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Lakhimpur Kheri News: सोरायसिस पर जागरूकता की जरूरत, दूरी की नहीं
Wed, 28 Oct 2026 11:36 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 28 Oct 2026 11:36 PM IST
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लखीमपुर खीरी। त्वचा पर लाल चकत्ते और सफेद पपड़ी देखकर मरीजों से दूरी बनाने के बजाय उनके प्रति समझ और संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है। सोरायसिस छूने, हाथ मिलाने या साथ बैठने से नहीं फैलती, लेकिन इससे जुड़ी भ्रांतियों के कारण मरीजों को सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। विश्व सोरायसिस दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों से बीमारी के प्रति जागरूक होने और मरीजों के साथ सामान्य व्यवहार करने की अपील की।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम के अनुसार, सोरायसिस में त्वचा पर लाल चकत्ते बनने लगते हैं। इन पर धीरे-धीरे मोटी सफेद पपड़ी जम सकती है। प्रभावित हिस्से में खुजली, रूखापन और कभी-कभी खून निकलने की समस्या भी होती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बीमारी के लक्षण देखकर मरीज से दूरी बनाना या हाथ मिलाने से बचना उचित नहीं है, क्योंकि यह संक्रामक रोग नहीं है।
आनुवंशिक कारणों की भी हो सकती है भूमिका
डॉ. गौतम के अनुसार, सोरायसिस में आनुवंशिक कारणों की भूमिका हो सकती है। परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी होने पर दूसरे सदस्यों में इसका जोखिम बढ़ सकता है, हालांकि हर मरीज में पारिवारिक इतिहास होना जरूरी नहीं है। तनाव, त्वचा पर चोट और कुछ अन्य कारक इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। यह लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उपचार कराना चाहिए।
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त्वचा की देखभाल भी जरूरी
सोरायसिस से पीड़ित लोगों को त्वचा की नियमित देखभाल करनी चाहिए। नहाने के लिए बहुत गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। त्वचा को रूखा बनाने वाले साबुन और तेज रसायनों से बचें। नहाने के बाद खुशबू रहित मॉइस्चराइजर लगाएं। त्वचा को खुजलाने या पपड़ी को जबरन हटाने से बचें, क्योंकि इससे घाव और रक्तस्राव हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित उपचार जारी रखें।
सहयोग की जरूरत
शहर के बरखेरवा मोहल्ला निवासी 35 वर्षीय रमेश (काल्पनिक नाम) के हाथों पर लाल चकत्ते और सफेद पपड़ी जमने लगी थी। बीमारी के कारण कुछ लोग उनसे हाथ मिलाने और पास बैठने से कतराने लगे। वहीं, धौरहरा क्षेत्र की 28 वर्षीय सीमा (काल्पनिक नाम) को त्वचा पर चकत्तों और खुजली के कारण रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगी थी। दोनों के उदाहरण बताते हैं कि बीमारी के शारीरिक लक्षणों के साथ सामाजिक व्यवहार भी मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
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जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम के अनुसार, सोरायसिस में त्वचा पर लाल चकत्ते बनने लगते हैं। इन पर धीरे-धीरे मोटी सफेद पपड़ी जम सकती है। प्रभावित हिस्से में खुजली, रूखापन और कभी-कभी खून निकलने की समस्या भी होती है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बीमारी के लक्षण देखकर मरीज से दूरी बनाना या हाथ मिलाने से बचना उचित नहीं है, क्योंकि यह संक्रामक रोग नहीं है।
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आनुवंशिक कारणों की भी हो सकती है भूमिका
डॉ. गौतम के अनुसार, सोरायसिस में आनुवंशिक कारणों की भूमिका हो सकती है। परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी होने पर दूसरे सदस्यों में इसका जोखिम बढ़ सकता है, हालांकि हर मरीज में पारिवारिक इतिहास होना जरूरी नहीं है। तनाव, त्वचा पर चोट और कुछ अन्य कारक इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। यह लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है, इसलिए लक्षण दिखाई देने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उपचार कराना चाहिए।
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त्वचा की देखभाल भी जरूरी
सोरायसिस से पीड़ित लोगों को त्वचा की नियमित देखभाल करनी चाहिए। नहाने के लिए बहुत गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। त्वचा को रूखा बनाने वाले साबुन और तेज रसायनों से बचें। नहाने के बाद खुशबू रहित मॉइस्चराइजर लगाएं। त्वचा को खुजलाने या पपड़ी को जबरन हटाने से बचें, क्योंकि इससे घाव और रक्तस्राव हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित उपचार जारी रखें।
सहयोग की जरूरत
शहर के बरखेरवा मोहल्ला निवासी 35 वर्षीय रमेश (काल्पनिक नाम) के हाथों पर लाल चकत्ते और सफेद पपड़ी जमने लगी थी। बीमारी के कारण कुछ लोग उनसे हाथ मिलाने और पास बैठने से कतराने लगे। वहीं, धौरहरा क्षेत्र की 28 वर्षीय सीमा (काल्पनिक नाम) को त्वचा पर चकत्तों और खुजली के कारण रोजमर्रा के काम करने में परेशानी होने लगी थी। दोनों के उदाहरण बताते हैं कि बीमारी के शारीरिक लक्षणों के साथ सामाजिक व्यवहार भी मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।