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बाजार पर छाया होली का रंग, लोगों ने जमकर की खरीदारी
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लखीमपुर खीरी। होली की खरीदारी को लेकर रविवार को बाजार अच्छी खासी भीड़ रही। रंग- गुलाल की दुकानों से लेकर रेडीमेड कपड़े, मिठाई, नमकीन, बर्तन एवं जूता- चप्पल की दुकानों में देर रात तक भीड़ भाड़ रही। बच्चों ने रंग गुलाल एवं पिचकारी, मुखौटे खरीदे।
रंग पर्व से एक दिन पहले बाजार में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। होली को लेकर हर तरफ उल्लास और रौनक है। त्योहार को धूमधाम एवं उमंग के साथ मनाने के लिए करीब एक माह से ही घरों में तैयारी चल रही थी। होली कि दिन जितने करीब आते गए बाजार में उतनी की रौनक बढ़ती गई। पर्व से एक दिन पहले रविवार को बाजार से लेकर मॉल आदि में खरीदारों की भारी भीड़ रही। इससे देर रात तक बाजार में चहल पहल रही। बच्चों से लेकर महिलाएं और पुरूष कपड़ों से लेकर खाने पीने सामग्री खरीदते दिखे।
खूब बिके गेहूं, जौ की बाली और उपले
होलिका पूजन में गेहूं एवं जौ की बाली डालने की परंपरा है। इसलिए रविवार सुबह से ही जगह जगह पर गेहूं एवं जौं की बाली व गाय के गोबर के उपलों की दुकानें सज गई। गेहूं एवं जौं की बाली जहां 15 से 20 रुपये में बिकी तो वहीं पांच रुपये में एक उपला बिका। लोगों ने होलिका पूजन के लिए जौं की बाली एवं उपले खरीदकर होलिका दहन में सपर्पित किए।
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सुख समृद्घि के लिए महिलाओं ने की होलिका की पूजा
रविवार को दिनभर होलिका पूजन का उत्साह रहा। शाम को होलिका दहजन के लिए उस स्थल को विधिवत सजाय संवारा गया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से इकठ्ठा होकर परंपरागत रीति रिवाज से विधिवित होलिका का पूजन कर घर परिवार के लिए सुख समृद्घि की कामना की।
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रंग पर्व से एक दिन पहले बाजार में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। होली को लेकर हर तरफ उल्लास और रौनक है। त्योहार को धूमधाम एवं उमंग के साथ मनाने के लिए करीब एक माह से ही घरों में तैयारी चल रही थी। होली कि दिन जितने करीब आते गए बाजार में उतनी की रौनक बढ़ती गई। पर्व से एक दिन पहले रविवार को बाजार से लेकर मॉल आदि में खरीदारों की भारी भीड़ रही। इससे देर रात तक बाजार में चहल पहल रही। बच्चों से लेकर महिलाएं और पुरूष कपड़ों से लेकर खाने पीने सामग्री खरीदते दिखे।
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खूब बिके गेहूं, जौ की बाली और उपले
होलिका पूजन में गेहूं एवं जौ की बाली डालने की परंपरा है। इसलिए रविवार सुबह से ही जगह जगह पर गेहूं एवं जौं की बाली व गाय के गोबर के उपलों की दुकानें सज गई। गेहूं एवं जौं की बाली जहां 15 से 20 रुपये में बिकी तो वहीं पांच रुपये में एक उपला बिका। लोगों ने होलिका पूजन के लिए जौं की बाली एवं उपले खरीदकर होलिका दहन में सपर्पित किए।
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सुख समृद्घि के लिए महिलाओं ने की होलिका की पूजा
रविवार को दिनभर होलिका पूजन का उत्साह रहा। शाम को होलिका दहजन के लिए उस स्थल को विधिवत सजाय संवारा गया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से इकठ्ठा होकर परंपरागत रीति रिवाज से विधिवित होलिका का पूजन कर घर परिवार के लिए सुख समृद्घि की कामना की।