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सोनारीपुर रेंज की ककरहा बीट में घायल मिले गैंडा शिशु की मौत
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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर रेंज की ककरहा बीट संख्या छह में मंगलवार को गश्त पर निकले पार्क कर्मियों को घायल अवस्था में मिले गैंडा शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी हिंसक वन्यजीव के हमले की दहशत से गैंडा शिशु की मौत होना बताया गया है।
दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर के ककरहा बीट संख्या छह में मंगलवार को सुबह पार्क कर्मी गश्त कर रहे थे। इस दौरान उनको एक नवजात गैंडा घायलावस्था में पड़ा दिखाई दिया, जिसके शरीर पर छोटे-बड़े 17 घाव थे। पार्क कर्मियों ने सूचना अधिकारियों को दी, जिसके बाद डीडी मनोज कुमार सोनकर, बेलरायां वार्डेन सीपी सिंह समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानपुर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह ने गैंडे का इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही गैंडा शिशु की मौत हो गई। डॉ. जेबी सिंह, डॉ. बाबूराम निगम, डॉ. दयाशंकर आदि ने गैंडा शिशु का पोस्टमार्टम किया, जिसमें घाव के निशान को देखते हुए प्रथम दृष्टया पाया गया कि गैंडा शिशु की मौत किसी हिंसक परभक्षी वन्यजीव के हमले के दौरान दहशत से हुई है।
2020 में कम हुई थी गैंडों की संख्या, 2021 की शुरूआत भी खराब
पलियाकलां। नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में तो गैंडों पर संकट के बादल मंडरा ही रहे हैं, लेकिन अब दुधवा नेशनल पार्क में भी साल दर साल गैंडों की संख्या कम होने लगी है। दुधवा में 2020 में दो गैंडों की मौत हुई थी, लेकिन 2021 की शुरूआत भी पार्क प्रशासन के लिए दुखद रही। नवजात गैंडा शिशु की मौत से पार्क प्रशासन को झटका लगा है। यहां बता दें कि पार्क प्रशासन के मुताबिक, दिसंबर 2020 में गैंडों की कुल संख्या 42 थी।
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दुधवा नेशनल पार्क में 1984 में गैंडा पुनर्वास परियोजना की शुरूआत की गई। मकसद था कि तेजी से लुप्त हो रहे एक सींग वाले गैंडे की नस्ल को यहां बढ़ावा मिल सके। शुरूआती दौर में यहां लाए गए गैंडों में से कुछ की मौत अचानक हो गई। इससे परियोजना को झटका लगा, लेकिन हार नहीं मानी गई और फिर से इस नस्ल को बचाने की मुहिम शुरू की गई, जिसमें लगातार गैंडे बढ़ते रहे हालांकि बीच में कुछ मौतें भी हुईं और कुछ गैंडा शिशुओं के जन्म भी हुए।
यह तादाद 2020 के शुरूआती महीनों में करीब 44 पहुंच गई, लेकिन मार्च 2020 पार्क की परियोजना के लिए ठीक नहीं रहा। 14 मार्च को दक्षिण सोनारीपुर रेंज के सलूकापुर क्षेत्र में स्थित गैंडा पुनर्वास परियोजना की छोटी पलिया बीट के कक्ष संख्या चार में एक दो माह के नवजात मादा गैंडा शिशु का शव पड़ा मिला था। वहीं दस दिन के अंदर ही दक्षिण सोनारीपुर रेंज की ही सलूकापुर क्षेत्र के ककरहा बीट की कक्ष संख्या पांच के पास एक डेढ़-दो साल के नर गैंडे का अधखाया शव मिला था। पार्क प्रशासन के मुताबिक, बाघ के हमले में गैंडे की मौत हुई थी। दिसंबर 2020 में गैंडों की कुल संख्या 42 थी। अब 2021 की शुरूआत में ही एक नवजात गैंडे की फिर मौत हो गई है।
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दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर के ककरहा बीट संख्या छह में मंगलवार को सुबह पार्क कर्मी गश्त कर रहे थे। इस दौरान उनको एक नवजात गैंडा घायलावस्था में पड़ा दिखाई दिया, जिसके शरीर पर छोटे-बड़े 17 घाव थे। पार्क कर्मियों ने सूचना अधिकारियों को दी, जिसके बाद डीडी मनोज कुमार सोनकर, बेलरायां वार्डेन सीपी सिंह समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानपुर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह ने गैंडे का इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही गैंडा शिशु की मौत हो गई। डॉ. जेबी सिंह, डॉ. बाबूराम निगम, डॉ. दयाशंकर आदि ने गैंडा शिशु का पोस्टमार्टम किया, जिसमें घाव के निशान को देखते हुए प्रथम दृष्टया पाया गया कि गैंडा शिशु की मौत किसी हिंसक परभक्षी वन्यजीव के हमले के दौरान दहशत से हुई है।
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2020 में कम हुई थी गैंडों की संख्या, 2021 की शुरूआत भी खराब
पलियाकलां। नेपाल के चितवन राष्ट्रीय निकुंज पार्क में तो गैंडों पर संकट के बादल मंडरा ही रहे हैं, लेकिन अब दुधवा नेशनल पार्क में भी साल दर साल गैंडों की संख्या कम होने लगी है। दुधवा में 2020 में दो गैंडों की मौत हुई थी, लेकिन 2021 की शुरूआत भी पार्क प्रशासन के लिए दुखद रही। नवजात गैंडा शिशु की मौत से पार्क प्रशासन को झटका लगा है। यहां बता दें कि पार्क प्रशासन के मुताबिक, दिसंबर 2020 में गैंडों की कुल संख्या 42 थी।
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दुधवा नेशनल पार्क में 1984 में गैंडा पुनर्वास परियोजना की शुरूआत की गई। मकसद था कि तेजी से लुप्त हो रहे एक सींग वाले गैंडे की नस्ल को यहां बढ़ावा मिल सके। शुरूआती दौर में यहां लाए गए गैंडों में से कुछ की मौत अचानक हो गई। इससे परियोजना को झटका लगा, लेकिन हार नहीं मानी गई और फिर से इस नस्ल को बचाने की मुहिम शुरू की गई, जिसमें लगातार गैंडे बढ़ते रहे हालांकि बीच में कुछ मौतें भी हुईं और कुछ गैंडा शिशुओं के जन्म भी हुए।
यह तादाद 2020 के शुरूआती महीनों में करीब 44 पहुंच गई, लेकिन मार्च 2020 पार्क की परियोजना के लिए ठीक नहीं रहा। 14 मार्च को दक्षिण सोनारीपुर रेंज के सलूकापुर क्षेत्र में स्थित गैंडा पुनर्वास परियोजना की छोटी पलिया बीट के कक्ष संख्या चार में एक दो माह के नवजात मादा गैंडा शिशु का शव पड़ा मिला था। वहीं दस दिन के अंदर ही दक्षिण सोनारीपुर रेंज की ही सलूकापुर क्षेत्र के ककरहा बीट की कक्ष संख्या पांच के पास एक डेढ़-दो साल के नर गैंडे का अधखाया शव मिला था। पार्क प्रशासन के मुताबिक, बाघ के हमले में गैंडे की मौत हुई थी। दिसंबर 2020 में गैंडों की कुल संख्या 42 थी। अब 2021 की शुरूआत में ही एक नवजात गैंडे की फिर मौत हो गई है।