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Mahashivratri: 'छोटी काशी' में भव्य रूप से होता है शिव-पार्वती विवाह, महाशिवरात्रि पर जुटेंगे हजारों भक्त

Sat, 14 Feb 2026 09:24 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 14 Feb 2026 09:24 AM IST
सार

महाशिवरात्रि पर छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी। यहां स्थित पौराणिक शिव मंदिर में भगवान शिव और पार्वती का विवाह भव्य रूप से होता है। यह परंपरा वर्षों से चली जा रही है। इसके चलते इस बार भी महाशिवरात्रि के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। 

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Shiva-Parvati Vivah takes place at Gola Gokarnanath on MahaShivratri
गोला गोकर्णनाथ - फोटो : instagram

विस्तार

लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में महाशिवरात्रि का पर्व भव्य रूप में मनाया जाता रहा है। यहां स्थित पौराणिक शिव मंदिर में पूरी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह समारोह, पूजन और श्रृंगार का क्रम चलता है। महाशिवरात्रि का महाव्रत साधक को सुख समृद्धि प्रदाता और समस्त दुख नाशक है। गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी भी कहा जाता है।

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पौराणिक शिव मंदिर के पुजारी दिनेश चंद्र मिश्र ने बताया कि पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मान्यता है कि यदि कोई भक्त महाशिवरात्रि की रात जागकर भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति और उनके लिए जागरण करता है तो वह मनवांछित फल प्राप्त करता है। इस व्रत को रखने से साधक के समस्त दुख और पीड़ाओं का अंत हो जाता है। मन वांछित मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। धन-धान्य, सुख, सौभाग्य, समृद्धि, संतान, दीर्घायु, यश, विद्या और निरोगी काया प्राप्त होती है।
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वर्षों से होता आ रहा है शिव और माता पार्वती का विवाह समारोह
गोला के पौराणिक शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह का भव्य आयोजन वर्षों से होता आ रहा है। जिसका नगर में जगह-जगह पर स्वागत सम्मान किया जाता है। दो दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। रात के चारों पहर शिव भक्त भजन कीर्तन, नाचते, गाते, अबीर गुलाल उड़ाते भगवान शिव का पूजन एवं श्रृंगार करते हैं और भगवान शिव पार्वती के विवाह का उत्सव मनाते हैं। नगर और सुदूर क्षेत्रों से शिव भक्त यहां महाशिवरात्रि पर जुटते हैं। पौराणिक शिव मंदिर कमेटी अध्यक्ष जनार्दन गिरि ने बताया कि 15 फरवरी की शाम महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की बारात धूमधाम से निकाली जाएगी।

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गोकर्ण तीर्थ पर होता है भव्य दीप यज्ञ
महाशिवरात्रि पर सक्सेना परिवार द्वारा भव्य दीप उत्सव दशकों वर्ष से आयोजित होता आया है। हजारों दीपों को गोकर्ण तीर्थ को सजाया जाता है। जिसकी शोभा देखते ही बनती है।

नीलकंठ मैदान में होता है भव्य पार्थिव शिवलिंग महा रुद्राभिषेक
जैसा कि पुराणों में महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का विधान बतलाया गया है। इसलिए वर्ष 2012 में तत्कालीन एसडीएम आईएएस शंभू कुमार ने गोकर्ण तीर्थ के निकट नीलकंठ मैदान में महा रुद्राभिषेक की परंपरा शुरू की थी जो निरंतर भव्य होती जा रही है। आयोजक पंडित रामदेव मिश्रा शास्त्री ने बताया कि इस बार भी वैश्विक कल्याण हेतु 151 पार्थिव शिवलिंग के साथ महा रुद्राभिषेक का आयोजन की योजना बन चुकी है। यह 13 वां आयोजन है।

इसलिए गोला को छोटी काशी कहा जाने लगा
गोला में पौराणिक शिव मंदिर के साथ परिसर में प्राचीन बूढ़े बाबा मंदिर, खुटार मार्ग अहमदनगर में प्राचीन बाबा क्लेश हरण, बाबा भूतनाथ मंदिर, अलीगंज स्थित प्राचीन बाबा गोकरन मंदिर, त्रिलोक गिरि मंदिर सहित कई प्राचीन शिवालय हैं। यहां के शिव महात्म्य के चलते गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी कहा जाने लगा। श्रद्धालु, शिवभक्त आस्था से वशीभूत होकर गोला को छोटी काशी कहते हैं, जो सामान्य बोलचाल में शामिल हो गया है।

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