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कई जगह क्रय केंद्र बंद, किसान औने-पौने दामों पर धान बेचने को विवश
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लखीमपुर की मैगलगंज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा किसानों का धान। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जनपद में धान खरीद के लक्ष्य को पूरा करने का प्रशासन दावा कर रहा है। ऐसे में कई इलाकों में क्रय केंद्रों पर या तो सन्नाटा पसरा है, या फिर वे बंद हो चुके हैं ऐसे में किसान मजबूरन औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर हैं। ऐसे में प्रशासन के दावों के विपरीत धान खरीद की तस्वीर अलग है।
इस संबंध में जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय का कहना है कि मंडियों में धान की आवक कम हो गई है। ज्यादातर क्रय केंद्रों पर किसान नहीं आ रहे हैं। पलिया मंडी में कुछ किसान धान लेकर आए हैं, लेकिन इनके पास अपने पंजीकरण कागज नहीं है। दूसरे रिश्तेदारों के नाम के पंजीकरण प्रस्तुत किए हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। शासनादेश के अनुसार किसान स्वयं या फिर अपने परिवार के सदस्य को क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए भेज सकता है। संबंधों के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड दिखाना होगा। मैगलगंज मंडी में आढ़तों की नीलामी बंद है, जिससे वहां धान की आवक नहीं हो रही है। क्रय केंद्र भी बंद किए जा चुके हैं। इससे किसान निकटवर्ती मंडी में खुले क्रय केंद्र पर धान बेच सकते हैं।
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पलिया: एक केंद्र की शिफ्टिंग के बाद भी किसानों को नहीं मिल सकी राहत
पलियाकलां। एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद के शुरुआती दिनों में तो किसानों का धान बेहतर तरीके से खरीदा जा रहा था लेकिन लक्ष्य पूरा होने के बाद सिर्फ औपचारिकता निभाई जाने लगी। एक केंद्र के काफी पहले बंद हो जाने के बाद यहां पर एक केंद्र को शिफ्ट भी किया गया लेकिन धान खरीद में किसानों को हमेशा परेशानी का सामना ही करना पड़ा।
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एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी। जिसमें मंडी समिति पलिया में दो केन्द्र बनाए गए थे। शुरुआती दिनों में धान खरीद में पारदर्शिता दिख रही थी लेकिन धीरे-धीरे खरीद में तेजी आई और पारदर्शिता नाम की चीज यहां से गायब होती गई।
कभी बारदाने का अभाव तो कभी धान में नमी आदि बताकर किसानों को टरकाया जाने लगा। जिससे किसान कई-कई दिन अपना धान मंडी में लेकर पड़े रहे लेकिन अब जैसे ही धान खरीद का लक्ष्य पूरा हुआ तो एक बार फिर खरीद के नाम पर औपचारिकता निभाई जाने लगी। बदहाल व्यवस्था के चलते किसानों की जहां उम्मीदें टूट गईं वहीं धान तुलवाने के बजाए किसानों को सीधे राइस मिल मालिकों के यहां भेजा जाने लगा। यह और बात है कि यहां भी किसानों को वही दिक्कत आ रही है। पलिया मंडी में एफएससी, एनसीसीएफ के दो केन्द्र थे। इसमें एनसीसीएफ का केंद्र काफी समय से बंद चल रहा है। ऐसे में यहां पर खाद्य विभाग के लोचनपुर एट कौआखेड़ा केन्द्र को शिफ्ट किया गया था लेकिन शिफ्टिंग के बाद भी किसानों को दिक्कत उठानी पड़ीं। मौजूदा समय के हालात यह हैं कि एक आध धान की ट्रॉली खड़ी हैं जिनमें केवल धान को सुखाया जा रहा है बाकी धान सीधे राइस मिल मालिकों के यहां भेजा जा रहा है।
एफएससी प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि उनके केन्द्र का लक्ष्य 45 हजार क्विंटल निर्धारित किया था। लेकिन उसके ऊपर धान खरीद चुके हैं। मंडी आने वाले किसानों का धान अब भी लिया जा रहा है और खरीद की जा रही है। किसानों को कोई दिक्कत न आए इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं।
धान खरीद की अंतिम तिथि सरकार की तरफ से 31 जनवरी तक निर्धारित है। लेकिन मौजूदा समय में मंडी के हालात को देखा जाए तो लगता है कि धान खरीद खत्म हो चुकी है और किसानों का सारा धान खरीदा जा चुका है। हालांकि सच्चाई इससे अलग है।
