक अक्तूबर से प्रारंभ हो चुकी है। किसानों का धान खरीदने के लिए कुल 154 क्रय केंद्र, जिसमें क्रय एजेंसी मार्केटिंग के 28, पीसीएफ के 62, पीसीयू के 49, यूपीएसएस के 11, एफसीआई के चार क्रय केंद्र खोले गए हैं।
राजापुर मंडी में कुल 23 क्रय केंद्र खोले गए हैं। 22 दिनों में सिर्फ दस क्रय केंद्रों पर 53 किसानों से 499.98 मीट्रिक टन धान खरीदकर खाता खोला गया है। धान खरीद करने वाले क्रय केंद्रों में क्रय एजेंसियों मार्केटिंग के सात और पीसीयू के तीन केंद्र शामिल हैं, जबकि पीसीएफ, यूपीएसएस, एफसीआई के केंद्रों पर अब तक धान खरीद शुरू नहीं की गई है।
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क्रय केंद्रों के हालात यह हैं कि इनमें केंद्र प्रभारी ज्यादातर समय नदारद रहते हैं। इससे केंद्र पर आने वाले किसान खाली हाथ लौटते हैं, जिससे उन्हें मजबूरन मंडी में आढ़तियों के पास धान बेचना पड़ता है।
छह मंडियों में हो चुकी है 6174.6 मीट्रिक टन धान की आवक
जनपद की छह मंडियों लखीमपुर, गोला, पलिया कलां, मोहम्मदी, मैगलगंज, तिकुनिया में अब तक कुल 6174.6 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। वहीं राइस मिलर्स द्वारा सीधे अपनी मिलों पर किसानों से धान खरीदा जा रहा है, जिसके आंकड़े मंडी के पास उपलब्ध नहीं हैं। मंडी के जानकार बताते हैं कि करीब एक हजार मीट्रिक टन धान राइस मिलर्स खरीद चुके हैं। हालांकि पिछले वर्ष राइस मिलर्स की खरीद पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इस बार कोई रोक नहीं है। लखीमपुर की राजापुर मंडी में सबसे अधिक 2567.4 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है, जहां पर 23 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनमें से दो क्रय केंद्रों पर ही खरीद हुई है। इससे स्पष्ट है कि ज्यादातर धान की आवक को व्यापारियों ने खरीदा है।
ऐसे तो मिलने से रहा किसानों को एमएसपी का लाभ
इस बार दिवाली मनाने के लिए किसानों ने क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों के हाथ धान बेचना मुनासिब समझा, क्योंकि व्यापारी से नकद रुपये मिल जाते हैं। वहीं क्रय केंद्रों से भुगतान मिलने में महीनों लगते हैं। किसानों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए व्यापारियों ने एमएसपी 2040 के मुकाबले 1300 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा है। इससे किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद होने लगी है। अब तक 14 केंद्रों पर धान खरीदा गया है, जिसमें चार केंद्रों पर शनिवार को खरीद हुई है। अभी धान में नमी और डैमेज की मात्रा मानक से ज्यादा होने के कारण खरीद धीमी है। दिवाली के बाद अच्छी गुणवत्ता का धान आने लगेगा, जिससे क्रय केंद्रों पर धान खरीद में तेजी आएगी।
- संतोष कुमार पटेल, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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लखीमपुर खीरी। दिवाली पर गल्ला व्यापारियों और राइस मिलर्स की भी चांदी रही। कारण, किसानों ने नकद लेने के लिए अपना धान इन्हें बेचा। किसानों का कहना था कि केंद्र प्रभारी धान को देखकर कई कमियां निकालते हैं, वहीं रुपये भी महीनों में मिल पाते हैं। वहीं व्यापारियों को धान बेचने से उनकी दिवाली आसानी से बन जाएगी।
बताते चलें कि खरीफ सीजन 2022-23 में जनपद में सरकारी धान खरीद एक अक्तूबर से प्रारंभ हो चुकी है। किसानों का धान खरीदने के लिए कुल 154 क्रय केंद्र, जिसमें क्रय एजेंसी मार्केटिंग के 28, पीसीएफ के 62, पीसीयू के 49, यूपीएसएस के 11, एफसीआई के चार क्रय केंद्र खोले गए हैं।
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राजापुर मंडी में कुल 23 क्रय केंद्र खोले गए हैं। 22 दिनों में सिर्फ दस क्रय केंद्रों पर 53 किसानों से 499.98 मीट्रिक टन धान खरीदकर खाता खोला गया है। धान खरीद करने वाले क्रय केंद्रों में क्रय एजेंसियों मार्केटिंग के सात और पीसीयू के तीन केंद्र शामिल हैं, जबकि पीसीएफ, यूपीएसएस, एफसीआई के केंद्रों पर अब तक धान खरीद शुरू नहीं की गई है।
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क्रय केंद्रों के हालात यह हैं कि इनमें केंद्र प्रभारी ज्यादातर समय नदारद रहते हैं। इससे केंद्र पर आने वाले किसान खाली हाथ लौटते हैं, जिससे उन्हें मजबूरन मंडी में आढ़तियों के पास धान बेचना पड़ता है।
छह मंडियों में हो चुकी है 6174.6 मीट्रिक टन धान की आवक
जनपद की छह मंडियों लखीमपुर, गोला, पलिया कलां, मोहम्मदी, मैगलगंज, तिकुनिया में अब तक कुल 6174.6 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। वहीं राइस मिलर्स द्वारा सीधे अपनी मिलों पर किसानों से धान खरीदा जा रहा है, जिसके आंकड़े मंडी के पास उपलब्ध नहीं हैं। मंडी के जानकार बताते हैं कि करीब एक हजार मीट्रिक टन धान राइस मिलर्स खरीद चुके हैं। हालांकि पिछले वर्ष राइस मिलर्स की खरीद पर रोक लगाई गई थी, लेकिन इस बार कोई रोक नहीं है। लखीमपुर की राजापुर मंडी में सबसे अधिक 2567.4 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है, जहां पर 23 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनमें से दो क्रय केंद्रों पर ही खरीद हुई है। इससे स्पष्ट है कि ज्यादातर धान की आवक को व्यापारियों ने खरीदा है।
ऐसे तो मिलने से रहा किसानों को एमएसपी का लाभ
इस बार दिवाली मनाने के लिए किसानों ने क्रय केंद्रों के बजाय व्यापारियों के हाथ धान बेचना मुनासिब समझा, क्योंकि व्यापारी से नकद रुपये मिल जाते हैं। वहीं क्रय केंद्रों से भुगतान मिलने में महीनों लगते हैं। किसानों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए व्यापारियों ने एमएसपी 2040 के मुकाबले 1300 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा है। इससे किसानों को सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद होने लगी है। अब तक 14 केंद्रों पर धान खरीदा गया है, जिसमें चार केंद्रों पर शनिवार को खरीद हुई है। अभी धान में नमी और डैमेज की मात्रा मानक से ज्यादा होने के कारण खरीद धीमी है। दिवाली के बाद अच्छी गुणवत्ता का धान आने लगेगा, जिससे क्रय केंद्रों पर धान खरीद में तेजी आएगी।
- संतोष कुमार पटेल, जिला खाद्य विपणन अधिकारी