फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Pitru Paksha: Fathers waiting for their loved ones to come for salvation

पितृ पक्ष : मुक्ति के लिए अपनों के आने का इंतजार कर रहे पितर

Mon, 12 Sep 2022 12:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 12 Sep 2022 12:42 AM IST
विज्ञापन
Pitru Paksha: Fathers waiting for their loved ones to come for salvation
मुक्तिधाम के पिंडदान कक्ष में रखीं अस्थियां।
मुक्तिधाम में अपनों के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं 150 से अधिक अस्थिकलश
विज्ञापन

घरवालों के न ले जाने पर मुक्तिधाम समिति कराएगी गंगा में विसर्जन, बैठक जल्द
लखीमपुर खीरी। शनिवार से पितृ पक्ष की शुरूआत हो चुकी है। पितरों को सद्गगति मिल सके और वह परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें, इसके लिए श्राद्ध करने से लेकर तर्पण करने की परंपरा है, लेकिन जिले में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने अपनों का दाह संस्कार तो कर दिया पर उसके बाद आगे की परंपरा निभाना भूल गए। शहर के मुक्तिधाम में रखे ऐसे 150 अस्थि कलश को अपनों की प्रतीक्षा है, जिससे उन्हें भी मोक्ष की प्राप्ति हो सके।
सेठघाट स्थित मुक्तिधाम में रहने वालों का कहना है कि इस समय 150 से अधिक अस्थि कलश पिंडदान भवन में रखे हैं, जिन्हें प्रतीक्षा है कि एक न एक दिन उनके बेटे-बेटियां या फिर अन्य कोई सगा संबंधी अस्थियां ले जाकर गंगा में प्रवाहित कर मोक्ष दिलाएगा। इसी प्रतीक्षा में पिंडदान पिछले एक साल में भर गया है।
विज्ञापन

पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि हर माह करीब 70-80 शवों का दाह संस्कार होता है। पिछले एक साल में करीब 700 अंतिम संस्कार हुए हैं, जिनमें से कुछ के बेटे-बेटियां समय पर आकर अस्थियां ले गए। मगर, बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो बाद में विसर्जन करने की बात कहकर इस तरफ का रास्ता ही भूल गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


अस्थियां बीनने आए और न ही ले जाने
मुक्तिधाम पर क्रिया कर्म कराने वाले पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वैसे तो दाहसंस्कार के दो तीन दिन बाद ही अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर देनी जानी चाहिए, लेकिन समयाभाव होने पर एक-दो माह बाद भी विसर्जित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार तो लोग अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां बीनने तक नहीं आते। इस पर स्वयं अस्थियां संग्रह कक्ष में सुरक्षित रखवा दी जाती हैं, ताकी यदि कोई उनका अपना आए तो उन्हें दी जा सकें। इस तरह 150 अस्थि कलश एकत्र हो गए हैं।


दस दिन में कोई नहीं आया तो खुद ही गंगा में करेंगे विसर्जन
सेठघाट पर क्रिया कर्म कराने वालों का कहना है यदि कोई अस्थि कलश नहीं ले गया तो पितृपक्ष के दिनों में ही इनको गंगा में प्रवाहित करा दिया जाएगा। पंडित अशोक कुमार मिश्रा बताते हैं कि पितृपक्ष का समापन 25 सितंबर को होगा। यदि दशमी तक लोग अस्थिकलश नहीं ले गए तो जिला प्रशासन की अनुमति लेकर स्वयं गंगा में प्रवाहित करवा देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed