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चमत्कारिक है सेमरिया मंदिर की प्राचीन हनुमान मूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो धौरहरा/ईसानगर।
Updated Mon, 30 May 2016 11:49 PM IST
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हनुमान जी
- फोटो : अमर उजाला
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बड़ा मंगल पर विशेष
786 साल पहले हुई थी प्राण प्रतिष्ठा
मल्लापुर के राजा ने बनवाई थी सेमरिया में हनुमान गढ़ी
जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर ब्लाक ईसानगर के गांव सेमरिया की हनुमान गढ़ी सदियों पुरानी है। यहां स्थापित हनुमानजी में लोगों की अपार श्रद्धा है। लोग यहां दूर-दूर से आते हैं दर्शन पूजन के अलावा मांगलिक कार्यक्रम भी करते है। यह मंदिर करीब 786 साल पुराना है इसके पुख्ता प्रमाण भी मिलते है यह मंदिर श्रद्धालुओं की नजर में काफी चमत्कारिक है। जेठ माह के हर मंगलवार को यहां मेला लगता है।
सेमरिया स्थित हनुमान गढ़ी के बारे में बताया जाता है कि मल्लापुर राजघराने के राजा गंगा प्रताप सिंह के पूर्वजों ने इस मंदिर की स्थापना 1230 ईस्वी में माघ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को की थी। तभी मंदिर में हनुमानजी की प्राण प्रतिष्ठा की गई। स्थापना के बाद से अब तक यहां 15 महंत हो चुके हैं। पड़ोस के गांव शेखपुर के बढ़ई मक्का के हाथों से निर्मित एक रेहल आज भी गद्दी पर है। जिसपर स्थापना की तिथि और मक्का बढ़ई का नाम भी अंकित है। मंदिर के संग्रहालय में महंतों के पदचिह्न आज भी सुरक्षित हैं।
मंदिर में स्थापित हनुमान जी की आदमकद पाषाण प्रतिमा के बाईं ओर स्थापित एक अन्य हनुमान प्रतिमा के कंधों पर श्रीराम-लक्ष्मण विराजमान हैं। वहीं दूसरी ओर दाईं तरफ शिव जी की दुर्लभ प्रतिमा है। जिनकी पालथी पर मां पार्वती और गणेशजी विराजमान हैं। हनुमान गढ़ी के महंत केशवराम अवस्थी ने बताया कि सेमरिया हनुमान गढ़ी में साल में तीन बार दिवाली, रामनवमी और अक्षय नवमी को मेला लगता है। यहां प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक सत्संग का भी आयोजन किया जाता है। इस सिद्ध हनुमान गढ़ी में बजरंगबली के दर्शन के लिए अन्य प्रांतों से भी लोग हर मंगलवार को आते हैं।
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786 साल पहले हुई थी प्राण प्रतिष्ठा
मल्लापुर के राजा ने बनवाई थी सेमरिया में हनुमान गढ़ी
जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर ब्लाक ईसानगर के गांव सेमरिया की हनुमान गढ़ी सदियों पुरानी है। यहां स्थापित हनुमानजी में लोगों की अपार श्रद्धा है। लोग यहां दूर-दूर से आते हैं दर्शन पूजन के अलावा मांगलिक कार्यक्रम भी करते है। यह मंदिर करीब 786 साल पुराना है इसके पुख्ता प्रमाण भी मिलते है यह मंदिर श्रद्धालुओं की नजर में काफी चमत्कारिक है। जेठ माह के हर मंगलवार को यहां मेला लगता है।
सेमरिया स्थित हनुमान गढ़ी के बारे में बताया जाता है कि मल्लापुर राजघराने के राजा गंगा प्रताप सिंह के पूर्वजों ने इस मंदिर की स्थापना 1230 ईस्वी में माघ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को की थी। तभी मंदिर में हनुमानजी की प्राण प्रतिष्ठा की गई। स्थापना के बाद से अब तक यहां 15 महंत हो चुके हैं। पड़ोस के गांव शेखपुर के बढ़ई मक्का के हाथों से निर्मित एक रेहल आज भी गद्दी पर है। जिसपर स्थापना की तिथि और मक्का बढ़ई का नाम भी अंकित है। मंदिर के संग्रहालय में महंतों के पदचिह्न आज भी सुरक्षित हैं।
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मंदिर में स्थापित हनुमान जी की आदमकद पाषाण प्रतिमा के बाईं ओर स्थापित एक अन्य हनुमान प्रतिमा के कंधों पर श्रीराम-लक्ष्मण विराजमान हैं। वहीं दूसरी ओर दाईं तरफ शिव जी की दुर्लभ प्रतिमा है। जिनकी पालथी पर मां पार्वती और गणेशजी विराजमान हैं। हनुमान गढ़ी के महंत केशवराम अवस्थी ने बताया कि सेमरिया हनुमान गढ़ी में साल में तीन बार दिवाली, रामनवमी और अक्षय नवमी को मेला लगता है। यहां प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक सत्संग का भी आयोजन किया जाता है। इस सिद्ध हनुमान गढ़ी में बजरंगबली के दर्शन के लिए अन्य प्रांतों से भी लोग हर मंगलवार को आते हैं।
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