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आईजी, डीएम के सामने भी उठी थी खरीद की समस्या
आईजी लक्ष्मी सिंह, डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह शुक्रवार को पलिया पहुंचे थे। यहां किसानों से वार्ता के दौरान कुछ किसानों ने धान खरीद की समस्या को उनके सामने भी रखा था। कहा था कि बगैर रिश्वत लिए उनके धान को पास नहीं किया जाता है। कई-कई दिन खड़े रहने के बाद भी तौल को इंतजार करना पड़ता है।
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मैगलगंज मंडी में किसानों का सड़ रहा धान
चपरतला। कस्बा मैगलगंज की मंडी समिति में धान क्रय केंद्रों पर किसानों का धान पड़े-पड़े सड़ रहा है। महीना बात जाने के बाद भी धान की तौल नहीं हो सकी है। किसानों में केंद्र प्रभारियों और जिले के संबंधित अधिकारियों को लेकर नाराजगी भी है। कुछ किसानों का मंडी समिति में पड़े पड़े धान खराब भी हो चुका है ऐसी स्थिति में किसान मंडी से घर भी नहीं जा सकते क्योंकि मंडी में पड़ा हुआ धान अब निजी मंडियों में भी कोई नहीं खरीदेगा। इसीलिए किसान धान तुलवाने के लिए अड़ गए हैं और मंडी समिति में डेरा जमा दिया है। कई किसानों ने तो एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को अपना ज्ञापन भेजा है फिर भी कोई राहत नहीं मिल पाई है।
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मितौली के बरैया फार्म निवासी किसान सुखवंत सिंह का कहना है कि एक महीने से ऊपर से हम मंडी में पड़े हुए हैं काफी धान का नुकसान हो गया है। ज्ञापन के माध्यम से जानकारी दी है फिर भी हमारा धान नहीं तौला गया है
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नयागांव निवासी किसान जोगिंदर सिंह भी काफी दिनों से धान की तौल कराने को लेकर परेशान हैं उनका आरोप है कि काफी दिनों से मंडी में पड़े हुए हैं लेकिन उनका धान तौला नहीं जा रहा है ओर कोई उनकी सुन नहीं रहा है।
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धौरहरा: बिचौलियों से धान खरीद का आरोप
धौरहरा। किसानों ने आरोप लगाया है कि क्रय केंद्रो पर किसानों से धान खरीद न कर सीधे बिचौलियों के माध्यम से धान की खरीद की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि क्षेत्र के लेखपाल दलालों के माध्यम से आने वाला धान को सत्यापित किया गया। इसी कारण कई किसान धान क्रय केंद्रों पर न बेचकर सीधे मंडी में 900 से 1000 रुपये के बीच बेचने को विवश हुए। संवाद
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इस संबंध में जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय का कहना है कि मंडियों में धान की आवक कम हो गई है। ज्यादातर क्रय केंद्रों पर किसान नहीं आ रहे हैं। पलिया मंडी में कुछ किसान धान लेकर आए हैं, लेकिन इनके पास अपने पंजीकरण कागज नहीं है। दूसरे रिश्तेदारों के नाम के पंजीकरण प्रस्तुत किए हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। शासनादेश के अनुसार किसान स्वयं या फिर अपने परिवार के सदस्य को क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए भेज सकता है। संबंधों के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड दिखाना होगा। मैगलगंज मंडी में आढ़तों की नीलामी बंद है, जिससे वहां धान की आवक नहीं हो रही है। क्रय केंद्र भी बंद किए जा चुके हैं। इससे किसान निकटवर्ती मंडी में खुले क्रय केंद्र पर धान बेच सकते हैं।
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पलिया: एक केंद्र की शिफ्टिंग के बाद भी किसानों को नहीं मिल सकी राहत
पलियाकलां। एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद के शुरुआती दिनों में तो किसानों का धान बेहतर तरीके से खरीदा जा रहा था लेकिन लक्ष्य पूरा होने के बाद सिर्फ औपचारिकता निभाई जाने लगी। एक केंद्र के काफी पहले बंद हो जाने के बाद यहां पर एक केंद्र को शिफ्ट भी किया गया लेकिन धान खरीद में किसानों को हमेशा परेशानी का सामना ही करना पड़ा।
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एक अक्तूबर से धान खरीद शुरू हुई थी। जिसमें मंडी समिति पलिया में दो केन्द्र बनाए गए थे। शुरुआती दिनों में धान खरीद में पारदर्शिता दिख रही थी लेकिन धीरे-धीरे खरीद में तेजी आई और पारदर्शिता नाम की चीज यहां से गायब होती गई।
