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बाढ़ में बने नालों से परेशान गांववाले
अमर उजाला ब्यूरो/मझगईं।
Updated Thu, 28 Jul 2016 11:01 PM IST
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flood
- फोटो : amar ujala
- शारदा के कहर से उबर नहीं पा रहे लियाकत पुरवा वाले
- गहरे नालों से निकलने के लिए बिजली के खंभों का सहारा
- नदी के पानी से कटान भी है जारी, गांव वाले परेशान
क्षेत्र के नयापुरवा और लियाकत पुरवा गांव शारदा नदी के कहर से उबर नहीं पा रहे हैं। नयापुरवा गांव में बाढ़ के दौरान कई गहरे नाले बना दिए हैं और इनसे निकलने के लिए गांव वाले बिजली के खंभों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दौरान उनकी जान पर खतरा मंडराया करता है। इसके साथ ही कटान भी जारी है।
ग्रामीण बलराम, शत्रोहनलाल, बालक, नंदराम, रामासरे, प्रकाश, भरोसे, हरद्वारी, छोटेलाल, छत्रपाल आदि लोगों ने बताया कि एक माह से गांव में शारदा नदी का पानी भरा हुआ है और इसमें करीब आधा दर्जन गहरे नाले बन गए हैं। गांव में नाले बन जाने से गांव कई हिस्सों में बंट गया है तथा बाढ़ का पानी भरा रहने से गांव के लोग भूखे प्यासे रहने को मजबूर हैं। गांव के लोग बिजली का खंभा डालकर जान हथेली पर रखकर गांव से निकल रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि एक माह से अधिक हो गया है बाढ़ में घिरे हुए, लेकिन प्रशासन से अभी तक कोई सहायता नही मिली है। मदद न मिलने से गांव के लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों ने बताया कि मझगईं प्रधानपति अवधेश गुप्ता ने दो बार पूड़ी के पैकेट पूरे गांव में बंटवाएं हैं।
शारदा का उफान थमा, लेकिन गांवों में अब भी है पानी
पलियाकलां। शारदा नदी का उफान थम गया है लेकिन अब भी निचले गांवों और उनके खेतिहर इलाके में पानी है। हालांकि नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। खेतिहर इलाके में लगातार पानी होने से फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है और पशुओं के लिए चारे की किल्लत बनी हुई है। उधर सुहेली नदी अब उफान पर है और इसके चलते कई गांवों का खेतिहर इलाके में बाढ़ का पानी भर जाने से फसलें डूबी हुईं हैं। शारदा नदी अपने खतरे के निशान से 77 सेमी अब भी ऊपर चल रही है। शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 मीटर से 77 सेमी ऊपर 154.390 सेमी पर बह रही है। नदी का जलस्तर धीरे धीरे कम हो रहा है। देवीपुर, घोला, गजरौरा, सठियाना आदि गांवों का निचला हिस्सा और खेतिहर इलाका भी बाढ़ से प्रभावित है। फिलहाल फसलों को लेकर किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें हैं तो पशुओं के चारे की किल्लत बनी हुई है।
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- गहरे नालों से निकलने के लिए बिजली के खंभों का सहारा
- नदी के पानी से कटान भी है जारी, गांव वाले परेशान
क्षेत्र के नयापुरवा और लियाकत पुरवा गांव शारदा नदी के कहर से उबर नहीं पा रहे हैं। नयापुरवा गांव में बाढ़ के दौरान कई गहरे नाले बना दिए हैं और इनसे निकलने के लिए गांव वाले बिजली के खंभों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दौरान उनकी जान पर खतरा मंडराया करता है। इसके साथ ही कटान भी जारी है।
ग्रामीण बलराम, शत्रोहनलाल, बालक, नंदराम, रामासरे, प्रकाश, भरोसे, हरद्वारी, छोटेलाल, छत्रपाल आदि लोगों ने बताया कि एक माह से गांव में शारदा नदी का पानी भरा हुआ है और इसमें करीब आधा दर्जन गहरे नाले बन गए हैं। गांव में नाले बन जाने से गांव कई हिस्सों में बंट गया है तथा बाढ़ का पानी भरा रहने से गांव के लोग भूखे प्यासे रहने को मजबूर हैं। गांव के लोग बिजली का खंभा डालकर जान हथेली पर रखकर गांव से निकल रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि एक माह से अधिक हो गया है बाढ़ में घिरे हुए, लेकिन प्रशासन से अभी तक कोई सहायता नही मिली है। मदद न मिलने से गांव के लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों ने बताया कि मझगईं प्रधानपति अवधेश गुप्ता ने दो बार पूड़ी के पैकेट पूरे गांव में बंटवाएं हैं।
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शारदा का उफान थमा, लेकिन गांवों में अब भी है पानी
पलियाकलां। शारदा नदी का उफान थम गया है लेकिन अब भी निचले गांवों और उनके खेतिहर इलाके में पानी है। हालांकि नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। खेतिहर इलाके में लगातार पानी होने से फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है और पशुओं के लिए चारे की किल्लत बनी हुई है। उधर सुहेली नदी अब उफान पर है और इसके चलते कई गांवों का खेतिहर इलाके में बाढ़ का पानी भर जाने से फसलें डूबी हुईं हैं। शारदा नदी अपने खतरे के निशान से 77 सेमी अब भी ऊपर चल रही है। शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 मीटर से 77 सेमी ऊपर 154.390 सेमी पर बह रही है। नदी का जलस्तर धीरे धीरे कम हो रहा है। देवीपुर, घोला, गजरौरा, सठियाना आदि गांवों का निचला हिस्सा और खेतिहर इलाका भी बाढ़ से प्रभावित है। फिलहाल फसलों को लेकर किसानों के माथों पर चिंता की लकीरें हैं तो पशुओं के चारे की किल्लत बनी हुई है।
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