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तीसरे दिन ही रुका बचाव अभियान
ईसानगर
Updated Sun, 26 Jul 2015 10:50 PM IST
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धौरहरा के गांव भदईपुरवा में ग्रामीणों के विरोध बाद शुरू हुआ कटान से बचाने का काम तीसरे दिन ही रविवार को रुक गया। उधर कटान तेज होने से भूमि को नदी में समाते देख लोग निराश नजर आए। बाढ़ खंड द्वारा कराया जा रहा काम नहीं होने से लोग मायूस हो गए और एसडीएम को फोन कर इसकी जानकारी दी। उधर एसडीएम धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने ग्रामीणों को सोमवार से काम शुरू कराने का आश्वासन दिया है।
भदईपुरवा गांव में पिछले 13 दिनों से जबरदस्त कटान जारी है। काफी भूमि और करीब 13 घर कट चुके हैं। कटान रोकने और मुआवजे की मांग को लेकर 36 लोग अपने बच्चों के साथ 23 जुलाई को घाघरा नदी के मझधार में जाकर खड़े हो गए थे। जल समाधि लेने की चेतावनी पर अधिकारियों ने उन्हें मनाते हुए बाहर निकाला था और शुक्रवार से कटान की रोकथाम के लिए काम शुरू हो गया था। शनिवार को तीन घर कटने और गांव वालों ने मानक के अनुरूप काम न होने पर दो जेई का घेराव किया था। जैसे तैसे एसडीएम ने मामला शांत कराकर शनिवार को बचाव कार्य शुरू करा दिए थे, लेकिन रविवार को बाढ़ खंड से न कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही बचाव कार्य शुरू किए गए। परेशान ग्रामीणों ने एसडीएम से मामले को अवगत कराया है। उन्होंने सोमवार से काम शुरू कराने का आश्वासन भी दिया है।
एसडीएम-धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि ग्रामीणों ने बचाव कार्य न होने की सूचना मिली है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता से बचाव कार्य जारी रखने के लिए कहा गया है। सोमवार से हर हालत में बचाव कार्य शुरू हो जाएंगे।
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गोंडा-मैलानी रेल लाइन भी खतरे में
तिकुनियां। बार्डर पर बह रही मोहाना नदी का रुख तिकुनियां मंडी सहित गोंडा-मैलानी रेलवे लाइन की ओर होता जा रहा है। बचाने के प्रयास गंभीरता से न होने से बार्डर इलाके में संकट मंडराने लगा है।
नेपाल से निकलकर आने वाली कर्णाली और मोहाना नदी मिल गई हैं। कर्णाली नदी का पानी सीधे पहाड़ों से आकर तेज गति से मोहाना में गिरता है। जिससे मोहाना नदी की धारा दो गुना गति से बह रही है। मोहाना नदी नेपाल की सीमा में बार्डर से करीब पांच किमी दूर थी। ग्राम खैरटिया के प्रधान त्रिलोक सिंह कहते हैं कि उनकी पंचायत के तीन गांव अनूपनगर, कश्यपनगर, नया पिंड मोहाना नदी में पांच साल पहले ही समा चुके हैं। मोहाना नदी के कटान में घर बार के साथ उपजाऊ जमीन भी पानी हो गई जिससे लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। यही हाल ग्राम सूरतनगर का है गांव के पूर्व प्रधान रामकरन और पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा बताते हैं कि नदी ने कटान कर पूरे इलाके का भूगोल ही बदल दिया है। सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में चली जाने से गांव के तमाम लोग बेघर हो गए हैं।
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भदईपुरवा गांव में पिछले 13 दिनों से जबरदस्त कटान जारी है। काफी भूमि और करीब 13 घर कट चुके हैं। कटान रोकने और मुआवजे की मांग को लेकर 36 लोग अपने बच्चों के साथ 23 जुलाई को घाघरा नदी के मझधार में जाकर खड़े हो गए थे। जल समाधि लेने की चेतावनी पर अधिकारियों ने उन्हें मनाते हुए बाहर निकाला था और शुक्रवार से कटान की रोकथाम के लिए काम शुरू हो गया था। शनिवार को तीन घर कटने और गांव वालों ने मानक के अनुरूप काम न होने पर दो जेई का घेराव किया था। जैसे तैसे एसडीएम ने मामला शांत कराकर शनिवार को बचाव कार्य शुरू करा दिए थे, लेकिन रविवार को बाढ़ खंड से न कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही बचाव कार्य शुरू किए गए। परेशान ग्रामीणों ने एसडीएम से मामले को अवगत कराया है। उन्होंने सोमवार से काम शुरू कराने का आश्वासन भी दिया है।
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एसडीएम-धौरहरा ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि ग्रामीणों ने बचाव कार्य न होने की सूचना मिली है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता से बचाव कार्य जारी रखने के लिए कहा गया है। सोमवार से हर हालत में बचाव कार्य शुरू हो जाएंगे।
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गोंडा-मैलानी रेल लाइन भी खतरे में
तिकुनियां। बार्डर पर बह रही मोहाना नदी का रुख तिकुनियां मंडी सहित गोंडा-मैलानी रेलवे लाइन की ओर होता जा रहा है। बचाने के प्रयास गंभीरता से न होने से बार्डर इलाके में संकट मंडराने लगा है।
नेपाल से निकलकर आने वाली कर्णाली और मोहाना नदी मिल गई हैं। कर्णाली नदी का पानी सीधे पहाड़ों से आकर तेज गति से मोहाना में गिरता है। जिससे मोहाना नदी की धारा दो गुना गति से बह रही है। मोहाना नदी नेपाल की सीमा में बार्डर से करीब पांच किमी दूर थी। ग्राम खैरटिया के प्रधान त्रिलोक सिंह कहते हैं कि उनकी पंचायत के तीन गांव अनूपनगर, कश्यपनगर, नया पिंड मोहाना नदी में पांच साल पहले ही समा चुके हैं। मोहाना नदी के कटान में घर बार के साथ उपजाऊ जमीन भी पानी हो गई जिससे लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है। यही हाल ग्राम सूरतनगर का है गांव के पूर्व प्रधान रामकरन और पूर्व प्रधान राजकिशोर मिश्रा बताते हैं कि नदी ने कटान कर पूरे इलाके का भूगोल ही बदल दिया है। सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में चली जाने से गांव के तमाम लोग बेघर हो गए हैं।