कभी बारदाने का अभाव तो कभी धान में नमी आदि बताकर किसानों को टरकाया जाने लगा। जिससे किसान कई-कई दिन अपना धान मंडी में लेकर पड़े रहे लेकिन अब जैसे ही धान खरीद का लक्ष्य पूरा हुआ तो एक बार फिर खरीद के नाम पर औपचारिकता निभाई जाने लगी। बदहाल व्यवस्था के चलते किसानों की जहां उम्मीदें टूट गईं वहीं धान तुलवाने के बजाए किसानों को सीधे राइस मिल मालिकों के यहां भेजा जाने लगा। यह और बात है कि यहां भी किसानों को वही दिक्कत आ रही है। पलिया मंडी में एफएससी, एनसीसीएफ के दो केन्द्र थे। इसमें एनसीसीएफ का केंद्र काफी समय से बंद चल रहा है। ऐसे में यहां पर खाद्य विभाग के लोचनपुर एट कौआखेड़ा केन्द्र को शिफ्ट किया गया था लेकिन शिफ्टिंग के बाद भी किसानों को दिक्कत उठानी पड़ीं। मौजूदा समय के हालात यह हैं कि एक आध धान की ट्रॉली खड़ी हैं जिनमें केवल धान को सुखाया जा रहा है बाकी धान सीधे राइस मिल मालिकों के यहां भेजा जा रहा है।
एफएससी प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि उनके केन्द्र का लक्ष्य 45 हजार क्विंटल निर्धारित किया था। लेकिन उसके ऊपर धान खरीद चुके हैं। मंडी आने वाले किसानों का धान अब भी लिया जा रहा है और खरीद की जा रही है। किसानों को कोई दिक्कत न आए इसके भी प्रयास किए जा रहे हैं।
धान खरीद की अंतिम तिथि सरकार की तरफ से 31 जनवरी तक निर्धारित है। लेकिन मौजूदा समय में मंडी के हालात को देखा जाए तो लगता है कि धान खरीद खत्म हो चुकी है और किसानों का सारा धान खरीदा जा चुका है। हालांकि सच्चाई इससे अलग है।
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आईजी, डीएम के सामने भी उठी थी खरीद की समस्या
आईजी लक्ष्मी सिंह, डीएम शैलेन्द्र कुमार सिंह शुक्रवार को पलिया पहुंचे थे। यहां किसानों से वार्ता के दौरान कुछ किसानों ने धान खरीद की समस्या को उनके सामने भी रखा था। कहा था कि बगैर रिश्वत लिए उनके धान को पास नहीं किया जाता है। कई-कई दिन खड़े रहने के बाद भी तौल को इंतजार करना पड़ता है।
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मैगलगंज मंडी में किसानों का सड़ रहा धान
चपरतला। कस्बा मैगलगंज की मंडी समिति में धान क्रय केंद्रों पर किसानों का धान पड़े-पड़े सड़ रहा है। महीना बात जाने के बाद भी धान की तौल नहीं हो सकी है। किसानों में केंद्र प्रभारियों और जिले के संबंधित अधिकारियों को लेकर नाराजगी भी है। कुछ किसानों का मंडी समिति में पड़े पड़े धान खराब भी हो चुका है ऐसी स्थिति में किसान मंडी से घर भी नहीं जा सकते क्योंकि मंडी में पड़ा हुआ धान अब निजी मंडियों में भी कोई नहीं खरीदेगा। इसीलिए किसान धान तुलवाने के लिए अड़ गए हैं और मंडी समिति में डेरा जमा दिया है। कई किसानों ने तो एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक को अपना ज्ञापन भेजा है फिर भी कोई राहत नहीं मिल पाई है।
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मितौली के बरैया फार्म निवासी किसान सुखवंत सिंह का कहना है कि एक महीने से ऊपर से हम मंडी में पड़े हुए हैं काफी धान का नुकसान हो गया है। ज्ञापन के माध्यम से जानकारी दी है फिर भी हमारा धान नहीं तौला गया है
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नयागांव निवासी किसान जोगिंदर सिंह भी काफी दिनों से धान की तौल कराने को लेकर परेशान हैं उनका आरोप है कि काफी दिनों से मंडी में पड़े हुए हैं लेकिन उनका धान तौला नहीं जा रहा है ओर कोई उनकी सुन नहीं रहा है।
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धौरहरा: बिचौलियों से धान खरीद का आरोप
धौरहरा। किसानों ने आरोप लगाया है कि क्रय केंद्रो पर किसानों से धान खरीद न कर सीधे बिचौलियों के माध्यम से धान की खरीद की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि क्षेत्र के लेखपाल दलालों के माध्यम से आने वाला धान को सत्यापित किया गया। इसी कारण कई किसान धान क्रय केंद्रों पर न बेचकर सीधे मंडी में 900 से 1000 रुपये के बीच बेचने को विवश हुए। संवाद